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साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे! शिवसेना नेता संजय राउत ने दिया इशारा

सियासत में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए नीतीश कुमार और लालू यादव दुश्मनी भुलाकर दोस्त बन गए. अब शिवसेना नेता संजय राउत ने इशारा किया है कि ठाकरे बंधु साथ आ सकते हैं.

उद्धव और राज ठाकरे की फाइल फोटो उद्धव और राज ठाकरे की फाइल फोटो

सियासत में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के लिए नीतीश कुमार और लालू यादव दुश्मनी भुलाकर दोस्त बन गए. अब शिवसेना नेता संजय राउत ने इशारा किया है कि ठाकरे बंधु साथ आ सकते हैं.

आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि सियासत में कोई स्थाई दुश्मन नहीं होता. साथ आने का फैसला ठाकरे बंधुओं को लेना है. फिलहाल तो इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता. हालांकि चुनाव नतीजों के बाद सारे विकल्प खुले हैं. अगर राज और उद्धव साथ आएंगे तो महाराष्ट्र की जनता भी इसका स्वागत करेगी.

जब आज तक के संवाददाता कमलेश सुतार ने संजय राउत से ठाकरे बंधुओं के साथ आने की खबरों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, 'साथ आने की बात पहले से चलती रही है. दोनों भाई हैं. राजनीतिक विचार और मतभेद अपनी जगह हैं, और खून के रिश्ते अपनी जगह. कभी कभार राजनीतिक माहौल के कारण रिश्ते बिगड़ जाते हैं, और ये सुधरते हैं तो महाराष्ट्र की जनता स्वागत करेगी.'

उन्होंने आगे कहा, 'ये दोनों भाई के आपस का मामला है. हम तो हमेशा से एक साथ रहे हैं. फैसला दोनों ने मिलकर करना है. कोई तीसरा व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता. अब जो होगा विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही तय किया जाएगा. अभी कुछ संभव नहीं है. जब नतीजे आते हैं, कौन किसके साथ जाएगा, कौन किसको गले लगाएगा. ये तो तभी पता चलेगा. वैसे सियासत में कोई स्थाई दुश्मन नहीं होता.'

एमएनएस के साथ गठबंधन करने का इशारा देते हुए उन्होंने कहा, 'एमएनएस हमारे लिए स्वभाविक साथी है. बात विचारधारा की है, हम 25 साल तक बीजेपी के साथ रहे आज उन्होंने धोखा दे दिया. विचारधारा के कारण वो भी हमारे स्वभाविक साथी थे. अगर कोई रिश्ता 25 साल बाद टूट सकता है, तो नया रिश्ता बन भी तो सकता है.'

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