अमरावती देश के प्राचीनतम शहरों में से एक है और इसका प्राचीन नाम उदुम्बरावती है. कई सदियों तक इस शहर को उम्बरावती और अमरावती के नाम से जाना जाता रहा है. आगे चलकर इसके नाम बदलते हुए अमरावती हो गया और आज भी इसी नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि इस शहर का नाम प्राचीन अंबादेवी मंदिर के नाम से पड़ा था.
अमरावती के अस्तित्व का प्राचीनतम प्रमाण भगवान आदिनाथ (जैन भगवान) ऋषभनाथ की संगमरमर की मूर्ति के आधार पर पत्थर की नक्काशी के रूप में है. इससे यह भी पता चलता है कि ये प्रतिमाएं 1097 में यहां स्थापित की गई थीं. गोविंद महाप्रभु ने 13वीं सदी में अमरावती का भ्रमण किया था. 14वीं सदी में यहां पर भीषण अकाल पड़ा और लोग अमरावती छोड़कर गुजरात और मालवा की तरफ चले गए. बाद में वे वापस लौट आए. हालांकि इस बीच मुस्लिमों की बड़ी संख्या यहां पर बस गई. यह शहर हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के लिए भी जाना जाता है.
माल्केकडी पहाड़ी पर शिवाजी की प्रतिमा
शहर के पूर्वी क्षेत्र में पोहारा और चिरौली हिल्स है. माल्केकडी ऐसा हिल्स है जो शहर के अंदर है. माल्केकडी 60 मीटर की ऊंचाई और इस पहाड़ी के शीर्ष महान मराठा शासक शिवाजी की प्रतिमा लगी हुई है. शहर के पूर्वी हिस्से में 2 झील (छत्री और वादली तलाव) भी है. यह शहर पश्चिम विदर्भ के मुख्य केंद्र है.
प्रतिभा पाटिल के रूप में देश को पहली महिला राष्ट्रपति देने वाला अमरावती जिला 12,210 स्क्वायर किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. इस शहर की आबादी 2011 की जनगणना के मुताबिक 2,888,445 है जिसमें 1,851,158 लोग ग्रामीण तो 1,037,287 लोग शहरी इलाकों में रहते हैं. जिले के तहत 14 ताल्लुका आते हैं.
साक्षरता 87 फीसदी
साक्षरता दर पर नजर डाली जाए तो जिले की साक्षरता 87.38 फीसदी है जिसमें शहरी इलाकों में 91.48 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 85.07 फीसदी आबादी शिक्षित है. लिंगानुपात देखा जाए तो प्रति हजार पुरुषों पर 951 महिलाएं हैं जिसमें 957 महिलाएं शहरी तो 947 महिलाएं ग्रामीण इलाकों में हैं.
अमरावती लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें बड़नेरा, अमरावती, तिवसा, दर्यापुर, मेलघाट, अचलपुर विधानसभा सीट शामिल हैं. अमरावती, दर्यापुर, मेलघाट विधानसभा सीट बीजेपी के पास है तो वहीं तिवसा सीट पर कांग्रेस का दबदबा है. बड़नेरा और अचलपुर सीट निर्दलीय के पास है.
शिवसेना के गढ़ में निर्दलीय का कब्जा
अमरावती जिले की अमरावती लोकसभा सीट पर निर्दलीय नवनीत रवि राणा का कब्जा है. उन्होंने इस साल अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में शिवसेना के सांसद अडसूल आनंदराव विठोबा को 36,951 वोटों के अंतर से हराया था. चुनाव में नवनीत रवि राणा को 5,10,947 वोट मिले, जबकि शिवसेना के अडसूल आनंदराव विठोबा को 4,73,996 वोट से संतोष करना पड़ा.
2014 में बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर यहां पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और शिवसेना ने जीत हासिल की थी. यहां पर लंबे समय से शिवसेना का राज रहा है, लेकिन इस बार उसे मात खानी पड़ी.
अमरावती लोकसभा सीट से कांग्रेस ने 1980 में पहली बारी किसी महिला को टिकट दिया और ऊषा चौधरी जीत हासिल करने में कामयाब रहीं. 1991 में कांग्रेस ने प्रतिभा पाटिल को टिकट दिया. उन्होंने शिवसेना के प्रकाश पाटिल को हराकर जीत हासिल की. हालांकि, इस सीट से प्रतिभा पाटिल ने केवल एक ही बार चुनाव लड़ा. प्रतिभा पाटिल बाद में देश की पहली महिला और भारत की 12वीं राष्ट्रपति बनीं
हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. दोनों ही राज्यों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे जबकि 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे.