मणिपुर विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी भले ही 21 सीटें लेकर बहुमत से दूर रह गई, लेकिन सरकार बनाने पर उसका दावा बरकरार है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बीजेपी प्रतिनिधिमंडल रविवार शाम राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगी.
मणिपुर की 60 सदस्यीय किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका था. यहां कांग्रेस 28 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, उसके पास बहुमत के जरूरी 31 विधायकों का समर्थन हासिल है.
बीजेपी यहां पहली बार चुनाव में उतरी थी और सूत्रों की मानें तो नागा पिपुल्स फ्रंट और पीए संगमा की पार्टी एनएनपी के चार-चार विधायकों के अलावा रामविलास पासवान की एलजेपी और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के एक-एक विधायकों ने बीजेपी को समर्थन दिया है.
बता दें कि मणिपुर में पिछले 15 सालों से कांग्रेस ही सत्ता में है. 2012 में तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी. मणिपुर में मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के सामने थीं. सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला पहली बार चुनावी मैदान में थी, लेकिन उन्हें महज 90 वोट मिले. इस हार से आहत आयरन लेडी ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी.