एक्ट्रेस तनुजा 23 सितंबर को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं. वो 77 साल की हो गई हैं. तनुजा ने इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम किया. तनुजा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत अपनी बड़ी बहन नूतन के साथ हमारी बेटी (1950) में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की.
इसके बाद वो फिल्म छबीली (1960) में नजर आईं, जिसका निर्देशन उनकी मां ने किया था और उनकी बहन नूतन ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके बाद तनुजा फिल्म हमारी याद आएगी (1961) में नजर आईं, जिसका निर्देशन किदार शर्मा (Kidar Sharma) ने किया था.
ऐसा रहा तनुजा का करियर
उनकी शुरुआती फिल्मों में से एक फिल्म जिसमें उनकी एक्टिंग को सराहा गया वो थी, बहारें फिर भी आएंगी (1966). तनुजा ने Jewel Thief नाम की एक हिट फिल्म में सपोर्टिंग रोल भी निभाया था. फिल्म उनका रोल काफी अहम था. उनकी अगली बड़ी फिल्म जीतेंद्र के साथ थी, जीने की राह (1969). उसी साल, तनुजा ने फिल्म पैसा या प्यार के लिए फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार जीता.
हाथी मेरे साथी (1971) की सफलता के बाद, उन्होंने दूर का राही, मेरे जीवन साथी, दो चोर और एक बार मुस्कुरा दो (1972), काम चोर, याराना, खुद्दार, और मासूम में अभिनय किया. इनके अलावा तनुजा फिल्म पवित्र पापी, भूत बंगला और अनुभव में भी नजर आईं. उन्होंने मराठी फिल्में भी की, वे हैं- Zaakol, उनाड मैना और Pitruroon हैं.
बंगाली सिनेमा में भी आजमाई किस्मत
1960 के दशक के मध्य के दौरान, तनुजा ने बंगाली फिल्मों में भी अपने करियर की शुरुआत की. वो फिल्म Deya Neya (1963) में दिखीं, इसमें वो उत्तम कुमार के अपोजिट रोल में थीं. वो Anthony-Firingee (1967) और राजकुमारी (1970) में भी नजर आईं.
बता दें कि तनुजा ने बीच में कई सालों के लिए फिल्मों से संन्यास ले लिया, लेकिन इसके बाद उन्होंने वापसी की. वो फिल्म साथिया (2002), रूल्स: प्यार का सुपरहिट फॉर्मूला (2003), और खाकी (2003) जैसी फिल्मों में सहायक अभिनेत्री के रूप में दिखाई दीं.
2008 में, तनुजा ने ज़ी टीवी की फैमिली डांस सीरीज रॉक-एन-रोल फ़ैमिली में अपनी बेटी, काजोल और दामाद, अजय देवगन के साथ एक जज को रूप में दिखीं. 2013 में, तनुजा ने नीतीश भारद्वाज द्वारा बनाई गई मराठी फिल्म Pitruroon में एक विधवा की भूमिका निभाई.