प्रतीक बब्बर के जन्म लेते ही उनकी मां स्मिता पाटिल का साया सिर से उठ गया. इस दौरान प्रतीक के नाना-नानी ने प्रतीक की जिम्मेदारी लेते हुए उनका पालन पोषण किया है. प्रतीक बताते हैं, मेरा बचपन नाना-नानी और मौसी के बीच ही गुजरा है. मैं एक टिपिकल मारठी परिवार में पला पढ़ा हूं.
अपने बचपन के दिनों को यादकर प्रतीक बताते हैं, मुझे रात में नींद नहीं आती थी, जिससे पूरा परिवार परेशान हो जाता था. ऐसे में मेरी नानी मेरी स्टोरी टेलर हुआ करती थीं. वे मेरे पास बैठकर मुझे घंटों कहानियां सुनाकर मुझे सुलाने की कोशिश किया करती थी. इस दौरान नानी को समझ आया कि मैं भूत की कहानियां सुनकर डर जाता हूं और मुझे नींद आ जाती है. नानी द्वारा बताया गया एक किरदार आजतक मेरे जेहन में है और मैं उसे जिंदगीभर नहीं भुला पाऊंगा. बकासुर की कहानी, बकासुर एक राक्षस था. इस किरदार से मुझे बहुत डर लगता था. यही वजह नानी और मौसी भी अक्सर यही कहानी सुनाकर सुला देती थीं. आज भी मेरे जेहन में वो याद ताजा है, जहां नानी सिरहाने में बैठ मराठी भाषा में कहानी सुना रही है. उनकी तरह स्टोरी टेलर अभी तक मुझे नहीं मिला.
बता दें, फिल्मों व डिजीटल माध्यम में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके प्रतीक अब अपनी आवाज के टैलेंट को एक्स्प्लोर कर रहे हैं. प्रतीक ने हाल ही में एक ऑडियो बुक को अपनी आवाज दी है. दुरजॉय दत्ता की इस किताब द लास्ट गर्ल टू फॉल इन लव को प्रतीक के साथ रसिका दुग्गल भी नरेट कर रही हैं. अपनी इस शुरुआत पर प्रतीक कहते हैं, जब मुझे नरेट करने का ऑफर मिला, तो मैं काफी नर्वस हो गया था. यह एक्स्पीरियंस ही मेरे लिए काफी अलग और नया सा था. हालांकि एक्साइमेंट भी इस बात की थी, कुछ हटकर करने जा रहा हूं. मैं इस दौरान अपने अंदर छुपे इस टैलेंट से भी रूबरू हुआ. कई बार आपके अंदर टैलेंट होता है लेकिन हम उसे पहचान नहीं पाते हैं. प्रतीक के वर्कफ्रंट की बात करें, तो हाल ही में उन्होंने लारा दत्ता संग वेब सीरीज की शूटिंग पूरी की है.