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बॉलीवुड में होती है राजनीति, बोलीं शमा सिकंदर, रश्मि देसाई का छलका दर्द- लास्ट मिनट निकाली गई हूं...

शमा सिकंदर और रश्मि देसाई ने आजतक के मुंबई मंथन में बॉलीवुड की राजनीति और असुरक्षा पर खुलकर बात की. वो बोलीं- यहां टैलेंट से ज्यादा पॉलिटिक्स चलती है. शमा ने जहां कहा कि ओटीटी की वजह से स्ट्रगल पहले से कम हो गया है. वहीं रश्मि ने बताया कि उन्हें कई बार शोज से निकाला गया है.

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शमा सिकंदर, रश्मि देसाई (Photo: Screengrab)
शमा सिकंदर, रश्मि देसाई (Photo: Screengrab)

एक्ट्रेस शमा सिकंदर और रश्मि देसाई का टीवी, ओटीटी और फिल्मों में लंबा करियर रहा है. उन्होंने माना कि बॉलीवुड में राजनीति जमकर होती है. आजतक के खास सेशन मुंबई मंथन में शमा और रश्मि ने कहा कि बॉलीवुड में खूब राजनीति होती है. बल्कि लोगों में असुरक्षा की भावना भी है.  

शमा का बेधड़क बयान

शमा बोलीं- इंडस्ट्री में बहुत राजनीति है. बिल्कुल है, मैं तो खुलकर बोलने वाली हूं. बॉलीवुड से बढ़कर कहीं राजनीति नहीं होती. नाम तो नहीं लूंगी. क्योंकि हम उन्हें शर्मिंदा नहीं करना चाहते बस रियलाइज कराना चाहते हैं कि आप ऐसा कर रहे हैं. ये फैक्ट है एक इंडस्ट्री का जिसे आप अनदेखा कर रहे हैं. आप देख नहीं पा रहे हैं कि यहां कुछ गलत हो रहा है. पावर में होने का मतलब ये नहीं है आप किसी को दबा दो. बॉलीवुड में उतनी ही राजनीति होती है जितनी एक्टिंग राजनीति में होती है. 

ओटीटी ने बदला गेम 

शमा बोलीं कि- आज की तारीख में एक्टर्स का संघर्ष भी कम हुआ है. और ये इंटरनेट की वजह से हो रहा है. ये जो बीच का एक माध्यम बना है, जहां पर आपको स्टार्स की जरूरत नहीं है, रियल स्टार्स के साथ जुड़ सकते हैं. अच्छा कंटेंट बना सकते हैं. तो ओटीटी ने सच में गेम को चेंज किया है. उनका कोई पुराना कनेक्शन नहीं है पुराने सिनेमा से, उन्होंने देखा ही नहीं है. जो आज रेलेवेंट हैं वो उन्हें सब जानते हैं, लेकिन जिन्हें वो नहीं जानते वो मतलब भी नहीं रखते, ऐसे हम इतिहास भी भूलते जा रहे हैं. 

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'लेकिन ओटीटी की वजह से जो चेंज आया है उसने बहुत सारे लोगों को काम दिया है. जिनके बारे में कोई जानता भी नहीं था. वो घर बैठे थे, बहुत सालों से. उनमें कई अच्छे एक्टर्स हैं.'

'हर जगह है राजनीति'

रश्मि ने आगे बॉलीवुड में होने वाली पॉलिटिक्स को लेकर कहा कि- राजनीति एक ऐसी चीज है जो हर जगह होती है. आप घर में ही क्यों ना हों, किचन पॉलिटिक्स हो जाती है. बाहर आप कहीं भी जाओ तो राजनीति होगी ही, हर कोई एक दूसरे को काटने में लगा रहता है, क्योंकि तभी तो आप तरक्की कर पाओगे. या तो आप सफल होगे किसी और से सीख कर, नहीं तो राजनीति करके.

लेकिन मुझे लगता है आप किससे कितना सीख पाते हो, वो जरूरी है. सिर्फ ज्ञान होने से नहीं होता, आप उसे कैसे और किस तरह से अप्लाई करते हैं मायने रखता है. राजनीति से ज्यादा इनसिक्योरिटी होती है. ये उनका काम ही नहीं उनका चेहरा भी बोलता है. ये असुरक्षा का अनुभव हर किसी के अंदर होता है. बॉलीवुड और टेलीविजन में मैंने एक चीज बहुत नोटिस की है. एक कैटेगरी में बहुत जल्दी डाल दिया जाता है. ये टीवी एक्टर है, ये बॉलीवुड का है, ये इंफ्लुएंसर है. इस कैटेगरी के हिसाब उनके फाइनेंस डिसाइड होते हैं. तो फिर क्या होता है कि उस टेबल पर आने के लिए आपको राजनीति तो करनी ही पड़ती है, वरना आप यहां कैसे बैठ पाएंगे.

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दर्शकों पसंद है धुरंधर-एनिमल

रश्मि ने आगे फिल्मों के बदलते दौर पर कहा कि - आजकल का यूथ सेंसलेस फिल्में पसंद नहीं करता. उन्हें नहीं अच्छी लगती, इसलिए फिल्में चलती भी नहीं. आज लोग रियल कंटेंट देखना चाहते हैं. आज का यूथ काफी एग्रेसिव है. उन्हें धुरंधर और एनिमल पसंद है. वो इंतजार करते हैं फैमिली मैन जैसे सीजन की. उन्हें असली चीज से मतलब है. कोविड के दौरान सब ऑनलाइन चले गए, तो सब स्मार्ट गए हैं. अगर आप फेम और ग्लैमर को कम्बाइन करो, वहीं तो इंडस्ट्री है. तो बदलाव जरूरी है. इसे आपको एक्सेप्ट करना होगा. 

रश्मि ने बताया कि वो कई जगह से रिप्लेस की जा चुकी हैं. वो बोलीं- ये जॉनराइज करने का तरीका हो जाता है ना कि आपको तो बहुत लोग टीवी में देख चुके हैं, इसकी वजह से मैंने बहुत काम खोया है. मुझे कई बड़े ओटीटी प्रोजेक्ट्स में से निकाला गया है. रिप्लेस किया गया है, जिनसे मुझे उम्मीद नहीं थी. आधे काम तो फोन पर ही हो जाते हैं, आप फोन घुमाओ और बस काम हो गया.  

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