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Exclusive: 800 मास्क-400 गंडासे, ऐसे शूट हुआ एनिमल का फाइट सीन, सुनकर रणबीर के उड़े थे होश

एनिमल फिल्म का ट्रेलर देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह साल की सबसे बड़ी फिल्म बनने जा रही है. इसमें आर्ट डायरेक्टर सुरेश ने हमसे फिल्म के सेट से जुड़ी कई दिलचस्प किस्से शेयर किए हैं.

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रणबीर-सुरेश
रणबीर-सुरेश

इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'एनिमल' रिलीज को तैयार हैं. फिल्म से जुड़ी हर चीज की चारो तरफ चर्चा है. चाहे वो लोडेड मशीन गन हो या फिर मास्क लगाते बैकग्राउंड एक्टर्स. बता दें, पूरी फिल्म के सेट और प्रॉप डिजाइनिंग की जिम्मेदारी सुरेश ने संभाली है. सुरेश हमसे फिल्म की कई डिटेल्स शेयर करते हैं. 

हम सभी घनघोर प्रेशर में थे

एनिमल प्रोजेक्ट से जुड़ने पर सुरेश कहते हैं, 'जब हम फिल्म के शूटिंग की शुरुआत कर रहे थे. पूरे कास्ट और क्रू को इस बात की जानकारी थी कि यह फिल्म अब तक की सबसे वॉयलेंस फिल्म होने वाली है. हम सभी संदीप वांगा रेड्डी के इंटरव्यू से वाकिफ थे. धीरे-धीरे फिल्म की हाइप बढ़ने लगी. अब ट्रेलर के आने के बाद तो दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. इसी इमोशन को लेकर हम सभी घनघोर प्रेशर में थे. फिल्म रिलीज के बाद ही समझ आएगा कि हमने अपना काम कितना परफेक्ट तरीके से किया है.'

डायरेक्टर ने बता दिया था कि सबसे खूंखार फिल्म बनानी है

संदीप ने मुझे शुरुआत में बीट्स ऐंड पीसेस में जिस तरह से इंस्ट्रक्शन दिए थे, तो उस वक्त लगा यार ये तो कोई नॉर्मल सी ही फिल्म है. हम उतना ट्रि‍गर नहीं हुए थे. जब 15 दिन बाद फिल्म का पूरा नरेशन सुनाया गया, तो उस वक्त हम सभी वहां मौजूद थे. नरेशन सुनने के बाद तो मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था. रणबीर भी वहां खड़े होकर बोलने लगे, अरे यार मैं ये कैसे कर पाऊंगा, वहां मौजूद हर कोई एक ही इमोशन से गुजर रहा था कि आखिर कैसे हो पाएगा. खैर, चूंकि हम इस नांव में संवार हो चुके थे, तो जाहिर सी बात है, जो डायरेक्टर कहेंगे, हमें उन्हें पूरा सपोर्ट करना होगा. हम बस उनकी बातों को सुनते रहे और उसे फॉलो करते रहे. बस हम इसी बात पर फोकस कर रहे थे कि हमें इस साल की सबसे खूंखार फिल्म बनानी है. वैसे फिल्म की कहानी को सुनकर एंजायटी तो जरूर बढ़ी थी. इस फिल्म में जिस तरह मुख्य किरदार ट्रैवल करता है, मैंने अपने 20 साल के करियर में ऐसी कहानी नहीं देखी है. 

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गंडासा, मास्क सारा आइडिया डायरेक्टर संदीप का है 

सुरेश आगे कहते हैं,  मैंने संदीप के साथ काम कर यही समझा है कि वो किस तरह के डायरेक्टर हैं. उनकी जो भी मांग होती थी, वो फिजूल नहीं होती थी. वो कहानी से लेकर किरदार से लेकर प्रॉप्स.. हर चीज को लेकर पर्टिकुलर थे. उनके साथ काम करते वक्त मैं खुद इतने जोश से भर गया था कि मैं किसी भी तरह उन्हें निराश नहीं करना चाहता था. हमने जो भी प्रॉप्स स्कल मास्क, मास्क, गंडासा, गन वॉर मशीन को बना पाए हैं, तो उसका सारा क्रेडिट डायरेक्टर को ही जाता है. 

