एक्टर- डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी की फिल्म 'कांतारा' थिएटर्स में धमाल मचा रही है. दक्षिण कर्नाटक के तुलूनाडू क्षेत्र की संस्कृति को खूबसूरती से स्क्रीन पर दिखाने वाली 'कांतारा' की तारीफ लोग जमकर कर रहे हैं और फिल्म की कमाई भी जोरदार चल रही है. कन्नड़ में रिलीज हुई इस फिल्म ने थिएटर्स में दो हफ्ते जमकर बिजनेस किया और हर तरफ इसकी चर्चा चलने लगी.
फिल्म के लिए अन्य भाषाओं के फैन्स की एक्साइटमेंट देखने के बाद मेकर्स ने इसे हिंदी, तेलुगू, तमिल और मलयालम में भी रिलीज किया. हिंदी और तेलुगू में तो 'कांतारा' शानदार बिजनेस कर रही है और इसकी एक कल्ट फॉलोइंग बन रही है. 'कांतारा' में 'भूत कोला' परंपरा को स्क्रीन पर देखकर लोग हैरान रह जा रहे हैं और इन सीन्स में ऋषभ शेट्टी के काम को भी अद्भुत कहा जा रहा है. लेकिन इसी 'भूत कोला' पर कमेंट के लिए अब एक कन्नड़ एक्टर पर FIR हो गई है.
धार्मिक भावना आहत करने का मामला
कर्नाटक पुलिस ने कन्नड़ एक्टर चेतन कुमार उर्फ चेतन अहिंसा के खिलाफ मिली एक शिकायत के बाद, उनपर FIR दर्ज की है. रिपोर्ट के अनुसार, चेतन के खिलाफ शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'कांतारा' में दिखाई गई 'भूत कोला' परंपरा पर कमेंट करते हुए, 'अपमानजनक' बयान दिया. शिकायत में कहा गया है कि चेतन का ये बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है.
क्या था चेतन का कमेंट?
'कांतारा' के एक्टर-डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा था कि 'भूत कोला' हिंदू संस्कृति का हिस्सा है. इंडियन एक्सप्रेस से रिषभ ने कहा, 'ये हिंदू संस्कृति और और हिंदू धार्मिक परंपरा का हिस्सा है. मैं एक हिंदू हूं और मैं अपने धर्म, और रिवाजों में विश्वास करता हूं जिसपर कोई सवाल नहीं उठा सकता. हमने जो कहा (फिल्म में) वो हिंदू धर्म में मौजूद एलिमेंट के जरिए कहा है.'
चेतन कुमार ने ऋषभ के इस बयान की आलोचना की थी. उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'खुशी है कि हमारी कन्नड़ फिल्म 'कांतारा' राष्ट्र स्तर पर चर्चा में है. डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी ने दावा किया है कि भूत कोला हिंदू संस्कृति है. गलत. हमारी पम्बड़ा/नलिके/परवा बहुजन परम्पराएं, वैदिक ब्राम्हणवादी हिंदुत्व से पहले की हैं. हम चाहते हैं कि ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन हमारी मूलनिवासी परंपराएं पूरी सच्चाई के साथ दिखाई जाएं.'
बुधवार को कुमार ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और कहा कि भूत कोला आदिवासी परंपरा का हिस्सा है और इसका ब्राह्मणवाद से संबंध नहीं है. 'कांतारा' में दक्षिण कन्नड़ के तटीय इलाके की 'भूत कोला' परंपरा दिखाई गई है. इसमें देवताओं और स्पिरिट्स की पशुरूप में पूजा की जाती है और उनसे समृद्धि लाने की प्रार्थना की जाती है.