यूपी के गाजीपुर की एक विधानसभा सीट है गाजीपुर सदर विधानसभा सीट. ये विधानसभा सीट जिला मुख्यालय की सीट है. गाजीपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक समरसता का माहौल रहता है. यहां के करंडा क्षेत्र में कण्व ऋषि का आश्रम है. पवहारी बाबा आश्रम, साढ़े चार सौ साल पुरानी रामलीला कमेटी और लंका मैदान शहर के मध्य में हैं. दो सौ साल पुराना चर्च भी है तो उच्च शिक्षा के लिए काफी पुराने बड़े डिग्री कॉलेज, कई सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज के साथ सरकारी स्टेडियम भी हैं. अफीम और क्षारोद कारखाना, लॉर्ड कॉर्नवालिस का मकबरा और हाल में निर्मित महर्षि विश्वामित्र स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेज भी इसी क्षेत्र में है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गाजीपुर सदर विधानसभा सीट के सियासी अतीत की बात करें तो मुख्तार अंसारी ने इसी सीट से सियासी सफर की शुरुआत की थी. मुख्तार अंसारी ने साल 1991 में गाजीपुर सदर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था.
गाजीपुर विधानसभा सीट से 1996 में बसपा के उमाशंकर कुशवाहा, 2002 में समाजवादी पार्टी (सपा) की शादाब फातिमा विधानसभा पहुंची थीं. इस विधानसभा सीट से साल 2007 में बसपा के डॉक्टर राजकुमार गौतम विधायक और 2012 में सपा के विजय मिश्रा विधायक निर्वाचित हुए थे. पिछले तीन दशक का पैटर्न देखें तो इस सीट के मतदाता हर चुनाव में विधायक बदलते हैं.
2017 का जनादेश
गाजीपुर सदर विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने डॉक्टर संगीता बलवंत बिंद को चुनाव मैदान में उतारा. बीजेपी की डॉक्टर संगीता चुनावी बाजी जीतकर विधानसभा पहुंचने में भी सफल रहीं. डॉक्टर संगीता ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राजेश कुशवाहा को 32 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया था.
सामाजिक ताना-बाना
गाजीपुर सदर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो नगरीय इलाके में शुरू से ही बीजेपी का वर्चस्व रहा है. ग्रामीण इलाके में जातीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में कुल करीब साढ़े तीन लाख मतदाता हैं. अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक रिपोर्ट कार्ड
गाजीपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक डॉक्टर संगीता बलवंत यूपी सरकार में कुछ महीने पहले ही राज्यमंत्री भी बनाई गईं. उनका दावा है कि उनके कार्यकाल में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, गंगा की कटान से जुड़ी समस्याओं के निराकरण, पेयजल, किसानों के खाद और सिंचाई के क्षेत्र में काफी कार्य कराए गए हैं. विपक्ष उनके दावों को हवा-हवाई बता रहा है.