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Jamun Review: बाप-बेटी के खूबसूरत रिश्ते पर टिकी फिल्म, देती है कभी हार ना मानने की सीख

रघुबीर यादव और श्वेता बासु प्रसाद की फिल्म जामुन रिलीज हो चुकी है. जामुन प्रसाद नाम के आम आदमी की इस कहानी में क्या है खास हम आपको बता रहे हैं. पढ़िए हमारा रिव्यू.

Jamun मूवी पोस्टर Jamun मूवी पोस्टर
फिल्म:जामुन
3/5
  • कलाकार : रघुबीर यादव, श्वेता बासु प्रसाद, सनी हिंदुजा, सौरभ गोयल
  • निर्देशक :गौरव मेहरा

आम इंसान की जिंदगी मुश्किलों से भरी है. इसमें कोई चमत्कार नहीं होते. आपको हमेशा अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए खुद ही कोशिश करनी होती है, और अगर आप ऐसा ना कर पाएं तो जरूरत होती है अपने अपनों की. कभी-कभी जिंदगी में सबकुछ खुद करने वाले को भी ऐसी परिस्थिति से गुजरना पड़ता है, जब उसे किसी दूसरे का हाथ थामना पड़े. ऐसे में मदद मांगकर आगे बढ़ना बुरा नहीं है. 

क्या है फिल्म की कहानी?

कुछ ऐसी ही सीख देती है रघुबीर यादव और श्वेता बसी प्रसाद स्टारर फिल्म जामुन. जामुन, कहानी है जामुन प्रसाद (रघुबीर यादव) नाम के व्यक्ति की, जो एक होमियोपैथी क्लिनिक चलता है. जामुन प्रसाद एक खुशमिजाज इंसान है, जिसके जिम्मे अपनी 28 साल की बेटी की शादी है. जामुन प्रसाद का एक बेटा भी है, जो उनके मुताबिक किसी लायक नहीं है. 

जहां जामुन की बेटी चेतना (श्वेता बासु) घर का ख्याल रखते है और पिता की मदद करने में कोई कमी नहीं छोड़ती, वहीं उनका बेटा अमर (सनी हिंदुजा) अपने तरीके से पिता का हाथ बंटाने की कोशिश कर रहा है और उसमें फेल भी हो रहा है. जामुन प्रसाद के खुद के शरीर ने उनका साथ देना कम कर दिया है और उनका बेटा भी बड़ी गलती कर अपनी जान खो बैठा है. ऐसे में चेतना अपने पिता को कैसे संभालेगी और जामुन प्रसाद का क्या होगा यही फिल्म में देखने वाली बात है. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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परफॉरमेंस 

मुझे नहीं लगता ऐसा कोई किरदार है जिसे रघुबीर यादव ना निभा सकते. जामुन प्रसाद के रोल में उन्होंने कमाल किया है. एक इंसान जो पूरी तरह से सक्षम होने के बाद Parkinson's जैसी बड़ी और लगभग लाइलाज बीमारी का मरीज हो जाता है और फिर दूसरों की मदद के सहारे जीता है, ऐसे किरदार को निभाना हर किसी के बस की बात नहीं होती. रघुबीर यादव इस किरदार में जान डालते हैं, इसे जीते हैं और आपको कभी हार ना मानने की सीख देते हुए इमोशनल कर देते हैं. 

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श्वेता बासु प्रसाद ने चेतना का किरदार निभाया है और उनका काम भी बेमिसाल है. श्वेता इंडस्ट्री के छुपे खजाने जैसी हैं, उनके एक्टिंग टैलेंट का जवाब नहीं है. चेतना के किरदार में वह कमी के साथ जीने वाली लड़की के दुख को दर्शाती हैं. साथ ही उनका किरदार जब समझता है कि वह जैसा है अच्छा है, तब आपको एक बड़ी सीख मिलती है. फिल्म में चेतना के लिए आए रिश्ते वालों का सीन आपको हमारे समाज का एक कड़वा सच दिखाया है. तो वहीं अपनी आंखों की एक्सरसाइज करते हुए चेतना का रोना, बताता है कि उसे किस बोझ के साथ जीना पड़ रहा है. 

एक्टर सनी हिंदुजा इस फिल्म में जामुन प्रसाद के बेटे अमर के किरदार में हैं. उन्होंने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है. फिल्म के एक सीक्वेंस में आप अमर और जामुन के किरदार को लड़ते देखेंगे, जो उनका बेस्ट सीन था. अमर के किरदार के अंदर की कशमश और उनके गिल्ट को सनी अच्छे से प्रस्तुत करते हैं. वहीं एक्टर सौरभ गोयल ने चेतना का लव इंटरेस्ट और जामुन प्रसाद के डॉक्टर का किरदार निभाया है. उनका काम भी फिल्म में बढ़िया है. 

निर्देशन 

डायरेक्टर गौरव मेहरा ने इस कहानी को लिखा है और इस फिल्म का निर्देशन किया है. उन्होंने बहुत सिंपल सी कहानी को बहुत बढ़िया अंदाज में लिखा और परोसा है. इस फिल्म की सिंपल सी कहानी में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं, जो इसे नॉट सो सिंपल बताते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है. इसमें सिर्फ एक गाना है जो फिल्म के अंत में आता है. फिल्म जामुन को आप जिओ सिनेमा पर देख सकते हैं. 

 

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