महाराष्ट्र में दांव पर लगी है बाला साहब ठाकरे की साख. खतरा उसी से है जिसे उन्होंने राजनीति सिखाई. भतीजा राज ठाकरे आज उन्हीं की वोट बैंक में सेंध लगाने पर तुला है.
आखिर किसके होंगे मराठी मानुष?
इस चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर मराठी मानुष किसके हैं? इस मुद्दे को लेकर दोनों ही पार्टियों शिवसेना और एमएनएस की साख दांव पर लगी है. विधान सभा चुनाव बालासाहब के लिए नाक की लड़ाई है. चाचा से राजनीति सीख भतीजा अब उन्हीं को टक्कर दे रहा है. अब चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि जनता का भरोसा किसमें है, चाचा बाला साहब में या फिर भतीजा राज ठाकरे में. लोकसभा चुनाव में राज की पार्टी ने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को काफी नुक्सान पहुंचाया था. राज खुद तो कुछ खास कमाल नहीं कर सके, लेकिन मुख्य विपक्षी दल शिवसेना-बीजेपी गठबंधन का नुक्सान काफी कराया.
बढ़ सकता है एमएनएस का वोट प्रतिशत
लोकसभा में एमएनएस ने चार फीसदी वोट हासिल किए थे. विधानसभा में एमनएस का वोट प्रतिशत और बेहतर होने की उम्मीद है. शहरी वोटरों पर शिवसेना की अच्छी पकड़ रही है पर लोकसभा चुनावों में एमएनस ने इसमें भी अच्छी खासी सेंध लगाई थी. विधानसभा चुनाव में भी अगर यही हालात रहे तो मुंबई और ठाणे में ही करीब 60 सीटों पर इसका असर दिख सकता है. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि ये विधान सभा चुनाव बाला साहब ठाकरे के राजनीतिक जीवन का आखिरी चुनाव हो. जाहिर है ऐसे में वो पार्टी की जीत देखना चाहेंगे पर डर है कि कहीं राज की पार्टी उनका सपना न तोड़ दे.