इसलिए इस्तेमाल किए गए थे स्कल मास्क और यूनिफॉर्म 
सुरेश बताते हैं, मैं एक उदाहरण के तौर पर बताता हूं, आप देखेंगे कि पूरी फिल्म के दौरान चाहे वो एक्शन हो या डांस सीक्वेंस बैकग्राउंड में खड़े लोगों ने मास्क पहन रखा है. उसके पीछे कारण यही है कि वो नहीं चाहते हैं कि दर्शक अपने सब्जेक्ट से डायवर्ट हो. अमूमन अलग-अलग चेहरे और बॉडी शेप लिए लोगों को देखकर थोड़ा डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं, लेकिन इसमें जानबूझकर मास्क लगा दिया गया है, ताकि डिस्टर्बेंस नहीं हो. यहीं से मास्क का आइडिया आया है. यूनिफॉर्म का इस्तेमाल भी इसी मकसद से हुआ है. 

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अब तक का सबसे लंबा फाइट सीक्वेंस देखेंगे दर्शक 

हमने इस फिल्म के लिए लगभग 800 मास्क बनाए हैं. ये सभी फाइबर ग्लास से बने हुए हैं. इस मास्क पर खास तरीके की निकल कोटिंग की गई है. इस फिल्म में एक सीक्वेंस है, जिसमें लगभग 20 मिनट का लंबा फाइट सीन रखा गया है. मुझे नहीं लगता कि अब तक किसी भी वॉर फिल्म में इतना लंबा एक्शन सीक्वेंस हुआ होगा. इस फिल्म में कई सारे वैरियेशन रहे हैं. हमें लगा कि एक्स(गंडासा) किसी भी एक्शन के लिए सबसे बेहतरीन टूल होगा. यह आइडिया भी संदीप का ही था. हमने 100 ओरिजनल गंडासा बनाया है और बाकि डमी के तौर पर 400 कुल्हाड़ी हैं. ये सभी रबर, लकड़ी, थर्माकॉल, आयरन और फाइबर से बनाए गए थे.  

मंदिर, एयरोप्लेन सब सेट का हिस्साृ
पूरा सेट बनाने में लगभग चार महीने लग गए थे. तीन जगह सेट बनाए गए थे. सॉन्ग में एक मंदिर आता है, वो हिमाचल में हमारे द्वारा बनाया गया सेट है. एरोप्लेन भी सेट ही है. इसके अलावा गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी में दो जगहों पर सेट बनाए गए थे. पूरे सेट को बनाने में दो महीने लगाए थे. कुल मिलाकर 300 से 350 लोगों ने मिलकर सेट बनाया था. 

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उस गन का नाम 'वॉर मिशन गन' दिया गया 
संदीप कहते हैं, अभी तक जितनी भी फिल्में देखी होंगी, दावा है इस तरह के बंदूक का इस्तेमाल नहीं किया गया है. हमने इसे बना तो दिया है, लेकिन नाम नहीं समझ आ रहा था. फिलहाल के लिए इस बड़े से गन का नाम 'वॉर मिशन गन' रखा गया है. इसकी शुरुआत बहुत ही इंट्रेस्टिंग रही है. हमने सबसे पहले पेंसिल से स्केच कर उसका कॉन्सेप्ट डिजाइन किया था. पूरे चार महीने में यह बनकर तैयार हुआ है. इसे बनाने में स्पेशली 100 कारीगर लगाए गए थे. यह आयरण और स्टील से बना है, इसका पूरा वजन 500 किलो का है.

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