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UP: बड़े नेताओं के बेटे-बेटियों का विधायक बनने का सपना टूटा, बीजेपी ने नहीं दिए भाव

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार पार्टी नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट देने के बजाय पार्टी संगठन के नेताओं पर भरोसा जताया है. हालांकि, रीता बहुगुणा जोशी से लेकर विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित और सांसद सत्यदेव पचौरी सहित तमाम बड़े नेता टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया. ऐसे में राजनीति विरासत को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाले बीजेपी नेताओं को झटका लगा है.

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सत्यदेव पचौरी, रीता बहुगुणा जोशी, ह्रदय नारायण जोशी सत्यदेव पचौरी, रीता बहुगुणा जोशी, ह्रदय नारायण जोशी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रीता बहुगणा जोशी के बेटे मयंक को नहीं मिला टिकट
  • मुकुट बिहारी वर्मा के बेटे को पहली बार बनाया प्रत्याशी
  • कलराज मिश्रा के बेटे की जगह शलभमणि बने प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उन तमाम दिग्गज नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया है, जिन्होंने अपनी सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने पुत्र-पुत्रियों को सियासी रण में उतारने का सपना संजो रखा था. केंद्र और राज्य के मंत्री सहित बीजेपी के कई नेता इस फेहरिश्त में शामिल थे. इसके बावजूद बीजेपी नेतृत्व ने बड़े नेताओं के बेटा-बेटी या रिश्तेदार के बजाय संगठन से जुड़े लोगों और नए चेहरों पर भरोसा जताया है. ऐसे में अपने परिवार के लिए टिकट मांगने वाले नेताओं को झटका लगा है. हालांकि, मुकुट बिहारी के बेटे के छोड़कर जिन बीजेपी नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट मिला है, वो पहले से विधायक रहें है या चुनाव लड़ चुके हैं. 

रीता के बेटे का टिकट नहीं मिला टिकट

प्रयागराज से सांसद रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ कैंट सीट से अपने बेटे मयंक जोशी के लिए बीजेपी से टिकट मांग रही थी, लेकिन पार्टी ने बृजेश पाठक को प्रत्याशी बनाया है. रीता बहुगुणा जोशी इस सीट से दो बार विधायक रह चुकी हैं और अब वो इस सीट से अपने बेटे को विधायक बनाना चाहती थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनके बेटे के बजाय बृजेश पाठक को टिकट दिया है. हालांकि, रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे के टिकट के लिए अपनी संसदीय सीट तक छोड़ने की बात कह रही थी. इसके लिए उन्होंने बकायदा पार्टी नेतृत्व के पत्र भी लिखा था. इसके बावजूद उनके बेटे को टिकट नहीं मिल सका.

हृदय नारायण के अरमानों पर फिरा पानी

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित बेटे दिलीप दीक्षित उन्नाव की पुरवा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी ने बसपा से अनिल सिंह को प्रत्याशी बनाया है. उन्नाव की भगवंतनगर सीट पर हृदय नारायण दीक्षित को भी प्रत्याशी नहीं बनाया है बल्कि आशुतोष शुक्ला को टिकट दिया है. हालांकि, इस सीट पर दिलीप दीक्षित दावेदारी प्रबल मानी जा रही थी. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने न तो हृदय नारायण दीक्षित को टिकट दिया और न ही उनके बेटे दिलीप को किसी सीट से प्रत्याशी बनाया. 

सत्यदेव पचौरी भी नहीं दिला सके बेटे को टिकट

कानपुर से बीजेपी सांसद सत्यदेव पचौरी अपने बेटे अनूप पचौरी के लिए कानपुर की गोविंदनगर सीट से टिकट की मांग कर रहे हैं, लेकिन पार्टी ने सुरेंद्र मैथानी को उतारा है. ब्राह्मण बहुल इस सीट पर सत्यदेव दो बार विधायक रहे हैं, लेकिन 2019 में उनके सांसद बनने के बाद सुरेंद्र मैथानी विधायक बने हैं और दोबारा बनाया है. ऐसे में सत्यदेव पचौरी अपने बेटे गोविंदनगर सीट से विधायक बनाने के अरमानों पर पानी फिर गया. 

लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से सांसद व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर अपनी पत्नी जयदेवी को मलिहाबाद सीट से बीजेपी का दूसरी बार टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन अपने बेटे विकास किशोर और प्रभात किशोर में से किसी एक को भी प्रत्याशी नहीं बनवा सके. प्रभात किशोर सीतापुर की सिधौली सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने मनीष रावत को प्रत्याशी बनाया है.

राजेश अग्रवाल को बेटे को नहीं मिला टिकट 

आगरा से सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल की पत्नी के लिए टूंडला सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. बीजेपी ने एसपी बघेल की पत्नी को टिकट तो नहीं दिया बल्कि उन्हें जरूर करहल सीट पर अखिलेश यादव को  प्रत्याशी बना दिया है. ऐसे में योगी सरकार में वित्त मंत्री रहे राजेश अग्रवाल बरेली कैंट सीट से अपने बेटे आशीष अग्रवाल को चुनाव लड़ाना चाहते हैं, लेकिन बीजेपी ने संजीव अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया है. संजीव अग्रवाल संघ से जुड़े रहे हैं. यूपी में भाजपा के सहकोषाध्यक्ष हैं. 

योगी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही अपनी पथरदेवा सीट से उनके बेटे सुब्रत शाही चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, पर पार्टी ने उनके बेटे के बजाय उन्हें प्रत्याशी बनाया है. ऐसे ही रुद्रपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक और मंत्री जयप्रकाश निषाद भी अपने बेटे को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पार्टी ने उनके बजाय उन्हें प्रत्याशी बनाया है. 

कलराज मिश्रा के बेटे को बीजेपी से टिकट नहीं

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा के बेटे अमित मिश्रा देवरिया सीट से चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रखी थी. देवरिया सीट ब्राह्मण बहुल मानी जाती है. कलराज मिश्रा देवरिया सीट से सांसद रहे हैं और अब उनके बेटे अपने पिता की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए चुनावी पिच पर उतरना चाहते थे, लेकिन बीजेपी ने शलभमणि त्रिपाणी को प्रत्याशी बनाया है. 

बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के बेटे रामविलास चौहान ने अपने पिता की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मधुबन विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे हैं. हालांकि, इसी सीट पर बीजेपी नेता रामजी सिंह के पुत्र अरिजीत सिंह ने भी टिकट की दावेदारी कर रखी है. बीजेपी ने इस सीट पर अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया. 

बीजेपी के इन नेताओं को बेटे लड़ रहे चुनाव

योगी सरकार में सहकारिता मंत्री और ओबीसी चेहरा माने जाने वाले मुकुट बिहारी वर्मा के बेटे गौरव वर्मा को कैसरगंज सीट से टिकट दिया है. कैसरगंज सीट कुर्मी बहुल मानी जाती है, पर यहां यादव और मुस्लिम वोट भी काफी निर्णायक भूमिका में है. केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं और उनके बड़े बेटे पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं और गोंडा सांसद बृजभूषण सिंह के बेटे को टिकट दिया है. कैराना से हुकुम सिंह के बेटी मृगांका सिंह को प्रत्याशी बनाया है. मुकुट बिहार को छोड़कर बाकी बीजेपी नेताओं के बेटे-बेटियां विधायक रहे हैं या फिर उससे पहले चुनाव लड़ चुके हैं. इस बार के चुनाव में मुकुट बिहारी के बेटे को ही पहली बार प्रत्याशी बनाया है. 


 

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