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UP में साथ आने के लिए सपा ने कांग्रेस को दिया 100 से कम सीटों का ऑफर

यूपी विधानसभा की कुल 403 में से 300 सीटों पर चुनाव लड़ने को अड़ी सपा अब खुद 297 सीटें और सहयोगियों को 106 सीटें देने को राजी है. इसका मतलब यह हुआ कि आरएलडी और जेडीयू को 18 सीटों पर एडजस्ट करना होगा.

सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की तालमेल के लिए बातचीत जारी है सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की तालमेल के लिए बातचीत जारी है

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों की तालमेल के लिए बातचीत जारी है. सपा के साथ बातचीत में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं और सूत्रों की मानें तो सपा ने उन्हें 88 सीटों का ऑफर दिया है.

सूत्रों के मुताबिक, यूपी विधानसभा की कुल 403 में से 300 सीटों पर चुनाव लड़ने को अड़ी सपा अब खुद 297 सीटें और सहयोगियों को 106 सीटें देने को राजी है. इसका मतलब यह हुआ कि आरएलडी और जेडीयू को 18 सीटों पर एडजस्ट करना होगा.

अमेठी को लेकर फंसा पेंच
हालांकि कांग्रेस और सपा के बीच सीटों की तालमेल के लिए जारी इस बातचीत में अब भी अमेठी की सीट को लेकर पेच फंसा हुआ है. गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र से कांग्रेस नेता संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह विधायक रही हैं, लेकिन इस वक्त वहां के विधायक सुर्खियों में रहने वाले यूपी के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति हैं, जो मुलायम के खासे करीबी बताए जाते हैं. ऐसे में समाजवादी पार्टी अमेठी की सीट खुद के लिए मांग रही है, जबकि कांग्रेस अमेठी और रायबरेली की सभी 10 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है. आखिर सवाल सोनिया और राहुल के रसूख का जो है. इस बीच अमेठी के नेताओं ने गांधी परिवार से गुजारिश की है कि गायत्री प्रजापति को अमेठी के बजाये जिले की कोई और सीट के साथ अलग से एक सीट दी जाए.

दूसरा पेंच रायबरेली की ऊंचाहार सीट को लेकर है. यूपी के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे यहां से विधायक हैं. मनोज पर अखिलेश का साथ देते हुए आशु मलिक पर थप्पड़ मारने का आरोप लगा था. इस सीट से कांग्रेस के प्रमुख नेता अजय पाल सिंह उर्फ राजा अरखा विधायक रहे हैं. हालांकि कांग्रेस ऊंचाहार पर ज्यादा जोर ना देते हुए अमेठी पर ही पूरा जोर लगा रही है.

देरी के पीछे भी है कांग्रेस का दांव
वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि हारी हुई सीट ही सही, लेकिन समाजवादी पार्टी कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा सौ तक पहुंचा दे, तो बेहतर होगा और कांग्रेस का सम्मान भी बना रहेगा. इसी माथापच्ची के बीच लगातार दोनों दलों में बातचीत आगे बढ़ रही है. वैसे सूत्रों की मानें तो कांग्रेस का एक तबका इस देरी के पीछे एक और कवायद को वजह मान रहा है. उनके मुताबिक, यूपी में गठबंधन के लिए पार्टी की पहली पसंद बसपा है. ऐसे में सपा से तालमेल में इस देरी के पीछे की रणनीति यह है कि मायावती को शायद यह अंदाजा हो जाए कि वह अकेले सरकार नहीं बना पा रही, तो कांग्रेस से समझौता कर लें.

हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती किसी सूरत में कांग्रेस से तालमेल के लिए राजी नहीं. इसलिए कांग्रेस अब समाजवादी पार्टी, आरएलडी और जेडीयू के साथ मिलकर यूपी में भाजपा और बसपा से टकराने की तैयारी में है. सूत्र बताते हैं कि अगर बसपा नहीं मानी और सपा के साथ सब कुछ ठीक रहा, तो यूपी में चुनाव की घोषणा होने के बाद गठबंधन की घोषणा भी कर दी जाएगी. लेकिन जब तक सब बातचीत फाइनल ना हो जाए कांग्रेस यही कहती रहेगी कि वह यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी.

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