फिल्म रिव्यूः सुपर नानी
एक्टरः रेखा, रणधीर कपूर, शरमन जोशी, श्वेता कुमार और अनुपम खेर
डायरेक्टरः इंद्र कुमार
ड्यूरेशनः2 घंटा 14 मिनट
रेटिंगः 1.5 स्टार
पिछले साल इंद्र कुमार ग्रैंड मस्ती (2013) जैसी सुपरहिट सेक्स कॉमेडी दे चुके हैं. लेकिन यह बात समझ से परे थे कि वे वापस 1980 के दौर में क्यों लौटना चाहते थे और अगर उन्होंने महिला सशक्तीकरण के विषय को उठाया भी तो इतने कमजोर ढंग से? उन्होंने एक उम्रदराज गृहिणी को माध्यम बनाकर कहानी कहने की कोशिश की है, लेकिन रेखा के अलावा फिल्म में ऐसा कोई भी फैक्टर नजर नहीं आता जो दर्शकों को फिल्म से जोड़ सके और पूरी फिल्म किसी टेलीविजन धारावाहिक जैसी लगती है. इंद्र कुमार इस फिल्म के जरिये मौजूदा दौर की नब्ज पहचानने में असफल रहे हैं और एकता कपूर छाप मेलोड्रामा में उलझकर रह गए.
कहानी में कितना दम
ये कहानी रेखा (भारती भाटिया) की है, जिसने अपने परिवार और बच्चों के लिए पूरा जीवन झोंक दिया लेकिन बच्चे आधुनिक हो जाते हैं तो कोई उसका महत्व नहीं समझता. फिर भारती का नाती शरमन जोशी आता है और वे नानी के मेकओवर को अंजाम देता है. रेखा इसी तरह का रोल खून भरी मांग में भी कर चुकी हैं, हालांकि संदर्भ अलग थे. इस तरह की कहानी बहुत ही सामान्य-सी है, और आजकल के टीवी पर आने वाले कई धारावाहिकों जैसी है. कुछ भी नया नहीं, और कई मौकों पर तो बहुत ही बोरिंग है.
स्टार अपील
रेखा का जलवा आज भी बरकरार है. वे शाश्वत सुंदरी है और कहा जा सकता है कि हर दिन के साथ उनकी खूबसूरती और बढ़ती ही जा रही है. ऐक्टिंग के मामले में भी वे माशाल्लाह कमाल ही हैं. लेकिन कमजोर स्टोरीलाइन और पुराने ढंग की कहानी ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है. शरमन ठीक-ठाक हैं. श्वेता कुमार को अभी काफी मेहनत करनी है. बाकी सभी कलाकारों ने अपने ढंग से अच्छा काम करने की भरपूर कोशिश की है.
कमाई की बात
फिल्म पूरी तरह से रेखा के करिश्मे पर टिकी है. कहानी कमजोर है. युवाओं वाला कनेक्ट भी नहीं है और म्यूजिक भी बेदम है. इसलिए फिल्म से किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती. बेटा और दिल जैसी हिट फिल्में दे चुके इंद्र कुमार का ग्रैंड मस्ती जैसी सेक्स कॉमेडी के बाद पारिवारिक फिल्म देने का एडवेंचर कोई बहुत सफल होता नजर नहीं आता. रेखा के फैन्स बेशक फिल्म को एक बार देखना चाहेंगे. लेकिन बाकी को खींचना फिल्म के लिए बड़ी चुनौती है.