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एमसीडी चुनावों में कांग्रेस का खेल बिगाड़ेंगे बागी

निगम चुनाव के मद्देनजर शनिवार को नॉमिनेशन के नाम वापस लेने का अंतिम दिन है. मगर कांग्रेस पार्टी के टिकट बंटवारे से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता अपना नाम वापस लेने को राजी नहीं है. 23 अप्रैल को निगम के चुनाव होने हैं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी के लिए बढ़ी हुई मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं.

कांग्रेस के बागी उम्मीदवार कांग्रेस के बागी उम्मीदवार

निगम चुनाव के मद्देनजर शनिवार को नॉमिनेशन के नाम वापस लेने का अंतिम दिन है. मगर कांग्रेस पार्टी के टिकट बंटवारे से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता अपना नाम वापस लेने को राजी नहीं है. 23 अप्रैल को निगम के चुनाव होने हैं. ऐसे में कांग्रेस पार्टी के लिए बढ़ी हुई मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं.

गले में फूलों की माला पहने हुए अब्दुल सज्जाद के गले में अब से 3 दिन पहले कांग्रेस पार्टी का पटका हुआ करता था. जनता कॉलोनी के इस वार्ड से अब्दुल सज्जाद ने कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए आवेदन किया था. मगर अब नाराज हैं कि आखिर इलाके के स्थानीय शख्स को टिकट ना देकर पार्टी ने बाहरी उम्मीदवार को कांग्रेस का सिंबल थमा दिया. मांग ना सुने जाने से खफा अब्दुल सज्जाद निर्दलीय ही जनता कॉलोनी वार्ड से अपनी पार्टी के खिलाफ आवाज बुलंद करके चुनावी मैदान में कूद गए हैं. खफा आवाज में वे कहते हैं कि 'इलाके के लोगों ने मुझे कहा है कि मुझे कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाना है.'

दूसरे बागी उम्मीदवार बालकिशन हैं जो कमला नगर से कांग्रेस पार्टी से टिकट मांग रहे थे. पार्टी से टिकट ना मिलने से खफा बालकिशन शिव सेना के चुनाव चिन्ह पर निगम चुनाव लड़ रहे हैं. उनका कहना है कि मोदी जी का नारा 'कांग्रेस मुक्त भारत' बीजेपी नहीं बल्कि खुद प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन पूरा कर रहे हैं.

बाल किशन कहते हैं कि जिलाध्यक्ष और पार्टी के लोगों ने उनको पद का लालच दिया मगर वो चुनाव लड़ कर रहेंगे. हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता हारुन यूसुफ कहते हैं कि पार्टी की पूरी कोशिश है कि वो नाराज उम्मीदवारों को चुनावी मैदान से हटाए ताकि वो पार्टी का नुकसान ना कर सके.

जाहिर है कांग्रेस के हाथ की खिलाफत में उतरे ये बागी अगर चुनावी समर में कांग्रेस के हिस्से के कुछ वोट काटने में भी सफल हो जाते हैं तो भी पार्टी का हाथ कमजोर होगा और इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलेगा. बहरहाल कल नाम वापसी का आखिरी दिन है अब देखते हैं कि पार्टी के जिलाध्यक्ष कितना मान मनौवल करके इन बागियों की बगावत को थाम पाते हैं.

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