चुनाव में नेताओं का विमर्श और भाषण गधे के स्तर पर उतर आया है. आज तक के मंच पर देश के तमाम बड़े मंचीय कवि इकट्ठा हुए, जिन्होंने गधों और राजनेताओं के तालमेल को अपनी कविताओं में पिरोकर श्रोताओँ के सामने रखा. इस सम्मेलन में कवि अरुण जैमिनी ने एक अलग अंदाज में राजनीति में छाए गधों पर कविता सुनाई. गधे ने जंगल में सभा बुलाई, गधा चर्चा में था इसलिए भारी भीड़ आई. जिसकी लाठी उसकी भैंस से शुरू हुई राजनीति, कब भैंस के आगे बीन बजाने लगा पता ही नहीं लगा.