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उमा भारती: केवल वामपंथियों को नहीं, हमे भी है फ्रीडम ऑफ स्पीच

आज तक से खास बातचीत में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने यूपी चुनाव से लेकर गुरमेहर कौर से जुड़े विवाद तक पर अपनी बात रखी है.

उमा भारती उमा भारती

बीजेपी की सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती यूपी चुनाव में व्यस्त हैं. उमा भारती को जहां मंच से खरी-खरी बोलने के लिए जाना जाता है वहीं उन्हें अपने साक्षात्कार में हर मुद्दे पर बेखौफ और बेलौस बोलने के लिए भी जाना जाता है.

कब्रिस्तान और श्मशान घाट के मुद्दे पर
उमा भारती का कहना है कि यह मुद्दा विकास से जुड़ा हुआ है. पूजा विधि के आधार पर भेदभाव करना यह ठीक नहीं है और विकास के लिए आई हुई राशि ठीक से इस्तेमाल नहीं की जा रही है. प्रधानमंत्री ने बिल्कुल ठीक बोला है. अगर विकास के लिए राशि आई है, ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जएगा तो हम तो बोलेंगे.

राहुल और अखिलेश की जोड़ी पर
उमा भारती का कहना है कि अगर अखिलेश राहुल के साथ नहीं खड़े होते तो दमदार नंबर दो होते हम तो नंबर एक पहले से हैं हीं. जैसे ही वह राहुल के साथ खड़े हुए, हल्के पड़ गए. राहुल गांधी, हंसी के पात्र बन गए जो उनके साथ खड़ा होता है उनका वजन भी कम हो जाता है. उनकी अपीयरेंस ही ऐसी हो गई है.

यूपी चुनाव में हो रहे नेगेटिव कैंपेन पर
उमा भारती का कहना है की राज्य सरकार के खिलाफ जो मुद्दे हैं. वह तो उठाने ही पड़ते हैं. राज्य सरकार ने काम करने के बजाए भ्रष्टाचार किया है. चाहे रोड बनाने की बात हो, चाहे गोमती का रिवरफ्रंट बनाने की बात हो. इन बातों का जिक्र करना जरूरी है. यह मानिए कि यूपी में हमारा किसी मुकाबला नहीं है. आंधी आई है और सब पीछे छुट गए हैं.

पार्टी में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर
उमा भारती का कहना है कि चेहरों की हमारे यहा कहां कमी है. हम एक रणनीति के तहत काम करते हैं. जैसे राम ने बाली को छुप के मारा लेकिन रावण को सामने से मारा हैं.

राम मंदिर के मुद्दे पर
उमा भारती का कहना है कि यह मीडिया मुद्दा उठाता है. तब हम बोलते हैं. राम मंदिर का मुद्दा हमारे लिए आस्था का मुद्दा है. चुनाव का मुद्दा नहीं है. जीवन-मरण का सवाल है. हम चाहते जहां रामलला विद्यमान है. वहा मंदिर बनना चाहिए.

गुरुमेहर कौर के मुद्दे पर
उमा भारती का कहना है कि इस मुद्दे के तीन हिस्से है. पहला, जिन लोगों ने धमकी दी है वह सामने आना चाहिएं. यह भी साफ होना चाहिए कि abvp के हैं या नहीं.

दूसरा, फ्रीडम एक्सप्रेशन तो सबको होना चाहिए. अगर फ्रीडम ऑफ स्पीच वामपंथियों को संविधान से मिला है तो राइट को भी उसी संविधान ने यह अधिकार दिय है.

मायावती के साथ, हाथ मिलाने की संभावना पर
उमा भारती का कहना है कि राखी बांधना एक अलग विषय है. अखिलेश भी तो मायावती को बुआ बोलते हैं. हम उतना बुरा तो नहीं कर सकते मायावती से, जितना समाजवादी पार्टी ने किया. हम मायावती के साथ जाने की कोई पॉसिबिलिटी नहीं है क्योंकि हम लोग तो खुद सरकार बना रहे हैं. अच्छे बहुमत से सरकार बना रहे हैं.


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