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UP: जब महिलाओं ने दिखाया जोर तो अखिलेश-योगी को मिली बागडोर, अबकी बार किस ओर?

उत्तर प्रदेश की सियासत में महिलाओं को साधने की कोशिशें तेज हो गईं हैं, प्रियंका गांधी ने यूपी में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का वादा किया है. आखिर क्या वजह है जो इस बार यूपी में महिलाओं को साथ लाने की कोशिशें हो रहीं हैं? पढ़ें इस रिपोर्ट में...

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2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था. (फाइल फोटो-PTI)
2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तर प्रदेश में करीब 45 फीसदी महिला वोटर्स
  • दो चुनावों से वोटिंग में महिलाएं पुरुषों से आगे

यूं तो चर्चाओं-परिचर्चाओं में महिलाओं को आधी आबादी के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन राजनीति में महिलाओं को मतदाता के तौर पर अहमियत कम ही मिलती है. धीरे-धीरे ही सही लेकिन पिछले कुछ सालों से चुनावी राजनीति में महिलाओं को भी अहमियत मिलने लगी है और ये आधी आबादी सत्ता 'बदलने' का दमखम भी रखती है. शायद यही वजह है कि यूपी चुनाव में भी महिलाओं पर राजनीतिक पार्टियों का फोकस दिखाई दे रहा है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तो 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान कर दिया है.

उत्तर प्रदेश चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी है. 2002 के विधानसभा चुनाव हुए तो उस चुनाव में 50 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले. वहीं, पुरुषों का वोटिंग प्रतिशत 57 के आसपास रहा था. आखिरी बार 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा. 2017 में करीब 60 फीसदी पुरुष और 63 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने वोट दिया.

क्या सत्ता बदलने का दम रखती हैं महिलाएं?

उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनावों में पहली बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा. उस चुनाव में 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले थे. इस चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने लड़कियों को मुफ्त शिक्षा और महिलाओं को दो साड़ी बांटने का वादा किया था. महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत बढ़ा तो समाजवादी पार्टी पहली बार बहुमत में आई और उसने 403 में से 224 सीटें जीतीं.

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इसी तरह 2017 में जब चुनाव हुए तो बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में ग्रेजुएशन तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा देने का वादा तो किया ही, साथ ही इसमें ट्रिपल तलाक को भी खत्म करने की बात कही. इसके अलावा हर घर में शौचालय और गैस कनेक्शन देने का वादा भी किया. इस चुनाव में 2012 की तुलना में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 4% तक बढ़ा और पुरुषों से ज्यादा ही रहा. बीजेपी पहली बार यूपी में बहुमत के साथ सत्ता में आई और उसने 312 सीटें जीतीं.

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लेकिन लोकसभा में अब भी पुरुषों से पीछे महिला वोटर्स?

विधानसभा चुनाव की तरह ही लोकसभा में भी महिलाओं वोटर्स की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. 2014 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 57.41% और पुरुषों का 59.20% रहा था. हालांकि, 2009 के चुनाव की तुलना में वोटिंग में महिलाओं की हिस्सेदारी 13 फीसदी से ज्यादा बढ़ी थी. इसी तरह जब 2019 के चुनाव हुए तो करीब 60 फीसदी महिलाओं और 59 फीसदी पुरुषों ने वोट डाला. 2014 और 2019 दोनों ही चुनावों में बीजेपी ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 75 फीसदी से ज्यादा सीटें जीतीं. शायद यही वजह है कि एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला वोटरों को 'साइलेंट वोटर्स' बताया था.

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क्या इसलिए 'मजबूर' हैं प्रियंका?

यूपी में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने के प्रियंका गांधी के ऐलान को जानकार 'मास्टरस्ट्रोक' बता रहे हैं. हालांकि, कुछ ये भी कह रहे हैं कि यूपी में कांग्रेस का अब कोई आधार नहीं रहा है, इसलिए पार्टी ने ये कदम 'मजबूरी' में उठाया. उसकी एक वजह ये है कि बाकी पार्टियों की तरह यूपी में कांग्रेस का न तो किसी खास जाति पर कोई प्रभाव है और न ही धर्म पर.

चुनाव आयोग के 2020 में आए इलेक्टोरल रोल के डेटा के मुताबिक, यूपी में 14.51 करोड़ मतदाता हैं. इनमें से 7.85 करोड़ पुरुष और 6.66 करोड़ महिलाएं हैं. एक तरह से 45 फीसदी महिला वोटर हैं. कांग्रेस ने 2022 की जंग फतेह करने के लिए महिलाओं को साधने की कवायद शुरू की है. महिलाओं को बीजेपी का कोर वोट बैंक भी माना जाता है. लेकिन प्रियंका के ऐलान का चुनाव पर क्या असर पड़ेगा? ये अगले साल मार्च तक पता चल जाएगा.

 

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