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मां की मौत, जेल में पिता, देखकर टूट गई थीं संजय दत्त की बेटी, मगर कई लोगों ने मनाया जश्न

संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशला दत्त ने पिता के मुश्किल वक्त को याद किया. त्रिशाला ने कहा कि जब उनके पिता परेशानी से घिरे हुए थे, तब लोगों ने उनकी बर्बादी का जश्न मनाया. लोगों की नजरें उनके परिवार पर रहती थीं.

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संजय दत्त की बेटी का छलका दर्द (Photo: Instagram/@trishaladutt)
संजय दत्त की बेटी का छलका दर्द (Photo: Instagram/@trishaladutt)

संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशला दत्त फिल्मी दुनिया से दूर न्यूयॉर्क में रहती हैं. त्रिशाला, संजय और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं. ऋचा का साल 1996 में निधन हो गया था. मां के गुजर जाने के बाद संजय ही त्रिशला की जिंदगी बन गए. दूर रहकर भी त्रिशला और संजय एक दूसरे से काफी क्लोज बॉन्ड शेयर करते हैं. अब त्रिशला ने पिता के बुरे वक्त पर बात की है. 

पिता के बारे में क्या बोलीं त्रिशाला दत्त?

दरअसल, संजय दत्त पर जब 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े एके-56 (AK-56) राइफल और 9 एमएम (9 mm) पिस्टल जैसे प्रतिबंधित हथियार अवैध रूप से रखने का आरोप लगा था, तब उनकी बेटी त्रिशाला दत्त सिर्फ पांच साल की थीं. इसके तीन साल बाद उन्होंने अपनी मां ऋचा शर्मा को भी खो दिया था. फिर भी त्रिशाला का कहना है कि उन्होंने अपने पिता को उस सब के लिए कभी दोष नहीं दिया. 

'इनसाइड थॉट्स आउट लाउड' से बात करते हुए त्रिशाला ने अपने पिता के उतार-चढ़ाव और मुश्किल वक्त को याद किया. अपने पिता के मुश्किल हालातों पर बात करते हुए त्रिशाला बोलीं- उन्होंने इतनी कम उम्र में नशे की लत से लड़ाई लड़ी, उससे गुजरे, फिर उससे बाहर आए, फिर जेल गए, वहां से बाहर आए, तो फिर दोबारा जेल गए और वहां तीन साल तक रहे और फिर बाहर आए. मैं सोच भी नहीं सकती कि उस वक्त उन्हें कैसा महसूस हुआ होगा. 

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किन-किन हालातों से गुजरे संजय दत्त?

त्रिशाला दत्त ने आगे बताया कि जब पूरी दुनिया उनके परिवार के संघर्षों को देख रही थी, तब उस कंडीशन को संभालना काफी मुश्किल था. त्रिशाला बोलीं- यह बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं उस वक्त मैं अपने पिता से बात नहीं कर पाती थी. वो किसी न किसी संकट से गुजर रहे होते थे और अगर मैं उन्हें फोन भी करती थी, तो उनके आसपास हमेशा लोग घिरे रहते थे. उस मोड़ पर उनसे इस बारे में बात कर पाना काफी मुश्किल था. लेकिन जब पूरी दुनिया आपके परिवार को बिखरते हुए देखती है, तो यह आसान नहीं होता. मुझे लगता है कि बहुत से लोग असल में मुझ पर भी नजर रख रहे थे कि मेरा रिएक्शन क्या होगा. मेरा रिएक्शन यही था कि मुझे अपने पिता के लिए मजबूत रहना था. मैं अपने पिता से किसी भी बात के लिए कभी नाराज नहीं थी. वो जो कुछ भी है और जैसे भी हालात थे, उन्होंने अपनी तरफ से सबसे बेहतर करने की कोशिश की. 

त्रिशाला ने उस दौर को भी याद किया जब मुश्किल वक्त में कई लोगों ने उनके पिता की बर्बादी का जश्न मनाया था. वो बोलीं- मैंने यह सब देखा है. सब कुछ पढ़ा है. उनकी बर्बादी पर बहुत जश्न मनाया गया था. वो वापस जेल जा रहे थे, क्योंकि लोगों की अपनी-अपनी राय होती है.

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तमाम मुश्किलों के बावजूद त्रिशाला ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से दो सबसे बड़े सबक सीखे, हैं. वो बोलीं- मैंने अपने पिता से जो सबसे बड़ा सबक सीखा है, वो है जरूरतमंद लोगों की मदद करना. अगर कोई किसी परेशानी में है, तो हमेशा उसकी मदद के लिए आगे बढ़ो. कभी भी किसी को नीची नजर से मत देखो और कभी यह मत सोचो कि तुम किसी और से ऊपर या बड़े हो. मुझे लगता है कि यह बात विनम्रता से भी जुड़ती है. 

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