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सच हुई अटल बिहारी वाजपेयी की 46 साल पुरानी भविष्यवाणी... अब महाराष्ट्र निकाय में भी खिला 'कमल'

बीजेपी गठबंधन महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में से 25 पर अपना परचम लहराता दिख रहा है. सबसे बड़ी जीत देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मिली है. इसी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 46 साल पुरानी भविष्यवाणी सच साबित हो गई है.

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे रिकॉर्ड तोड़ जनादेश करार दिया. (Photo- PTI)
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे रिकॉर्ड तोड़ जनादेश करार दिया. (Photo- PTI)

अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा... 46 साल पहले जिस अरब सागर के किनारे मुंबई में भारतीय जनता पार्टी के पहले अधिवेशन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो भविष्यवाणी की थी, वह महाराष्ट्र की राजनीति में अब पूरी होती दिख रही है. देश में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार, 20 राज्यों में एनडीए की सरकार और अब महाराष्ट्र में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत ने इसे और मजबूत कर दिया है. 

यह परिणाम साफ संकेत देते हैं कि देश की राजनीति में बीजेपी का जनाधार और मजबूत हुआ है. केरल में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में कमल खिलने के बाद अब महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने नया इतिहास रच दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक जनता का भरोसा भारतीय जनता पार्टी के साथ है. इसी भरोसे की नई और बड़ी किस्त महाराष्ट्र से सामने आई है. 

तब दिवंगत वाजपेयी ने कहा था, भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं ये भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा...

मुंबई से नागपुर तक भगवा लहर

बीजेपी गठबंधन राज्य की 29 नगर निगमों में से 25 पर अपना परचम लहराता दिख रहा है. सबसे बड़ी जीत देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मिली है. दशकों तक ठाकरे परिवार का अभेद्य किला मानी जाने वाली बीएमसी में बीजेपी पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब मुंबई में बीजेपी का मेयर बनना तय है. नागपुर से पुणे, नासिक से सोलापुर तक बीजेपी गठबंधन ने जीत का परचम लहराया है. 

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे रिकॉर्ड तोड़ जनादेश करार दिया. उनका कहना है कि यह जीत प्रधानमंत्री मोदी पर जनता के भरोसे की जीत है, जिसने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में विकास की एक नई भाषा गढ़ी है. 

ठाकरे और पवार परिवार के गढ़ ढहे

गांव से लेकर शहरों तक के स्थानीय चुनाव में बीजेपी अब महाराष्ट्र के भीतर वो धुरी बन चुकी है. दरअसल, महाराष्ट्र के लोकल में भी बीजेपी ही वोकल है ये साफ हो गया है क्योंकि बीजेपी ने एक साथ बड़े-बड़े राजनीतिक घरानों के गढ़ को ढहा दिया है. सहकारी से सरकारी तक फॉर्मूले पर चलने वाला पवार परिवार एक होकर भी अपने किलों को बचाने में नाकाम रहा है. मराठी मानुष और हिंदू स्वाभिमान के मंत्र से चलने वाला ठाकरे परिवार भी एक होकर अपने गढ़ को बीजेपी के आगे बचा नहीं पाया. 

ठाकरे परिवार, जिसकी पहचान मुंबई और बीएमसी से जुड़ी रही है, पहली बार इस किले को बचाने में नाकाम रहा. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का दो दशक बाद एक साथ आना भी बीजेपी के सामने असरदार साबित नहीं हुआ. इसी तरह, शरद पवार और अजित पवार के एकजुट होने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे गढ़ों में बीजेपी गठबंधन को रोकना संभव नहीं हो सका. वहीं कांग्रेस अलग-अलग सहयोगियों के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी. जिन नगर निगमों में पहले पार्टी ने जीत दर्ज की थी, वहां भी कांग्रेस सिमटती नजर आई.

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रिस्क टेकिंग की राजनीति और उसका जवाब

प्रधानमंत्री मोदी बार-बार रिस्क लेने की बात करते हैं. ऐसे फैसले, जिन्हें लेने से पिछली सरकारें चुनावी नुकसान के डर से बचती रहीं. महाराष्ट्र में बीजेपी ने इसी जोखिम भरी राजनीति को जमीन पर उतारा. लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस-शरद पवार-उद्धव ठाकरे गठबंधन ने एनडीए को बड़ा झटका दिया था. लेकिन विधानसभा चुनाव में वापसी के बाद बीजेपी ने पूरी चुनौती स्वीकार की और नगर निकाय चुनावों में निर्णायक जवाब दिया.

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी ने रणनीति बदली. हाइपर-लोकल मुद्दों पर जोर दिया गया. 29 बिंदुओं वाला घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसमें सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे. वहीं, ठाकरे परिवार ने मुंबई में मराठी अस्मिता को मुख्य मुद्दा बनाया, लेकिन वह रणनीति इस बार कारगर नहीं रही.

आगे की राजनीति पर असर

महाराष्ट्र की इस जीत का असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहने वाला. मुंबई से 1600 किलोमीटर दूर रांची में बीजेपी दफ्तर के बाहर जश्न मनाया गया. सवाल उठ रहा है कि क्या इसका मनोवैज्ञानिक असर पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के आगामी चुनावों तक पहुंचेगा? फिलहाल इतना तय है कि महाराष्ट्र में बीजेपी ने यह संदेश दे दिया है कि उसके खिलाफ बनाए गए प्रयोग चाहे वे गठबंधन के हों या वैचारिक समझौतों के, अब आसानी से सफल नहीं होंगे. हिंदुत्व, विकास और मजबूत नेतृत्व के त्रिकोण के साथ बीजेपी ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है.

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