चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस एक बार फिर साथ आते दिख रहे हैं, लेकिन इस बार सबसे बड़ा बदलाव राजनीतिक समीकरण में नहीं, बल्कि वोटिंग प्रक्रिया में है. शहर के इतिहास में पहली बार मेयर का चुनाव गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट) से नहीं, बल्कि खुले तौर पर हाथ उठाकर किया जाएगा. यह फैसला बीते वर्षों में हुए विवादों, क्रॉस वोटिंग, हॉर्स ट्रेडिंग और खासतौर पर 2024 के चर्चित मेयर चुनाव घोटाले के बाद लिया गया है.
यह एक बार का AAP-कांग्रेस ‘समझौता’ बेहद ध्रुवीकृत नगर निगम सदन और 2024 के तूफानी मेयर चुनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है. दोनों दल भले ही इसे औपचारिक गठबंधन न बता रहे हों, लेकिन संख्याबल इतना नाजुक है कि तालमेल के बिना जीत लगभग नामुमकिन दिख रही है. मेयर चुनाव में अब एक हफ्ते से भी कम वक्त बचा है और सभी दल अंदरूनी बैठकों में जुटे हुए हैं.
गठबंधन नहीं, 'रणनीतिक मजबूरी'
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने AAP के साथ रिश्ते को रणनीतिक समझ बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास सहयोग के अलावा कोई विकल्प नहीं था. उन्होंने कहा, “अगर हम आज ऐसा नहीं करते, तो मीडिया यही कहेगा कि कांग्रेस बीजेपी के साथ मिली हुई है. हमारा संदेश साफ है कि बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए हम बलिदान देने को तैयार हैं.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस मेयर पद AAP को देने के लिए तैयार है, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी. उन्होंने आगे कहा, “यह कांग्रेस का त्याग है. बीजेपी के पास कोई वास्तविक जनादेश नहीं है.”
AAP के पार्षद और पूर्व मेयर कुलदीप कुमार ने भी इस समझौते की पुष्टि की, हालांकि उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है. क्रॉस वोटिंग की आशंका पर उन्होंने माना कि मुकाबला बेहद करीबी है. उन्होंने कहा, “हमारी ताकत अब 18 है, जिसमें सांसद का वोट भी शामिल है. बीजेपी के पास भी अब 18 वोट हैं.”
बता दें कि कुलदीप कुमार खुद मेयर चुनावों के विवादों का केंद्र रह चुके हैं. फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें मेयर घोषित किया गया था, जब जनवरी 2024 के नतीजों को पलट दिया गया. उस वक्त रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह पर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट अमान्य करने का आरोप लगा था, जिसे कैमरे में भी देखा गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या तक कहा था.
कुलदीप कुमार का कार्यकाल जनवरी 2025 में खत्म हुआ, जिसके बाद उसी साल बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला मेयर बनीं. यह जीत तब हुई, जब बीजेपी के पास संख्याबल कम होने के बावजूद 19 वोट पड़े, जबकि AAP और कांग्रेस मिलकर भी जीत नहीं हासिल कर सके.
भाजपा का पलटवार: हार के डर से झुकी कांग्रेस
मौजूदा मेयर और बीजेपी नेता हरप्रीत कौर बबला ने AAP-कांग्रेस समझौते पर तीखा तंज कसा. आजतक से बातचीत में उन्होंने खुले मतदान प्रणाली का स्वागत किया, लेकिन विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “अगर यह गठबंधन है या समझौता, तो फिर दिखावा क्यों? यह साफ है कि बड़ी पार्टी कांग्रेस ने AAP के सामने घुटने टेक दिए हैं. मेयर पद इसलिए छोड़ा गया क्योंकि वे जानते हैं कि खुद जीत नहीं सकते.”
हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष लक्की ने 2024 की घटनाओं का हवाला देते हुए फैसले का बचाव किया. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने बिना जनादेश के हुक और क्रूक से मेयर बनाया. उन्होंने कहा, “शहर को इसकी कीमत चुकानी पड़ी. नए प्रोजेक्ट नहीं आए, योजनाएं फेल रहीं, घोटाले हुए और बीजेपी शासन में 500 करोड़ रुपये की एफडी खत्म हो गई. अनिल मसीह की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिला.”
पिछले चुनाव के चलते 'खुली वोटिंग' का फैसला
गौरतलब है कि सीक्रेट बैलेट हटाने का फैसला लगातार लगे आरोपों के बाद लिया गया है. 2024 के विवाद के बाद यूटी प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शो ऑफ हैंड्स से मतदान का आदेश दिया है. प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के निर्देश पर पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, मीडिया की मौजूदगी रहेगी और नया एसओपी लागू किया गया है. नामित पार्षद डॉ. रमणीक सिंह बेदी रिटर्निंग ऑफिसर होंगे.
29 जनवरी को होने वाला यह चुनाव 2022 में चुनी गई नगर निगम का आखिरी मेयर चुनाव होगा. 35 सदस्यीय सदन में बीजेपी के पास फिलहाल 18 वोट हैं, जिसमें दिसंबर 2025 में AAP से आए दो पार्षद सुमन शर्मा और पूनम देवी शामिल हैं. AAP के पास 11, कांग्रेस के छह और सांसद मनीष तिवारी के वोट के साथ AAP-कांग्रेस खेमे के पास भी कुल 18 वोट हैं.