कर्नाटक की रायचूर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के बीवी नाइक और भारतीय जनता पार्टी के राजा अमरेश्वर नाइक के बीच मुकाबला रहा. इस सीट से बीजेपी के राजा अमरेश्वर नाइक जीते. उन्होंने 117716 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. राजा अमरेश्वर को 596804 वोट मिले, जबकि बीवी नाइक को 480621 वोट मिले. बता दें कि इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 23अप्रैल को वोट डाले गए. चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक,रायचूर लोकसभा सीट पर 57.89 फीसदी वोटिंग हुई थी.
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कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
रायचूर सीट से बीवी नाइक (कांग्रेस), राजा अमरेश्वर नाइक (भारतीय जनता पार्टी), बी वेंकणा गौडा नायका (बहुजन समाज पार्टी), निरंजन नायक (उत्तमा प्रजाकिय पार्टी), के सोमशेखर यादागिरी (सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट) चुनाव लड़ रहे थे.
2014 का चुनाव
2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद इस सीट पर कांग्रेस के बीवी नायक करीबी टक्कर में जीते थे. साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को महज 1499 वोटों से शिकस्त दी थी. कांग्रेस के प्रत्याशी बीवी नायक को 4,43,659 वोट और बीजेपी के शिवानगौड़ा नायक को 4,42,160 वोट मिले थे. जबकि तीसरे नंबर पर जेडीएस के डीबी नायक 21,706 वोट पाकर और चौथे नंबर पर बीएसपी के राजा थिमअप्पा नायक 12,254 वोट पाकर रहे.
सामाजिक ताना-बाना
देश के पिछड़े इलाकों में गिने जाने वाली रायचूर लोकसभा सीट की 73 फीसदी आबादी गांव और 27 फीसदी आबादी शहर में रहती है. यहां पर 22 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति और 18 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है. इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 16.61 लाख है. इसमें पुरुष 8.35 लाख और महिला 8.25 लाख वोटर शामिल हैं.
इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत 8 विधानसभा सीटें (शोरापुर, शाहपुर, यादगीर, रायचूर ग्रामीण, रायचूर, मानवी, देवदुर्गा, लिंगसुगुर) आती हैं. इनमें से चार सीटें अनुसूचित जनजाति (शोरापुर, रायचूर ग्रामीण, मानवी, देवदुर्गा) और एक सीट अनुसूचित जाति (लिंगसुगुर) के लिए आरक्षित है. 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने चार सीटों (शोरापुर, यादगीर, रायचूर, देवदुर्गा), कांग्रेस ने 3 सीटों (शाहपुर, रायचूर ग्रामीण, लिंगसुगुर) और जेडीएस ने एक सीट (मानवी) पर जीत हासिल की थी.
सीट का इतिहास
शुरुआत में यह सीट हैदराबाद राज्य का हिस्सा थी. इस दौरान इस सीट से कांग्रेस के कृष्णाचार्य जोशी जीते थे. बाद में यह सीट मैसूर स्टेट का हिस्सा हो गई है और इस सीट से 1957 में कांग्रेस के ही जीएस मेलकोटे जीते. 1962 का चुनाव में कांग्रेस के जगनाथ राव यहां से जीतने में कामयाब हुए. 1967 में स्वतंत्र पार्टी के आरवी नाइक जीते. 1971 में कांग्रेस के पम्पंगोडा सकरप्पा गौड़ा अथन्नूर जीते.
1977 में यह सीट कर्नाटक का हिस्सा हो गई और इस सीट से कांग्रेस के राजशेखर मयप्पा जीते. 1980 और 1984 का चुनाव कांग्रेस के ही बीवी देसाई जीते. 1989 में इस सीट से कांग्रेस के आर अंबन्ना नाइक डोरे, 1991 में कांग्रेस के ही ए वेंकेटेश नाइक, 1996 में जनता दल के राजा रंगगप्पा नाइक जीते. इसके बाद 1998, 1999 और 2004 का चुनाव ए. वेंटेकेश नाइक जीते. 2009 में पहली बार इस सीट पर बीजेपी जीती. उसके टिकट पर सन्ना पाकिरप्पा जीते. 2014 में कांग्रेस ने वापसी की और उसके टिकट पर बीवी नायक ने जीत दर्ज की.
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