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Review: 'HIT' हैं राजकुमार राव, सस्पेंस-थ्रिलर की बूस्टर डोज के लिए तैयार हो जाएं

HIT: The First Case Review: सस्पेंस-थ्रिलर का वादा करने वाली राजकुमार राव की ये फिल्म आपको कुर्सी की पेटी बांधने पर मजबूर करेगी या नहीं, हम बताने वाले हैं.

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HIT: The First Case Review HIT: The First Case Review
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सस्पेंस जो कुर्सी की पेटी बांधने को मजबूर रखे
  • कहानी जो बोर नहीं करती, एक्टर्स का शानदार काम
फिल्म:HIT: The First Case
3.5/5
  • कलाकार : राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा
  • निर्देशक :Sailesh Kolanu

सस्पेंस-थ्रिलर एक ऐसा जॉनर है जो सभी को पसंद आ जाता है. अगर कहानी में दम हो तो आराम से आप दो-ढाई घंटे की फिल्म बिना बोर हुए देख लेते हैं. लेकिन हां उस सस्पेंस में लॉजिक होना जरूरी होता है, पता चले सिर्फ दर्शकों की फिरकी लेने के लिए मेकर्स कहानी को घुमावदार बना रहे हों. यही वो फेर है जो किसी भी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म को हिट या फिर फ्लॉप बना देता है. राजकुमार राव की फिल्म आई है- HIT: The First Case. तेलुगू फिल्म की रीमेक है, जो काफी सफल रही थी, ऐसे में प्रेशर जबरदस्त रहा. अब सक्सेस मिली है या मुंह की खाई है, जानते हैं.

कहानी

दो लड़कियों का किडनैप हुआ है. एक का नाम है प्रीति और दूसरी है नेहा (सान्या मल्होत्रा). नेहा, पुलिस ऑफिसर विक्रम ( राजकुमार राव) की गर्लफ्रेंड है. लेकिन विक्रम को जांच करनी है प्रीति के किडनैपिंग वाले केस की. मतलब एक तरफ गर्लफ्रेंड की टेंशन है तो दूसरी तरफ फर्ज निभाना है. केस की जांच आगे बढ़ती रहती है, विक्रम के हाथ कई सबूत लगते हैं, कई लोगों से वो पूछताछ करता है और इन दोनों ही किडनैपिंग- प्रीति और नेहा में कनेक्शन सामने आ जाता है. क्या कनेक्शन है, कैसे कड़ियां जुड़ी हैं, ये सारा सस्पेंस का पार्ट है, जो यहां नहीं बताया जा सकता.

बस इतना है कि विक्रम को पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) की बीमारी है. उसकी जिंदगी में पहले कुछ ऐसा हुआ है, जिस वजह से वो भयंकर डिप्रेशन में है. बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पुलिस की जैसी नौकरी रहती है, उसके वो घाव समय-समय पर हरे होते रहते हैं. खैर विक्रम की लाइफ का वो हिस्सा भी सस्पेंस की किताबों में कैद है. तो मोटी-मोटी ये कहानी है. पूरी फिल्म में छानबीन चल रही है, कड़ियों को जोड़ने का काम हो रहा है. 

रीमेक है, लेकिन मजा पूरा देती है

2020 में तेलुगू फिल्म आई थी HIT: The First Case. उस फिल्म के डायरेक्टर Sailesh Kolanu थे. अब उसी फिल्म का रीमेक है ये वाली हिट. बढ़िया बात ये है कि इस बार भी डायरेक्शन की कुर्सी Sailesh Kolanu ने ही संभाल रखी है. जिसने तेलुगू वाला वर्जन नहीं देखा है, उसके लिए तो राजकुमार राव की ये फिल्म एक गजब का एक्सपीरियंस रहने वाली है. और जिसने देख भी रखी है, वो भी इस बात की तारीफ कर सकता है कि रीमेक होने के बावजूद भी फिल्म ने नयापन का अहसास कई मौकों पर करवाया है.

