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एमसीडी चुनाव- जानें बीजेपी उम्मीदवार की अनोखी प्रेम कहानी को

सुनीता सिंह बीजेपी की उम्मीदवार हैं, यहां तक सबकुछ सामान्य हैं क्योंकि सुनीता सिंह की तरह तमाम और महिला उम्मीदवार भी हैं, लेकिन सुनीता सिंह का मामला कुछ खास है, क्योंकि सुनीता सिंह के पति का नाम है अबरार सिद्धीकी.प्यार ही नहीं, मज़हबी सरहदों के पार जाकर प्यार और फिर सियासत में बीजेपी के साथ सफर. इस सफर में हमसफर अबरार कदम-कदम परउनके साथ हैं....

सुनीता सिंह बीजेपी की सरिता विहार वार्ड से उम्मीदवार अपने परिवार के साथ सुनीता सिंह बीजेपी की सरिता विहार वार्ड से उम्मीदवार अपने परिवार के साथ

चुनाव तो चुनाव होते हैं, यहां साम, दाम, दंड, भेद सबकुछ इस्तेमाल होता है. धर्म और जाति से लेकर न जानें कौन-कौन से और कैसे-कैसे हथकंडे इस्तेमाल होते हैं, लेकिन एमसीडी चुनाव में सियासत की इस कीचड़ में प्रेम का एक कमल भी खिल रहा है, क्योंकि बीजेपी ने सरिता विहार वार्ड से जिस उम्मीदवार को टिकट दिया है, उसकी खुद की कहानी कम दिलचस्प नहीं है.

सुनीता सिंह बीजेपी की उम्मीदवार हैं, यहां तक सब कुछ सामान्य हैं क्योंकि सुनीता सिंह की तरह तमाम और महिला उम्मीदवार भी हैं, लेकिन सुनीता सिंह का मामला कुछ खास है, क्योंकि सुनीता सिंह के पति का नाम है अबरार सिद्धीकी. प्यार ही नहीं, मज़हबी सरहदों के पार जाकर प्यार और फिर सियासत में बीजेपी के साथ सफर. इस सफर में हमसफर अबरार कदम-कदम पर उनके साथ हैं.

सरिता विहार की सड़कों पर, मार्केट में, सोसायटीज़ में सुनीता सिंह और अबरार सिद्धीकी वोटरों से अपील कर रहे हैं, अपना प्रचार कर रहे हैं. लेकिन जब लोगों को इनकी कहानी पता चलती है, तो एक बार तो हैरत ज़रूर होती है. सुनीता कहती हैं कि मोदी जी का नारा सबका साथ सबका विकास का है औऱ उनकी कहानी इससे बहुत मेल खाती है. सुनीता सिंह का दावा है कि उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही वोटरों का बराबरी का समर्थन मिल रहा है.

अबरार कुरैशी कहते हैं कि वो राजनीति से लंबे वक्त से जुड़े हैं और बिहार में एलजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं. वो मज़हबी सियासत में यकीन नहीं रखते, इसीलिए बीजेपी ने उनकी पत्नी को इस बार एमसीडी चुनाव के लिए टिकट दिया है.

अबरार और सुनीता की लव स्टोरी का भी सियासत से पुराना नाता है, दरअसल दोनों के रिश्ते की जड़ में ही सिसायत है और वो ऐसे कि दोनों की मुलाकात जेएनयू में पढ़ाई के दौरान हुई. दोनों जेएनयू छात्रसंघ का चुनाव साथ-साथ लड़े, इसी बीच आंखें भी लड़ गईं और कैंपस का सफर हमसफर बनकर ही खत्म हुआ. अब उनके बच्चे भी हैं, जो बड़े हो चुके हैं.

सुनीता और अबरार दोनों के ही घरवालों को इस शादी पर ऐतराज़ नहीं था औऱ दोनों की शादी स्पेशल मैरीज़ एक्ट के तहत हुई, मतलब दोनों में से किसी को भी अपना मजहब बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ी. इसीलिए सुनीता और अबरार का दावा है कि वोटर भी उनकी लव स्टोरी पर अपनी मुहर लगाएंगे.

साथ में चुनाव प्रचार कर रहे लोगों का मजमा भी गंगा जमनी है, जिसमें हिंदू भी हैं और मुसलमान भी. हालांकि बीजेपी में मुसलमान उम्मीदवारों को लेकर हिचक की बात सामने आती रही है, लेकिन यहां तो मामला सिर्फ सियासी नहीं, लव स्टोरी का भी है. इसीलिए साथ चल रहे लोग अपनी प्रतिक्रिया में ये जोड़ना नहीं भूलते कि यही तो सबका साथ सबका विकास है.

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