लोकसभा चुनाव 2019 के लिए ओडिशा की संबलपुर सीट पर 23 मई को मतगणना हुई. इस सीट से बीजेपी के नीतेश गंगा देब ने बीजेडी की नलिनी कांता प्रधान को 9 हजार 162 मतों के नजदीकी अंतर से हराया.
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में इस सीट पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई. पिछली बार बीजेपी इस सीट पर मात्र 30 हजार वोटों से चुनाव हारी थी, लिहाजा पार्टी इस बार चुनाव में इस फासले को पाटने की पूरी कोशिश करेगी. कांग्रेस की ओर से पार्टी ने शरत पटनायक को मैदान में उतारा है. इस सीट से अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी चुनावी रण में पूरी तैयारी के साथ दिखी है.
इस बार कितनी हुई वोटिंग
संबलपुर सीट पर 76.41% वोटिंग दर्ज की गई. वहीं, 2014 के आम चुनाव में यहां पर 75.92% वोटिंग दर्ज की गई थी. 2014 लोकसभा चुनाव के मुताबिक इस सीट पर 12 लाख 97 हजार 98 वोटर्स थे. यहां पर 75.89 फीसदी मतदान हुआ था. इस सीट पर पुरुष मतदाताओं की संख्या 6 लाख 69 हजार 36 है. जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 28 हजार 62 है.
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कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
ओडिशा के संबलपुर लोकसभा सीट पर निर्दलीय समेत 11 कैंडिडेट मैदान में हैं. बीजेडी ने सीटिंग एमपी नागेन्द्र कुमार प्रधान का टिकट काट दिया. पार्टी ने हाल ही में वीआरएस लेकर बीजेडी में शामिल होने वाले पूर्व सचिव नलिनीकांत प्रधान को लोकसभा चुनाव में उतारा है. भारतीय जनता पार्टी की ओर से मैदान में मौजूदा विधायक नीतेश गंगा देब हैं. कांग्रेस की ओर से पार्टी ने शरत पटनायक को मैदान में उतारा. इस सीट से अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी चुनावी रण में पूरी तैयारी के साथ मौजूद थे. इसके अलावा कई निर्दलीय भी मैदान में थे.
2014 का जनादेश
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर हुई थी. हालांकि कांग्रेस ने भी इस सीट पर अच्छी खासी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की. बीजेडी के नगेन्द्र प्रधान को 3 लाख 58 हजार 618 वोट मिले. जबकि बीजेपी के सुरेश पुजारी 3 लाख 28 हजार 42 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे. नगेन्द्र प्रधान ने इस सीट पर 30 हजार 576 वोटों से जीत हासिल की. कांग्रेस के अमरनाथ प्रधान 2 लाख 42 हजार 131 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. 2014 में यहां मतदान का प्रतिशत 75.92 रहा था.
सामाजिक ताना-बाना
संबलपुर संसदीय क्षेत्र ओडिशा के अनुगुल, देबगढ़, झारसुगुडा और संबलपुर जिलों में फैला है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या लगभग 19 लाख है. यहां की 81 फीसदी आबादी गांव-देहात में रहती है जबकि 19 प्रतिशत जनसंख्या का निवास स्थान शहरों में हैं. इस सीट पर अनुसूचित जाति का आंकड़ा 17.91 प्रतिशत है, जबकि आदिवासी जनजाति यहां पर लगभग 30 फीसदी के आस-पास पाई जाती है.
संबलपुर लोकसभा में विधानसभा की 7 सीटें हैं. ये सीटें हैं कुचिन्दा, रेंगली, संभलपुर, रैराखोल, देवगढ़, छेंदीपाड़ा, अथामल्ल्कि. इनमें से 2014 के विधानसभा चुनाव में कुचिन्दा और देवगढ़ सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. बाकी पांच सीटों पर बीजेडी ने कब्जा जमाया था.
सीट का इतिहास
संबलपुर लोकसभा सीट 1998 से बीजू जनता दल का गढ़ बना है. हालांकि आजादी के बाद 1952, 57 और 62 के लोकसभा चुनाव में गणतंत्र परिषद और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का इस सीट पर कब्जा रहा. 1967 में इस सीट पर पहली बार कांग्रेस जीती, 1971 में भी कांग्रेस को जीत मिली. लेकिन 1977 में इंदिरा विरोधी लहर के दौरान कांग्रेस को ये सीट गंवानी पड़ी और जनता पार्टी के गणनाथ प्रधान चुनाव जीते.
1980 और 84 के चुनाव में मतादाताओं का मिजाज फिर बदला और कांग्रेस के कृपासिंधु भोई चुनाव जीते. 1989 के चुनाव में जनता दल की एक बार फिर वापसी हुई और भवानी शंकर होता विजयी हुए. 1991 में कांग्रेस के टिकट पर कृपासिंधु ने दमदार वापसी की. उनकी जीत का सिलसिला 1996 में भी जारी रहा. 1997 में जब बीजेडी वजूद में आई तो इस सीट का समीकरण बदल गया.
1998 के लोकसभा चुनाव में प्रसन्न आचार्य बीजेडी के टिकट पर चुनाव जीते. 1998 के बाद 99 और 2004 में भी बीजेडी के टिकट उनकी जीत हुई. 2009 में इस सीट पर कांग्रेस के अमरनाथ प्रधान चुनाव जीते. 2014 में बीजेडी ने इस सीट से नागेन्द्र प्रधान को मैदान में उतारा. यहां के मतदाताओं ने एक बार फिर से नवीन पटनायक की पार्टी में अपना भरोसा जताया.
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