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UP Elections: आगरा में शह-मात का खेल, ऐन वक्त पर इन नेताओं के क्यों कट गए टिकट?

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सियासी उठापटक जारी है. बीजेपी, सपा और बसपा एक दूसरे की पार्टी से आने वाले नेताओं के चलते अपने दिग्गज नेताओं का टिकट काट रही हैं. आगरा की सियासत में ऐसी स्थिति बन गई है कि जो नेता आज किसी पार्टी में है तो कल दूसरी पार्टी से चुनाव ताल ठोक रहे हैं.

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योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आगरा में सपा नेता बीजेपी का उम्मीदवार बना
  • सपा ने बीजेपी नेता को मिलाकर दे दिया टिकट
  • सपा-आरएलडी गठबंधन से कोई मुस्लिम नहीं है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आगरा कभी बसपा का मजबूत गढ़ हुआ करता था, लेकिन पिछले चुनाव में सभी सीटें जीतकर बीजेपी ने अपने नाम कर लिया. बीजेपी ने आगरा में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए मौजूदा पांच विधायकों के टिकट इस बार काट दिए हैं. वहीं, सपा और बसपा दलबदल कर आने वाले नेताओं के लिए अपने घोषित प्रत्याशियों के टिकट आखिर टाइम पर काट रहे हैं. ऐसे में आगरा की सियासी लड़ाई काफी दिलचस्प बनती जा रही है.

इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक, बसपा ने एत्मादपुर सीट से अपना प्रत्याशी बदल लिया है और अब पार्टी ने पहले से घोषित प्रत्याशी सर्वेश बघेल की जगह पूर्व पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल को चुना है. राकेश बघेल हाल ही में बीजेपी छोड़कर बसपा में शामिल हुए हैं. ऐसे ही बसपा ने आगरा उत्तर सीट से अपना उम्मीदवार बदल दिया है और अब मुरारीलाल गोयल की जगह शब्बीर अब्बास को लिया गया है, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए हैं. 

बसपा के नेता भी हैरान
समाजवादी पार्टी ने आगरा दक्षिण सीट से पहले रिजवान रईसुद्दीन कुरैशी को बनाया, लेकिन गुरुवार को उन्हें हटाकर विनय अग्रवाल को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. नितिन अग्रवाल ने शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल किया. एत्मादपुर सीट पर सपा नेता धर्मपाल सिंह को बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बनाया तो सपा ने भी ठाकुर समुदाय पर दांव खेलते हुए बीजेपी नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान को अपने पाले में लाकर प्रत्याशी बनाया. 

माना जा रहा कि बसपा के खेरागढ़ प्रत्याशी गंगाधर कुशवाह को भी बदला जा सकता है, लेकिन 20 जनवरी की शाम तक कोई ऐलान नहीं हुआ था. बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने इंडिया टुडे को बताया कि 100 घंटे के भीतर उम्मीदवारों के बदले जाने के बाद एत्मादपुर और आगरा उत्तर सीटों पर असमंजस की स्थिति है. बसपा नेता पार्टी की नीति को समझ नहीं पा रहे हैं.

वैश्यों को लुभाने के लिए एसपी का बड़ा दांव
आगरा में अग्रवाल समाज से बीजेपी के द्वारा किसी भी उम्मीदवार टिकट नहीं दिए जाने पर 'अग्रवाल' समुदाय पहले से ही नाराज था. बसपा ने आगरा उत्तर सीट पर एक 'वैश्य' उम्मीदवार मुरारीलाल गोयल को अपना टिकट दिया था, लेकिन जैसे ही उन्होंने प्रचार करना शुरू किया, उनका टिकट रद्द कर दिया गया. बसपा ने कांग्रेस के दलबदलू मुस्लिम उम्मीदवार शब्बीर अब्बास को अपना प्रत्याशी बना दिया. 

आगरा के अग्रवाल समाज के सियासी समीकरण को साधने के लिए अखिलेश यादव ने आगरा दक्षिण सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार रिजवान रईसुद्दीन कुरैशी को टिकट दिया था. रईसुद्दीन समाजवादी पार्टी के शहर के पूर्व अध्यक्ष रईसुद्दीन के बेटे हैं, जिनका पिछले साल कोरोना से निधन हो गया था. हालांकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वैश्य मतदाताओं को लुभाने का मौका देखा और रिजवान से विनय अग्रवाल का टिकट बदल दिया. 

इस बार क्या होगी सियासी तस्वीर?
आगरा जैसी ही स्थिति अगर पूरे राज्य में देखने को मिल रही है, तो इसका कारण यह है कि सियासी दल अभी तक रणनीति बना रहे हैं कि चुनाव कैसे जीता जाए. ऐसे में सभी दलों में उथल-पुथल की स्थिति है. फतेहाबाद सीट पर भी सपा ने राजेश शर्मा को हटाकर रूपाली दीक्षित को टिकट दिया, जो इंग्लैंड रिटर्न हैं और मैनेजमेंट प्रोफेशनल हैं. वो स्थानीय बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी हैं. इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि राजेश शर्मा कमजोर ब्राह्मण प्रत्याशी थे और फतेहाबाद ब्राह्मण सीट. 

रूपाली दीक्षित का मुख्य मुकाबला बीजेपी के पूर्व विधायक छोटेलाल वर्मा से है. 2007 में छोटेलाल वर्मा ने रूपाली के पिता अशोक दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहे अशोक दीक्षित बरेली जेल में बंद है. 

सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय ने कहा कि रूपाली को टिकट देकर समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण कार्ड खेला है. ये चुनाव समाजवादी पार्टी और रालोद मिलकर लड़ रहे हैं और आगरा की 9 सीटों में से सपा 6 सीटों पर और रालोद 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ऐसे में देखना है कि आगरा की सियासत पर किसका कब्जा होगा?

 

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