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अमिताभ बच्चन ही हैं सबकी चॉइस, हम जैसे बूढ़े एक्टर्स के लिए अब रोल नहीं लिखे जाते: शरत सक्सेना

बागबान ,गुलाम ,तुमको न भूलपाएंगे जैसी तमाम सुपर हिट फिल्मों में अभिनय कर चुके अभिनेता शरत सक्सेना ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में 40 साल बिताने के बाद भी आज क्यों नहीं मिल पा रहा है उन्हें काम. 250 से ज्यादा फिल्में और 40 साल इंड्रस्ट्री को देने के बाद भी खुश नहीं है अभिनेता शरत सक्सेना.

शरत सक्सेना-अमिताभ बच्चन शरत सक्सेना-अमिताभ बच्चन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गंजा होने के बाद मिला साबित करने वाले किरदार
  • अमिताभ बच्चन ही हैं सबकी पहली चॉइस

बागबान ,गुलाम ,तुमको न भूलपाएंगे जैसी तमाम सुपर हिट फिल्मों में अभिनय कर चुके अभिनेता शरत सक्सेना ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में 40 साल बिताने के बाद भी आज क्यों नहीं मिल पा रहा है उन्हें काम. 250 से ज्यादा फिल्में और 40 साल इंड्रस्ट्री को देने के बाद भी खुश नहीं है अभिनेता शरत सक्सेना.

आजतक से इंटरव्यू के दौरान शरत कहते है कि- मैंने फिल्म जगत में बहुत मन लगा कर काम किया है. मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि मुझे अच्छे फिल्म मेकर्स या अच्छी फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिला. 40 साल से ज्यादा मैंने इस इंड्रस्टी को दिए है. 250 से ज्यादा फिल्में की लेकिन फिर भी मैं ये कहूंगा कि कहीं न कहीं मुझसे गड़बड़ हो गई और जिसका खामियाजा भी मुझे भुगतना पड़ा. मेहनत और लगन में मेरी कोई कमी नहीं थी और जिस गड़बड़ की बात मैं कर रहा हूं वो ये है कि मैं फिल्म जगत में फिट नहीं हो पाया. जितना मुझे होना चाहिए था.

उन्होंने आगे कहा, "कमी शायद मुझमें ही थी. एक तो मेरी शक्ल बहुत खूबसूरत नही थी, दूसरा मेरा कंप्लेक्शन भी हीरो वाला गोरा चिट्टा नही था और तीसरा कि मेरा कोई कनेक्शन नहीं है. ये सारी वजह मेरे आड़े आई सोच कर तो मैं भी चला था कि लंबा चौड़ा हूं, हट्टा कट्टा हूं, हीरो तो बन ही जाऊंगा शायद वो ही मेरी सबसे बड़ी गलतफहमी थी. जो जल्द ही मुझे समझ में आ गई.

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अपने करियर के 30 साल फिल्मों में सिर्फ यस सर, ओके बॉस वाले छोटे किरदार मिले मेरा शरीर ही बना दुश्मन.
मैं कहूंगा की बड़ा लंबा वक्त मुझे लग गया खुद को एक अभिनेता के तौर पर साबित करने में. मेरे फिल्मी करियर के शुरुआती 25 से 30 सालों तक मुझे छोटे-छोटे किरदार ही मिले. मुझे या तो फिल्मों में फाइटर बना दिया जाता था और डायलॉग के नाम पर सिर्फ यस बॉस, ओक बॉस जैसे किरदार निभाने को मिलते थे. आज जो लोग 71 साल की उमर में मेरी फिटनेस की प्रशंसा कर रहे हैं. एक जमाना था की मैं 4 आई यही फिटनेस और पहलवानी शरीर मेरे लिए मेरा दुश्मन बन गया था. जो भी फिल्म मेकर मेरी बॉडी देखता था मुझे विलन बना देता था. फाइटर बना देता था और आज देखिए हर एक्टर अपनी बॉडी पर ध्यान देता है. कसरत करता है और आज वही फिटनेस 71 साल की उम्र में भी मुझे चर्चा में रखने में सहायक भी है तो दौर बदलता है और आज का दौर फिटनेस वाला है.

