scorecardresearch
 

17 की उम्र में लिखी किताब, गानों के लिए जीते अवॉर्ड, ऐसा है प्रसून जोशी का करियर

प्रसून जोशी का जन्म 16 सितंबर, 1971 को अलमोरा में हुआ था. उनके पिता डीके जोशी पीसीएस अफसर थे. उनकी मां सुषमा देवी पॉलिटिकल साइंस की लैक्चरर थीं और ऑल इंडिया रेडियो में परफॉर्म करती थीं. उन्होंने क्लैसिकल म्यूजिक सीखा था.

प्रसून जोशी प्रसून जोशी

बॉलीवुड इंडस्ट्री में साल 2000 के बाद से अगर किसी गीतकार ने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है तो उसमें सबसे आगे नाम आएगा प्रसून जोशी का. प्रसून जोशी एक जमाने में एडवरटाइजिंग फील्ड में ग्रो कर रहे थे मगर उनका लिखने के प्रति झुकाव बहुत पहले से था. आज वे बॉलीवुड इंडस्ट्री के बड़े गीतकार के तौर पर जाने जाते हैं. उनका नाम गुलजार, जावेद अख्तर और इरशाद कामिल के साथ लिया जाता है. ये अपने आप में ही बहुत बड़ी बात है. जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं प्रसून जोशी के करियर के बारे में.  

प्रसून जोशी का जन्म 16 सितंबर, 1971 को अलमोरा में हुआ था. उनके पिता डीके जोशी पीसीएस अफसर थे. उनकी मां सुषमा देवी पॉलिटिकल साइंस की लैक्चरर थीं और ऑल इंडिया रेडियो में परफॉर्म करती थीं. उन्होंने क्लैसिकल म्यूजिक सीखा था. घर में शुरुआत से ही प्रसून जोशी को काफी अच्छा माहौल मिला और कला-साहित्य की दिलचस्पी इसी वजह से बढ़ी. उनके पिता और मां दोनों ने ही क्लासिकल म्यूजिक सीखा था.

प्रसून को बचपन से ही लिखने में रुचि थी. उन्होंने 17 साल की उम्र में अपनी पहली किताब लिखी थी. किताब का नाम मैं और वो था और ये Thus Spake Zarathustra नाम की किताब से प्रेरित थी. प्रसून ने एडवरटाइजिंग फील्ड से अपने करियर की शुरुआत की थी. दिल्ली की एक बड़ी एडवरटाइजिंग कंपनी के साथ वे जुड़े. उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री समेत कई अन्य ब्रैंड्स के लिए एडवरटाइजिंग कैंपेन चलाई. सफोला (अभी तो मैं जवान हूं) और कान्स जीतने वाला एड ठंडा मतलब कोकाकोला भी शामिल है. 

बड़ी फिल्मों में लिखे गानें 

प्रसून जोशी ने साल 2001 में राजकुमर संतोषी की फिल्म लज्जा के लिए पहली बार लिरिक्स लिखी और यहीं से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हो गई. इसके बाद उन्होंने हम तुम, फना, रंग दे बसंती, तारे जमीं पर, ब्लैक और दिल्ली 6 जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे और अपनी एक अलग ही पहचान बनाई. उन्होंने भाग मिल्खा भाग फिल्म की स्क्रिप्ट भी लिखी. प्रसून जोशी को गुजारिश, मां और चांद सिफारिश के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला. जबकी उन्हें मां और बोलो ना के लिए नेशनल अवार्ड मिला. साल 2015 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. साल 2017 से ही वे सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सार्टिफिकेट के चेयरपर्सन भी हैं.
 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें