लोकसभा चुनाव करीब हैं और इसी साल के अंत तक हरियाणा विधानसभा के भी चुनाव होने हैं. चुनावी साल में दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) डबल मुश्किल में पड़ती दिख रही है. पहले बीजेपी ने जेजेपी से गठबंधन तोड़ा तो वहीं अब विधायक भी दुष्यंत का साथ छोड़ने लगे हैं. दुष्यंत चौटाला को चोट पर चोट लग रही है. 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में जेजेपी के कुल 10 विधायक हैं. इनमें से आधे यानी पांच विधायकों ने बागी तेवर अख्तियार कर लिया है.
जेजेपी के पांच विधायक पार्टी व्हिप को ठेंगा दिखाते हुए हरियाणा विधानसभा पहुंचे हैं. दरअसल, एक दिन पहले मनोहरलाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. सैनी सरकार को आज विधानसभा में विश्वासमत प्राप्त करना है. 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में बीजेपी के 41 विधायक हैं. सत्ताधारी दल के पास हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) के एक और छह निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है. सैनी सरकार का संख्याबल बहुमत के लिए जरूरी 46 सदस्यों के जादुई आंकड़े से दो अधिक है.
जेजेपी ने अपने विधायकों को व्हिप जारी कर विधानसभा की कार्यवाही से गैरहाजिर रहने के लिए कहा था. जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला हिसार में नव संकल्प रैली कर रहे हैं. इस रैली में दुष्यंत बीजेपी के गठबंधन तोड़ने के साथ ही भविष्य की रणनीति का भी खुलासा कर सकते हैं. जेजेपी ने अपने सभी विधायकों से इस रैली में मौजूद रहने को कहा था. लेकिन पार्टी के पांच विधायकों ने हिसार रैली से किनारा कर लिया. चार विधायक तो पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सदन में भी मौजूद हैं.
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जेजेपी विधायक जोगीराम सिहाग, ईश्वर सिंह, रामकुमार गौतम और देवेंद्र बबली सैनी सरकार के शक्ति परीक्षण के दौरान विधानसभा में मौजूद हैं. गौरतलब है कि इनमें से चार विधायक एक दिन पहले सैनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे. सैनी सरकार के शपथ ग्रहण के दिन ही जेजेपी प्रमुख दुष्यंत ने दिल्ली में अपने विधायकों की बैठक बुलाई थी. इस बैठक से भी इन विधायकों ने किनारा कर लिया था जो आज हिसार रैली से दूरी बनाए हुए हैं.
विपक्ष ने सत्ता परिवर्तन पर बीजेपी को घेरा
हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता परिवर्तन की गूंज सुनाई दी. विधानसभा में विपक्ष के नेता रघुवीर सिंह ने कहा कि खट्टर को सीएम पद से एंटी इनकम्बेंसी की वजह से नहीं हटाया गया. खट्टर को सीएम पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि वह शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे. उन्होंने मनोहरलाल खट्टर को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाए जाने की तुलना द्रौपदी के चीरहरण से कर दी.