हम जैसे बूढ़े एक्टर्स के लिए अब रोल नहीं लिखे जाते, एक अमिताभ बच्चन ही है सबकी चॉइस.
ये बात सच है कि आज के समय में हमारे बॉलीवुड में हम जैसे बूढ़े अभिनेताओं को ध्यान में रख कर कोई रोल नहीं लिखा जाता. बहुत गिने चुने रोल के ही ऑप्शन होते है और उसमे भी अच्छा काम होना चाहिए और अच्छी कहानियां. उसके लिए फिल्म मेकर्स की सबसे पहली पसंद बच्चन साहब है जो की एक महान अभिनेता हैं. मैंने कई बार उनके साथ काम किया है. बड़ा ही शानदार व्यक्तित्व हैं. रही बात उनसे मेरी तुलना की तो जमीन आसमान का फर्क है. मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं. आज अगर बूढ़े अभिनेताओं को अच्छा काम नहीं मिल रहा तो उसका सबसे बड़ा कारण अच्छी कहानियों का न होना है, जिस वजह से हम जैसे सीनियर एक्टर को भी अच्छा काम नहीं मिल पाता और जो रोल ऑफर होते है वो ज्यादातर मैं खुद माना कर देता हूं. हाल ही में मैंने शेरनी फिल्म में विद्याबालन के साथ काम किया. वो किरदार मुझे भी बहुत पसंद आया और मैंने उसे चुना. हॉलीवुड फिल्मों की तरह बॉलीवुड को भी सीनियर्स एक्टर को ध्यान में रख कर प्रोजेक्ट बनाने चाहिए.

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आजकी फिल्म इंडस्ट्री यंग लोगो की है.
मैं फिर ये कहूंगा कि आज का जमाना अलग है. आज की फिल्म इंड्रस्ट्री यंग लोगो की है. आप देखिए सब नवजवान है. सारे पुराने एक्टर्स घर बैठ गए. ज्यादातर पुराने प्रोड्यूसर्स और फिल्म मेकर्स गायब ही हो गए. चाहे वो आर्ट डिपार्टमेंट हो या टेक्निकल डिपार्टमेंट के पुराने लोग. उन सबका काम उनके बच्चो ने टेक ओवर कर लिया है और अब वही लोग फिल्म जगत को चला रहे है, तो हम जैसे बूढ़े एक्टर्स को कोई ये तो मुंह पर तो नही कहता कि आप अब रिटायर हो गए है. अब आपको चले जाना चाहिए. ये बात तो खुद ब खुद समझ में आ जाती है. लेकिन मैं अगर अपनी बात करूं तो मैं अभी भी अड़ा हुआ हूं. जाने को तैयार नहीं हूं ये मेरी जिद्द है और फिल्मों में काम को लेकर जुनून भी.

गंजा होने के बाद मिले खुद को साबित करने वाले किरदार.
जैसा की मैने पहले कहा फिल्म जगत में 25 सालों से ज्यादा देने के बाद भी मेरी पहचान एक फाइटर की ही तरह थी, लेकिन एक फिल्म मेरे करियर में ऐसी भी आई. जिसका नाम आगाज था और उस फिल्म में सुनील शेट्टी ने मेरी खूब धुनाई की और मुझे गंजा कर के पीटा था. खैर उसके बाद मेरे जो बाल आए वो सफेद आए और फिर उन सफेद बालों को देख कर मुझे फिल्म तुमको न भूल पाएंगे में सलमान के पिता का रोल निभाने का मौका मिला. उसके बाद साथिया में मैने पिता का किरदार निभाया. जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया फिर जाकर मुझे एक अभिनेता के तौर पर गिना जाने लगा और उसके बात मैने कई फिल्मों में अच्छे किरदार निभाए. लेकिन ये सब करने में मुझे लंबा इंतजार करना पड़ा.

 

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