सस्पेंस को सहेजना भी एक कला है

सस्पेंस थ्रिलर का बेस्ट एग्जांपल हाल के सालों में दृश्यम को माना जाता है. उसी लिस्ट में अब HIT: The First Case को भी जोड़ देना चाहिए. सिर्फ कहानी नहीं बताई है, बकायदा हर परत को एक-एक कर खोला है, हर सस्पेंस के पीछे एक वाजिब तर्क रखा है और दर्शक सिर्फ टकटकी लगाए देखते रहेंगे. शुरुआत से लेकर अंत तक, इस फिल्म ने एक बार भी ये सोचने पर मजबूर नहीं किया कि ये तो ज्यादा हो गया है, या ये नहीं होता तो भी चल सकता था. फिल्म जैसे-जैसे क्लाइमेक्स की ओर बढ़ती है, हर कड़ी एक दूसरे से जुड़ जाती है. ये बड़ी बात है, हाल की कई फिल्मों में ये बड़ी खामी रही है जहां पर दर्शक मन में कई सारे सवाल लेकर थिएटर से बाहर जाते हैं. लेकिन हिट के मेकर्स ने इस शिकायत को दूर किया है.

राजकुमार तो हिट ही चल रहे हैं

राजकुमार राव एक बेहतरीन एक्टर हैं. हर किरदार में फिट बैठना उनकी फितरत है. ऐसे में उनकी तारीफ करना भी हमारे लिए आदत सा बन गया है. तो बस फिल्म के टाइटल की तरह वे पूरी तरह हिट साबित हुए हैं. किरदार में ढलना तो ट्रिक होता ही है, उसके साथ-साथ दर्शकों को भी अपने साथ जोड़ लेना कला है. ये काम राजकुमार ने बखूबी किया है. पुलिस की नौकरी में जुर्म की दुनिया के अलावा भी कई परते होती हैं, ये राजकुमार के किरदार ने बता दिया है. सान्या मल्होत्रा को फिल्म की लीड एक्ट्रेस बताया गया है. लेकिन फिल्म में उनके किरदार को वो स्क्रीन टाइम नहीं मिला है. पर सच ये है कि उनके किरदार को ज्यादा स्पेस मिलता, तो कहानी बिखर सकती थी. ऐसे में ये मेकर्स का एक सोचा-समझा कदम है, जो फिल्म देखने के बाद शायद आपको ना खटके. सान्या ने जितना काम किया है, बढ़िया लगी हैं. 

शिल्पा शुक्ला के किरदार की बात करना भी जरूरी हो जाता है. कहानी से वे कैसे जुड़ी हुई हैं, ये तो अभी नहीं बताया जा सकता, लेकिन वे फिर इंप्रेस कर रही हैं, इसकी गारंटी जरूर दी जा सकती है. जैसे नवाजुद्दीन या कह लीजिए, पंकज त्रिपाठी को हम आर्ट सिनेमा वाले एक्टर मानते हैं, शिल्पा भी उसी कैटेगरी में फिट बैठती हैं. सहकलाकारों में दलीप ताहिल, रोहन सिंह, मिलिंद गुनाजी का काम काफी बढ़िया कहा जाएगा.

निर्देशन फिल्म की मजबूत कड़ी है

Sailesh Kolanu के निर्देशन के बारे में ज्यादा बात करने का फायदा नहीं है, ओरिजनल फिल्म उन्होंने ही बनाई थी और बेहतरीन लगी थी. ऐसे में इस बार भी उन्होंने उसी कन्सेप्ट को बस हिंदी के दर्शकों के लिए तैयार कर दिया है. सस्पेंस-थ्रिलर और बीच-बीच में ड्रामे का बढ़िया मिश्रण देखने को मिला है. सबसे अच्छी बात ये है कि कड़ियों को काफी खूबसूरती से एक दूसरे के साथ जोड़ा गया है, सब कुछ एक मखन की तरफ फ्लो करता रहता है. सेकेंड हाफ में तो जिस तरह से कहानी पर बेहतरीन पकड़ बनाई गई है, जिस तरह से सभी सस्पेंस को सही तरीके से दर्शकों के सामने रखा गया है, वो देखकर मजा आता है.

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी सस्पेंस-थ्रिलर वाली फील देने के लिए काफी रहता है. कुछ गाने भी हैं जो कभी इंटेंसिटी को कम तो ज्यादा करने का काम करते रहते हैं. लेकिन फिल्म की कहानी एक तगड़ी इंटेंसिटी के साथ शुरू होती है और इसका अंत भी बिल्कुल उसी अंदाज में रहता है. और हां, विक्रम के साथ पास्ट में क्या हुआ था, ये भी तो जानना है, सेकेंड पार्ट आने वाला है, तब तक चिल कीजिए और इस फिल्म का मजा लीजिए.

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