गुजरात के आणंद को देश की 'मिल्क सिटी' यानी दुग्ध शहर भी कहा जाता है. वर्गीज कुरियन की दुग्ध क्रांति इसी शहर पर आधारित है. यही वजह कि आज इस शहर में अमुल डेयरी और विद्या डेयरी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स काम कर रहे हैं. लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मस्थली भी आणंद का करमसाड है. राजनीतिक लिहाज से भी यह आणंद लोकसभा क्षेत्र (सामान्य सीट) काफी महत्वपूर्ण है. यहां से कांग्रेस के ईश्वरभाई चावड़ा और मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी सांसद रहे हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
2014 में मोदी लहर के सामने वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरतसिंह सोलंकी हैट्रिक नहीं लगा पाए थे और उन्हें भारतीय जनता पार्टी के दिलीप पटेल ने हरा दिया था. दिलीप पटेल से पहले 2009 और 2004 में लगातार दो बार भरतसिंह सोलंकी सांसद बने थे. 1999 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी, जबकि उससे पहले लगातार तीन बार (1991,1996,1998) कांग्रेस के उम्मीदवार ईश्वरभाई चावड़ा यहां से जीतते रहे.
सामाजिक-ताना बाना
दिलीप भाई पटेल गुजरात में पटेलों के बड़े नेता माने जाते हैं. मध्य गुजरात के आणंद जिले में लेउवा पटेलों का बड़ा असर है और यह दिलीप भाई पटेल उनका प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. 2016 में उनका एक वीडियो वायरल होने पर काफी विवाद हुआ था. वह एक वीडियो में पुलिस इंस्पेक्टर को धमकी देते नजर आ रहे थे.
आणंद लोकसभा क्षेत्र के अधीन सात विधानसभा सीट आती हैं. इनमें खंभात, बोरसद, आंकलाव, उमरेठ, आणंद, पेटलाद और सोजित्रा हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की 2 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी, जबकि पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं. कांग्रेस ने बोरसद, आंकलाव, आणंद, पेटलाद और सोजित्रा सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी के खाते में खंभात और उमरेठ गई थी. बीजेपी ने ये दोनों सीटें भी बहुत कम अंतर (2000 वोट से कम अंतर) से जीती थीं.
2014 चुनाव का जनादेश
दिलीपभाई मणिभाई पटेल, बीजेपी- 490,829 वोट (50.6%)
भरतसिंह सोलंकी, कांग्रेस- 427,403 (44.0%)
2014 चुनाव का वोटिंग पैटर्न
कुल मतदाता- 14,96,859
पुरुष मतदाता- 7,81,120
महिला मतदाता- 7,15,739
मतदान- 9,70,894 (64.9%)
पुरुष मतदान- 69.28 %
महिला मतदान- 60.04 %
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
आणंद से मौजूदा सांसद दिलीप मणिभाई पटेल 2014 में पहली सांसद निर्वाचित हुए थे. इससे पहले वो चार बार विधायक बने. 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आणंद सीट से बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2014 में उन्हें यह सीट खाली कर लोकसभा चुनाव लड़ा और उसमें भी फतह पाई. दिलीपभाई पटेल 1995-2007 तक लगातार विधायक बने. वह गुजरात सरकार में मंत्री भी रहे हैं. 1995-97 तक वह गुजरात सरकार में नर्मदा विकास और जल संसाधन के उप मंत्री रहे. जबकि 1998-1999 तक वह गुजरात सरकार में पंचायत मंत्री रहे. इसके बाद 1999-2001 तक वह माइंस एवं मिनरल्स मंत्री रहे.
दिलीप पटेल ने अपने कार्यकाल के दौरान जारी कुल धनराशि का लगभग 99 फीसदी खर्च किया है. उनकी निधि से अलग-अलग मद में कुल 25.65 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई है, जिसमें 25.06 करोड़ रुपये खर्च कर दिया गया. यानी करीब 2.96 करोड़ रुपये उनकी निधि से खर्च नहीं हो सके.
दिलीप पटेल की संपत्ति की बात की जाए तो एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास कुल सात करोड़ की संपत्ति की है. इसमें 1 करोड़ 92 लाख के करीब चल संपत्ति और 5 करोड़ 67 लाख की अचल संपत्ति शामिल है.
दिलीप पटेल का संसद में प्रदर्शन औसत से कम रहा है. संसद में उपस्थिति की बात की जाए तो उनकी मौजूदगी 70 फीसदी रही. जबकि गुजरात के सांसदों की औसत उपस्थिति 84 फीसदी है और देशभर के सांसदों का औसत 80 फीसदी है. वहीं, बहस में हिस्सा लेने के मामले में वह बिल्कुल जीरो रहे. उन्होंन एक बार भी किसी बहस में हिस्सा नहीं लिया. जबकि गुजरात के सांसदों का औसत 39.5 फीसद है. हालांकि, सवाल पूछने के मामले में भी वह पीछे नहीं रहे, और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 228 सवाल पूछे. जबकि सवाल पूछने के मामले में गुजरात के सांसदों का औसत 270 है और देशभर के सांसदों का औसत 278 है. वह एक बार भी प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाए हैं.
दिलीप पटेल फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, ट्विटर पर उनकी सक्रियता काफी कम रहती है. उन्होंने जुलाई 2013 में ही ट्विटर ज्वाइन किया था और अब तक महज करीब साढ़े तीन हजार ही ट्वीट उन्होंने किए हैं और उनके फॉलोअर्स की संख्या 15 हजार पहुंच गई है. दूसरी तरफ फेसबुक पर वो एक्टिव नजर आते हैं. जहां वह वीडियो समेत अपनी पार्टी और पीएम मोदी से जुड़ी खबरें शेयर करते रहते हैं. साथ ही अन्य संदेश भी साझा करते रहते हैं.