'द फैमिली मैन' एक्टर शारिब हाशमी को पर्दे पर तो कई अलग किरदार में देखा होगा, लेकिन असल जिंदगी में वो एक परफेक्ट फैमिली मैन हैं. हालांकि, अपनी जिंदगी में उन्होंने काफी मुश्किलों का सामना किया है.
'हॉटरफ्लाई' संग बातचीत में अब शारिब ने अपनी आपबीती सुनाई. शारिब ने बताया कि 'द फैमिली मैन' से उन्हें पहचान मिली. लेकिन यहां तक पहुंचने में उन्हें करीब 15 साल का समय लगा.
शरीब ने बताया कि साल 2000 की शुरुआत में वो MTV में काम कर रहे थे, जहां उनकी महीने की सैलरी 25,000 रुपये थी. लेकिन अपनी शादी के 5 साल बाद उन्होंने एक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए वो नौकरी छोड़ दी थी.
शारिब ने कहा कि ये उनके लिए मुश्किल था. लेकिन उनकी पत्नी नसरीन हाशमी ने उन्हें हर कदम पर सपोर्ट किया. शारिब बोले- अगर मेरी पत्नी ने नौकरी छोड़ने के लिए मना कर दिया होता तो मैं अपनी जिंदगी आज भी वैसे ही जीता रहता जिसमें काम के अलावा और कुछ नहीं था.
लेकिन ये जर्नी कपल के लिए आसान नहीं थी. शारिब की पत्नी नसरीन बोलीं- मुझे उनके हुनर पर बहुत भरोसा था और उन्होंने मेहनत भी बहुत की. इसीलिए मैं उनका साथ देना चाहती थी. मैंने उनसे कहा था कि अगर तुम्हें इसमें खुशी मिलती है, तो यही करो.
लेकिन यह संघर्ष 10 साल से भी ज्यादा समय तक चला, जिसकी वजह से उनकी सारी जमापूंजी खत्म हो गई थी. नसरीन बोलीं- मैंने धीरे-धीरे अपने गहने बेच दिए थे. हम अपने घर का खर्च भी नहीं उठा पा रहे थे, इसलिए हमें घर भी बेचना पड़ा. फिर मुझे अपनी विरासत में मिला घर भी बेचना पड़ा. हर बार जब हमें किसी नए मौके की उम्मीद होती थी, तो कोई न कोई रुकावट सामने आ जाती थी.
शारिब बोले- एक वक्त ऐसा भी आया जब हमारे पास बिल्कुल पैसे नहीं बचे थे, इतने भी नहीं कि अगला एक दिन भी कट सके. मुझे याद है, एक दिन मैं एक मॉल के बाहर बैठा सोच रहा था कि इस मुश्किल घड़ी में किसे फोन करूं.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अगले ही दिन MTV के दिनों के उनके दोस्त, वैभव मोदी ने उन्हें 'जोर का झटका' नाम के एक नए गेम शो को लिखने का काम दिया. शारिब ने कहा, जब भी मैं अपने सबसे बुरे दौर में होता था, कहीं न कहीं से कोई मदद या काम दरवाजे पर दस्तक दे देता था और हमारा गुजारा हो जाता था.
शारिब की पत्नी नसरीन बोलीं- एक समय ऐसा था जब हमारे पास पैसे नहीं थे, फिर भी हमारे घर राशन का सारा सामान आ जाता था. हमने अपने मुश्किल दिन 'मटर पनीर' खाकर गुजारे.
शारिब ने आगे कहा- एक वक्त ऐसा आया था कि हमें राशन वाले को 1 लाख रुपये देने थे. मैंने उसे फोन किया और कहा कि मैं इस बार भी पैसे नहीं दे पाऊंगा. उसने बहुत ही खूबसूरत बात कही. उसने कहा कि आप उस बारे में मत सोचिए और आपको जो भी सामान चाहिए, बस ले जाइए. मेरे लिए वो बहुत बड़ी बात थी.
लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आया जब शारिब को अपने फैसले पर शक होने लगा और वो इसके लिए अपनी पत्नी को ही जिम्मेदार ठहराने लगे थे. नसरीन ने बताया कि तंगी देखते-देखते शारिब पूरी तरह टूट चुके थे. वो बोलीं- एक पल ऐसा था जब वो बहुत निराश थे.
'उन्होंने मुझसे कहना शुरू कर दिया था कि तुमने मुझे नौकरी छोड़ने ही क्यों दी? अगर तुमने मुझे रोक लिया होता, तो आज यह संकट नहीं आता. उस समय मैं पूरी तरह हिल गई थी. मैंने उनसे कहा आप ऐसी बात कैसे कर सकते हैं? सपना आपका है, लेकिन एक परिवार के तौर पर हम सबने आपका साथ दिया है. अब कोई पछतावा नहीं होना चाहिए. ऐसी बात दोबारा मत कहना.'
नसरीन ने बताया कि शारिब ने 15 साल स्ट्रगल किया. वो लोग अपने बच्चों की स्कूल की फीस भी नहीं दे पा रहे थे. लेकिन फिर 2 साल बाद उन्हें 'द फैमिली मैन' के बाद से करियर में सक्सेस मिलनी शुरू हो गई और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर गई.
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