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'आधी जिंदगी ट्रैफिक में गुजर जाती है', रश्मि देसाई का बड़ा बयान, ऑनलाइन डिलीवरी के तय हों नियम

मुंबई की सड़कों, ट्रैफिक और बीएमसी की कार्यशैली पर एक्ट्रेस रश्मि देसाई ने सवाल उठाए. आजतक के मुंबई मंथन सेशन में एक्ट्रेस बोलीं- आधी जिंदगी ट्रैफिक में निकल जाती है.

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बीएमसी के काम पर रश्मि ने की चर्चा (Photo: Screengrab)
बीएमसी के काम पर रश्मि ने की चर्चा (Photo: Screengrab)

मुंबई की बदहाली से एक्ट्रेस रश्मि देसाई भी जूझ रही हैं. आजतक के मुंबई मंथन सेशन में बात करते हुए रश्मि ने बीएमसी यानी वहां के नगर निगम की के काम और उनके लचर तरीकों की चर्चा की. रश्मि ने हालांकि अच्छी बातें भी गिनाई लेकिन उनका मानना है कि मुंबई में इतना ट्राफिक होता है कि आधी जिंदगी वहीं बीत जाती है. 

गड्ढों-कचरों से भरी सड़कें 

रश्मि ने इस मुद्दे पर कहा कि- अब बांद्रा की सड़कें ट्राफिक मुक्त हैं. लेकिन उन्हें भी सालों का वनवास काटना पड़ा है. पर हां गड्ढों की जो बात है, वो सही है, हम लोग गाड़ी चलाते नहीं कि उससे ज्यादा ब्रेक मारना पड़ता है.  हम तो गाड़ी में बैठे होते हैं, लेकिन जो चलकर जा रहा है इंसान वो ज्यादा जल्दी चला जाता है. वादे बहुत किए जाते हैं, लेकिन उनको पूरा करने की जो डेडलाइन है वो आगे बढ़ते ही जाती है. उसमें जूझता कॉमन आदमी है. 

रश्मि ने आगे कहा कि- मेट्रो बने हैं हमारी सुविधा के लिए, लेकिन कुछ तय समय पर उसमें ट्रैवल करना भी प्रॉब्लम हो जाता है. इतनी भीड़ होती है कि आपका जाना मुश्किल हो जाता है. वो अनुभव शेयर करना सुखद नहीं है. मुंबई में जो एक चीज अलग है कि- वीकेंड पर बाहर जाकर घूमने को मिलेगा. नहीं, इनको कोई शौक नहीं होता है. हमें बिल्कुल पसंद नहीं है, क्योंकि इतना ट्राफिक होता है. उसमें गाड़ी चलाना, चलके जाना, सही नहीं लगता. सिस्टम ही ठीक नहीं है. ट्राफिक लाइट जंप करके कोई भी चले जाते हैं, उसमें एक्सीडेंट्स बहुत होते हैं. 

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मॉनसून में किया अच्छा काम

रश्मि ने आगे हालांकि बीएमसी की अच्छी बात भी बताई. वो बोलीं- हमारी मुंबई बारिशों में डूब जाती है, पर इस बार काम अच्छा हुआ था. तो ट्रैवल करना आसान हो जाता है. मशक्कत की बात ये होती है कि बारिश में गड्ढे और गटर एकसाथ पता करने होते हैं, खुली होती है ना वरना इंसान अंदर चला जाता है पता नहीं चलता है. पर इस बात सच में काम अच्छा हुआ था. लेकिन सड़क और मेट्रो पर काम अच्छा हो सकता है. 

ऑनलाइन डिलीवरी पर लगे रोक

मैं जरूर मानती हूं और ये मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है कि- जोमैटो, स्विगी वालों पर थोड़ी रोक लगनी चाहिए. हाल ही में राघव चड्ढा जी ने इस मुद्दे को उठाया था. क्योंकि आप कभी भी आएं मलाड साइड तो आपको दिखेगा कि कोई सिस्टम फॉलो नहीं करता. वहां कोई रूल नहीं है. वहां कोई भी सिग्नल जंप कर देता है. तो मुंबई का आधा जीवन काम करने में निकल जाता है, और बाकी आधा ट्राफिक लाइट में. ये मेरा पर्सनल अनुभव है, जहां से मैं इसे देखती हूं. 

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