कर्नाटक की हावेरी लोकसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद ही अस्तित्व में आई है. इसके पहले यह क्षेत्र धारवाड़ उत्तर, धारवाड़ दक्षिण और बागलकोट लोकसभा के अंतर्गत बंटा हुआ था. इस लोकसभा सीट पर 2009 में पहली बार चुनाव हुए और तब से लेकर लगातार दो बार बीजेपी ने हावेरी लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की है. यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से कर्नाटक का अहम जिला है और यहां दुर्लभ प्रजाति के काले हिरण के लिए एक अभयारण्य भी स्थापित किया गया है. हावेरी पहले धारवाड़ जिले का हिस्सा था लेकिन बाद में इसे एक अलग जिले का दर्जा दिया गया.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
हावेरी लोकसभा सीट पर सिर्फ दो बार 2009 और 2014 में चुनाव हुए हैं. दोनों ही चुनावों में यहां से बीजेपी के शिवकुमार उदासी को जीत मिली है. हावेरी में हुए पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उदासी ने कांग्रेस के सलीम अहमद को करीब 88 हजार वोटों से हराया था. इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में फिर से शिवकुमार को जीत मिली और उन्होंने फिर से सलीम अहमद को ही 87571 वोटों से हराया. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें भी आती हैं.
सामाजिक तानाबाना
हावेरी में 21.11 लाख आबादी रहती है जिनमें करीब 15.58 लाख वोटर हैं. कुल मतदाताओं में 8.07 लाख पुरुष और 7.51 लाख महिला वोटर शामिल हैं. इस सीट के अंतर्गत रहने वाली कुल आबादी की 72 फीसदी जनता ग्रामीण और 28 फीसदी जनता शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आती है. जातिगत विभाजन की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी कुल का 15.38 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति की आबादी 8.07 फीसदी है.
2014 का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में हावेरी सीट से बीजेपी के शिवकुमार उदासी को जीत मिली थी. उन्होंने कांग्रेस के सलीम अहमद को 87571 वोटों से हराया था. इस चुनाव में शिवकुमार को 5,66,790 वोट मिले जबकि कांग्रेस के अहमद को 4,79,219 वोट मिले थे. इस चुनाव में करीब 51 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. पिछली बार हावेरी सीट से जेडीएस, आम आदमी पार्टी और बसपा ने भी चुनाव लड़ा था लेकिन इन दलों एक फीसदी से कम ही वोट हासिल हुए थे.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
हावेरी से सांसद शिवकुमार उदासी (51) को अगर 2019 चुनाव में टिकट मिलता है तो वह तीसरी बार जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेंगे. उन्होंने इस सीट पर हुए 2 चुनावों में से दोनों बार बीजेपी की टिकट से जीत दर्ज की है. शिवकुमार पेशे से इंजीनियर हैं और सांसद बनने से पहले उनकी पहचान एक बिल्डिर के तौर पर थी. वह लोकसभा की पीएसी कमेटी के सदस्य भी रहे हैं.
संसद में बीजेपी सांसद शिवकुमार का प्रदर्शन शानदार रहा है और उन्होंने लोकसभा की कुल 331 बैठकों में से 330 में अपनी मौजदूगी दर्ज कराई है. साथ ही उन्होंने लोकसभा में 460 सवाल किए और 140 चर्चाओं में हिस्सा भी लिया. शिवकुमार ने अपनी सांसद निधि 25 करोड़ की 72 फीसदी राशि मतलब, करीब 18 करोड़ रुपये अबतक खर्च किए हैं. पिछले चुनाव में दिए हलफनामे के मुताबिक शिवकुमार के पास 57 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है और उनपर कोई भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है.