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Film Review: 'प्रेम रतन धन पायो' की कहानी फीकी रह गई

लगभग 27 साल पहले निर्देशक सूरज बड़जात्या ने इंडस्ट्री को प्रेम के रूप में सलमान खान को दिया था, जिन्हें 'मैंने प्यार किया' फिल्म में काफी सराहा गया था.

फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो'

फिल्म का नाम: प्रेम रतन धन पायो
डायरेक्टर: सूरज बड़जात्या
स्टार कास्ट: सलमान खान, सोनम कपूर, दीपराज राणा, नील नितिन मुकेश, स्वरा भास्कर, अनुपम खेर, अरमान कोहली ,दीपक डोबरियाल
अवधि: 2 घंटा 54 मिनट
सर्टिफिकेट: U
रेटिंग: 3 स्टार

लगभग 27 साल पहले निर्देशक सूरज बड़जात्या ने इंडस्ट्री को प्रेम के रूप में सलमान खान को दिया था, जिन्हें 'मैंने प्यार किया' फिल्म में काफी सराहा गया था, उसके बाद दोनों ने मिलकर 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ साथ हैं' फिल्में बनाई जिसे दर्शक आज भी देखना पसंद करते हैं.

अब लगभग 16 साल बाद एक बार फिर से सलमान और सूरज की फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' रिलीज हुई है. क्या 2015 में जनता सूरज बड़जात्या की स्टाइल को पसंद करेगी? क्या कमर्शियल युग में यह पारिवारिक फिल्म एक बार फिर से अपनाई जायेगी? आइए फिल्म की समीक्षा करते हैं.

कहानी
यह कहानी है अयोध्या में रहने वाले प्रेम (सलमान खान) की, जो बड़ा दिलवाला है. रामलीला उसे जुबानी याद है, अपनी धुन में रहता है, प्रेम अपनी कमाई वहां की राजकुमारी मैथिली (सोनम कपूर) के चैरिटेबल ट्रस्ट में दान दे दिया करता है और इस बार खुद मैथिली से मिलने की कोशिश में अपने मित्र कन्हैया (दीपक डोबरियाल) के साथ राजमहल चला जाता है. प्रेम को मैथिली का स्वभाव और लोगों की हेल्प करने की अदा से बड़ा सरोकार है. खासतौर से जब बाढ़ की स्थिति आती है तो भी मैथिली सभी की सहायता करती है. प्रेम को कुछ ही दिनों में मैथिली से मिलने का सौभाग्य प्राप्त होता है और प्यार का माहौल शुरू हो जाता है. फिर कहानी में राजकुमार विजय (सलमान खान) और सौतेली बहनों स्वरा भास्कर (चंद्रिका) और आशिका भाटिया (राधिका) के साथ-साथ भाई अजय (नील नितिन मुकेश), देख रेख कर्ता चिराग (अरमान कोहली), दीवान साहब (अनुपम खेर) की एंट्री होती है और पारिवारिक रिश्तों की उथल पुथल वाली कहानी सामने आती है. अब उलझे रिश्तों को सुलझा पाना आसान होगा? यह जानने के लिये आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

स्क्रिप्ट
फिल्म की कहानी काल्पनिक और पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद पर बनाई गई है. लेकिन आज के युग में इतनी पुरानी कल्पना हजम नहीं हो पाती. मूंछ और बिना मूंछों का इंसान अपने स्वभाव से चिर परिचितों के द्वारा पहचाना नहीं जा पा रहा है. हालांकि फिल्म पर किया गया खर्च स्क्रिन पर दिखाई भी पड़ता है लेकिन वह एक तरह से व्यर्थ ही जान पड़ता है. सूरज बड़जात्या साहब को वास्तविकता का भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए था. भव्य सेट्स और उम्दा एक्टिंग के बीच स्क्रिप्ट फीकी रह गई. इंटरवल से पहले बना हुआ माहौल इंटरवल के बाद और बिखरता गया.

अभिनय
दोहरी भूमिका में सलमान का काम अपने दोनों किरदारों के साथ न्यायसंगत है वहीं फिल्म के बाकी कलाकारों जैसे सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, अनुपम खेर, नील नितिन मुकेश, अरमान कोहली , दीपक डोबरियाल, संजय मिश्रा ,दीपराज राणा ने भी सहज भूमिका निभाई है.

संगीत
फिल्म का संगीत पहले से ही लोकप्रिय है खासतौर से टाइटल ट्रैक, लेकिन कुछ गानों को कम किया जा सकता था जिसकी वजह से फिल्म थोड़ी और छोटी और क्रिस्प हो सकती थी. गानों की वजह से फिल्म और भी लंबी होती गई.

कमजोर कड़ी
फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी स्क्रिप्ट और गति है, जो और भी ज्यादा क्रिस्प हो सकती थी और इसकी वजह से अच्छे कलाकार होने के बावजूद फिल्म उम्दा नहीं हो सकी है. कहानी पर विशेष ध्यान दिया जाता तो फिल्म किसी और लेवल पर जाती.

क्यों देखें
सलमान खान की मौजूदगी, सूरज बड़जात्या के पारिवारिक प्रेम और पूरी तरह से साफ सुथरी फिल्मों के अगर आप आदि हैं, तो यह फिल्म आप परिवार के साथ जरूर देखें.

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