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Film review: कमजोर कॉमेडी है 'बम्पर ड्रॉ'

'बंपर ड्रॉ', कॉमेडी ड्रामा शैली की फिल्म है जिसे इरशाद खान ने डायरेक्ट किया है,  यह मल्टीस्टारर फिल्म दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब साबित हो पाएगी या नहीं आइए जानते हैं.

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'बंपर ड्रॉ'
'बंपर ड्रॉ'

फिल्म का नाम: बम्पर ड्रॉ
डायरेक्टर: इरशाद खान
स्टार कास्ट: राजपाल यादव, सुब्रत दत्ता , जाकिर हुसैन
अवधि: 129 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 1 स्टार

'बंपर ड्रॉ', कॉमेडी ड्रामा शैली की फिल्म है जिसे इरशाद खान ने डायरेक्ट किया है, यह मल्टीस्टारर फिल्म दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब साबित हो पाएगी या नहीं आइए जानते हैं:

कहानी
यह कहानी है पेस्तों जी के ऊपर रखे 50 लाख के बंपर ड्रा की जिस पर कई किरदारों फारूक(राजपाल यादव), विलियम, वामन, गाली बाबा (जाकिर हुसैन), हरीचरन और डाक्टर बेदी की नजर होती है और इस पैसे को कौन हासिल कर पाता है इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चलता है.

स्क्रिप्ट
फिल्म की स्क्रिप्ट काफी कमजोर और बिखरी-बिखरी सी है. संवाद ठीक-ठाक से लिखे गए हैं लेकिन हास्य रस की फिल्म होते हुए भी हंसने के लिए काफी माथापच्ची करनी पड़ती है. कहानी में किरदारों की अधिकता है जिसकी वजह से काफी कंन्फ्यूजन का माहौल रहता है.

अभिनय
अभिनय के मामले में राजपाल यादव को देखना दिलचस्प रहता है, उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद सुनकर हंसी जरूर आती है. वहीं फिल्म के बाकी एक्टर्स जैसे जाकिर हुसैन, सुब्रत दत्ता ने भी ठीक काम किया है. कुछ किरदार काफी लाउड भी है जो हंसाने के लिए फोर्स करते हैं लेकिन हंसी नहीं आती. जाकिर हुसैन का गाली बाबा का किरदार भी कहीं-कहीं आपको हंसाता है.

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कमजोर कड़ी
फिल्म की जनसंख्या और कहानी के बढ़ने का स्टाइल काफी कमजोर है. कभी भी कुछ भी होता जाता है जिसकी वजह से फिल्म देखने का मूड गड़बड़ सा होता नजर आता है. कहानी और भी सटीक और क्रिस्प हो सकती थी. हल्की कहानी की वजह से अच्छे एक्टर्स भी फिल्म को संभाल नहीं पाते हैं.

क्यों देखें
अगर आप हल्की फुल्की कॉमेडी वाली फिल्मों और राजपाल यादव, जाकिर हुसैन के कायल हैं तो यह फिल्म जरूर देखें अन्यथा और किसी ऑप्शन का चयन करें.

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