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कांग्रेस में उदासी, बीजेपी भी निर्दलीयों से संपर्क में लगी, गहलोत ने कहा कि अगर नहीं जीते तो फिर को

राजस्थान में मतगणना से पहले बागियों और निर्दलीयों की पूछ अचानक से बढ़ गई है. वसुंधरा राजे जीत का भरोसा भले ही जता रही हों लेकिन फिर भी जीत सकने वाले निर्दलीयों पर नजर है. उधर एग्जिट पोल से बेचैन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इतना परेशान हैं कि उन्‍होंने कह दिया, 'मैं हारता हूं तो कभी कोई नेता काम नही करेगा.'

अशोक गहलोत अशोक गहलोत

राजस्थान में मतगणना से पहले बागियों और निर्दलीयों की पूछ अचानक से बढ़ गई है. वसुंधरा राजे जीत का भरोसा भले ही जता रही हों लेकिन फिर भी जीत सकने वाले निर्दलीयों पर नजर है. उधर एग्जिट पोल से बेचैन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इतना परेशान हैं कि उन्‍होंने कह दिया, 'मैं हारता हूं तो कभी कोई नेता काम नही करेगा.'

पार्टी सूत्रों के अनुसार दोनों ही दलों की तरफ से हंग असेंबली की सूरत में निर्दलियों को जयपुर लाने के लिए हेलिकॉप्टर तक के इंतजाम किए गए हैं. एग्जिट पोल ने कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चिंता की लकीरें बढ़ा दी है. अपना बहुमत नहीं आने की खबरों के बीच गहलोत लगातार तीन दिनों से पार्टी के बड़े नेताओं के साथ जयपुर के कांग्रेस पार्टी के दफ्तर पर बागियों और निर्दलियों को अपने पाले में करने को लेकर रणनीति बना रहे हैं.

पार्टी सूत्रों के अनुसार 17 ऐसे निर्दलीयों की सूची बनाई गई है जो जीत सकते हैं. ऐसे में रिजल्ट निकलते ही उन्हे हेलिकॉप्टर से जयपुर लाने की योजना है. काम करने के बावजूद सत्ता में नहीं आने से परेशान गहलोत की खीज बार-बार जुबान पर आ जाती है. गहलोत का कहना है कि अगर मैं हारा तो फिर कोई काम क्यों करेगा, सब ऐश करेंगे.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि काम करने के बाद भी वोट नहीं मिलेगा तो आनेवाली सरकार काम करेगी नहीं, विकास के नाम पर तो वोट मिलते नहीं, लफ्फाजी करेगी, ऐश करेगी और क्या. हालांकि कांग्रेस को भरोसा है कि राजस्थान में हंग असेंबली ही आएगी. ऐसे में वसुंधरा राजे भी निर्दलियों और कांग्रेस के बागियों से भी संपर्क कर रही हैं. हालांकि वसुंधरा का कहना है कि देश में नरेन्द्र मोदी की वैसी ही लहर है जैसी इमरजेंसी की जेपी की लहर थी. ऐसे में देश में कांग्रेस कहीं नही टिक पाएगी और बीजेपी को पूरा बहुमत मिलेगा.

वसुंधरा राजे का कहना है कि देश में जेपी के समय का महौल है जब इंदिरा गांधी के समय इमरजेंसी के दौरान देखने को मिला था, वही महौल है. देश में सभी जगह लोग विकास चाह रहे हैं, जाति-धर्म की बात नहीं है. ये भी सच है कि राजस्थान में हंग असेंबली का लंबा इतिहास रहा है. ऐसे में पहली बार तीसरी शक्ति के रूप में राजस्थान में हाथ आजमा रही राष्‍ट्रीय जनता पार्टी को भी भरोसा है कि वो किंग मेकर बनेगी. राजस्थान के परिणाम नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और अशोक गहलोत के लोक कल्याणकारी योजनाओं के मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है.

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