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अंदर की खबर: मोदी-केजरीवाल मुलाकात में किसने क्या कहा!

अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी को आपने हमेशा एक-दूसरे के धुर राजनीतिक विरोधी के रूप में देखा होगा. गुरुवार को दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि यह बैठक बेहद औपचारिक और ठंडी हो सकती है. लेकिन अनुमानों के उलट यह मुलाकात अच्छी रही. 15-17 मिनट की यह मुलाकात कैसी रही, किसने क्या कहा, हम आपको बताते हैं.

Kejriwal with Modi Kejriwal with Modi

अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी को आपने हमेशा एक-दूसरे के धुर राजनीतिक विरोधी के रूप में देखा होगा. गुरुवार को दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि यह एक 'औपचारिक और ठंडी' बैठक हो सकती है. लेकिन अनुमानों के उलट यह मुलाकात अच्छी रही. 15-17 मिनट की यह मुलाकात कैसी रही, किसने क्या कहा, हम आपको बताते हैं.

गुरुवार सुबह घड़ी ने जैसे ही 9:30 बजाए, दिल्ली के भावी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चौथी मंजिल के अपने कौशांबी स्थित फ्लैट से नीचे उतरे और इनोवा कार में बैठकर रवाना हुए. रास्ते में उन्होंने मनीष सिसोदिया को लिया और फिर दोनों नेता 7 रेसकोर्स के लिए रवाना हो गए.

रास्ते में दोनों ने उन मुद्दों पर चर्चा की जिन्हें वह प्रधानमंत्री के सामने उठाने वाले थे. वह 10:20 पर प्रधानमंत्री आवास पहुंच गए. वहां उन्हें वेटिंग रूम में बैठाया गया.

थोड़ी देर बाद दोनों मीटिंग रूम में दाखिल हुए. प्रधानमंत्री यहां उनका इंतजार कर रहे थे. उन्होंने दोनों का स्वागत किया. केजरीवाल से हाथ मिलाते हुए मोदी ने कहा, 'आइए अरविंद जी...कैसे हो मनीष? बहुत बहुत बढ़िया. आपको बढ़िया मैंडेट मिला है. अच्छा काम कीजिएगा.'

जवाब में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया विनम्रतापूर्वक मुस्कुराते रहे. प्रधानमंत्री ने दोनों को 'बुके' देकर स्वागत किया, जवाब में दोनों ने PM को शुक्रिया कहा. तब तक चाय आ गई और केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आने का न्योता दिया. इस पर प्रदानमंत्री ने कहा कि वह जरूर आते लेकिन 14 फरवरी को उनका कार्यक्रम पहले से तय है, इसलिए वह नहीं आ पाएंगे.

अब बारी गंभीर चर्चाओं की थी. केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया. आगे सिसोदिया ने मामले को इस तरह रखा, 'हम दोनों को पूर्ण बहुमत मिला है. शहर कई भागों में बंटा हुआ है. लोगों की लाइफ बंटी हुई है. ये एक सुनहरा मौका है. हमारा आपसे निवेदन है कि पूर्ण राज्य के दर्जे पर विचार करें. केंद्र सरकार को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मामले संभालने होते हैं और हम दिल्ली संभाल सकते हैं.'

प्रधानमंत्री ने धैर्यपूर्वक उनकी बात कही और मुस्कुराते हुए बोले, 'डेमोक्रेसी में कुछ भी परमानेंट नहीं है. हम इस पर विचार करेंगे.'

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि उनका अब तक का सरकार चलाने का अनुभव कैसा रहा. इस पर मोदी ने कहा, 'हमारी भी अपनी मजबूरियां हैं. राज्य सभा में कई बिल पास नहीं हो पा रहे.' जवाब में सिसोदिया बोले, 'सर उम्मीद है आपको राज्यसभा में भी बहुमत मिल ही जाएगा. हां अगर लेट होगा, चार साल बाद हो पाएगा तो बहुत सारे बड़े काम ऐसे हैं जो समय से नहीं हो पाएंगे.' केजरीवाल ने कहा, 'आपके सहयोग की जरूरत होगी.'

मोदी ने कहा, 'सहयोग रहेगा, शुभकामनाएं.'

इसके बाद फिर उन्होंने हाथ मिलाए. केजरीवाल और मनीष कमरे से बाहर आ गए. प्रधानमंत्री दोबारा अपनी कुर्सी पर बैठ गए. संभवत: एक और मीटिंग के लिए.

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