उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कई बार इस बात को लेकर आलोचना होती रही है कि वो उत्तर प्रदेश के विकास में भेदभाव बरतते हैं. उन पर यह आरोप लगता है कि वो विकास के मामलों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ज्यादा तरजीह देते हैं और पूर्वांचल के इलाकों को भूल जाते हैं. अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस धारणा को बदलना चाहते हैं. गुरुवार को अखिलेश यादव लखनऊ को सीधे गाजीपुर से जोड़ने का इंतजाम करेंगे. वह लखनऊ में देश की सबसे लंबी 353 किलोमीटर समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करेंगे. इसके लिए आनन-फानन में 24 घंटे के भीतर दूसरी बार कैबिनेट बुलाकर इस प्रस्ताव को पास किया जाएगा. शिलान्यास लखनऊ में मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में होगा जो आजमगढ़ से सांसद भी हैं.
बुधवार को उत्तर प्रदेश की विधानसभा में अखिलेश यादव ने जो अनुपूरक बजट पेश किया उसमें समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए 1000 करोड़ रुपए का इंतजाम किया गया है. अनुमान है कि इस एक्सप्रेस वे को बनाने में 20,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा जिसमें 7000 करोड रुपए जमीन के अधिग्रहण पर खर्च होगा. अगर अखिलेश यादव सत्ता में लौटते है तो आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे के बाद ये अखिलेश यादव का दूसरा बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट होगा. यह पूर्वांचल एक्सप्रेस वे लखनऊ को बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ होते हुए गाजीपुर और बलिया से जोड़ेगा. योजना के मुताबिक पहले यह एक्सप्रेसवे छह लेन का बनाया जाएगा जिसके बाद में बढ़ा कर 8 लेन किए जाने की व्यवस्था होगी. दावा किया जा रहा है कि एक्सप्रेस वे बन जाने के बाद लखनऊ से बलिया की दूरी सिर्फ 4 घंटे में पूरी की जा सकेगी.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव की लोकसभा सीट आजमगढ़ है जो पूर्वांचल में आती है. इसके बावजूद पूर्वांचल की अनदेखी करने का आरोप समाजवादी पार्टी पर लगता रहा है. इसलिए चुनाव के ठीक पहले अब समाजवादी पार्टी पूर्वांचल के लोगों को तोहफा देखकर यह नाराजगी दूर करना चाहती है. हाल में ही अखिलेश यादव से आजतक के कार्यक्रम में अखिलेश यादव से जब यह पूछा गया था कि उन्होंने आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनाने से पहले लखनऊ गाजीपुर एक्सप्रेस वे क्यों नहीं बनाया तो उनका जवाब था की गंगा भी ऊपर से नीचे की ओर ही बहती है.
यूपी पर राज करने का सपना देखने वाली किसी भी पार्टी के लिए जरूरी है कि पूर्वांचल में उसका प्रदर्शन अच्छा हो. आबादी के लिहाज से पूर्वांचल सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला इलाका है और यहां के 28 जिलों में 170 विधानसभा सीटें हैं. पिछले चुनाव में पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था. लेकिन इस बार पूर्वांचल में बीजेपी काफी ताकत लगा रही है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब पूर्वांचल की बनारस सीट से सांसद हैं. 2014 के लोकसभा सीट में पूरे पूर्वांचल से समाजवादी पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई थी और वह थी खुद मुलायम सिंह यादव ने सीट को जीता था.
गुरूवार को जब अखिलेश यादव पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करेंगे उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस में रैली को संबोधित करेंगे. इसी दिन राहुल गांधी भी पूर्वांचल की बहराइच सीट पर आकर रैली करेंगे. यहां भी पहले नरेंद्र मोदी की रैली हो चुकी है . पूर्वांचल की चिंता की वजह से ही अखिलेश यादव के विरोध के बावजूद मुलायम सिंह यादव और शिवपाल ने मिलकर मुख्तार अंसारी की कौमी एकता दल से हाथ मिलाया. कौमी एकता दल का मऊ और आसपास के कुछ इलाकों में थोड़ा प्रभाव है. लेकिन चुनाव सिर पर होने पर पूर्वांचल की ये चिंता समाजवादी पार्टी का कितना भला कर पाती है कहना मुश्किल है.