लोक सभा चुनाव 2014 में मोदी लहर की आंधी में कांग्रेस का सबसे ज्यादा नुकसान इसी सीट पर हुआ. इस सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी सांसद रहे हैं. कॉमनवेल्थ घोटाले की लपटों की वजह से इनका टिकट कटा. नतीजा, लोक सभा के साथ यहां की 6 विधानसभा सीटों पर भी बीजेपी का कब्जा हो गया.
पुणे लोक सभा सीट का इतिहास
1951 से इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है. इस सीट से 1951 में पहले कांग्रेसी सांसद एन गाडगिल थे. उसके बाद बीच-बीच में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय लोक दल के सांसद भी बने लेकिन कांग्रेस हर बार वापिसी कर लेती थी. कांग्रेस के वर्चस्व को 1991 में चुनौती मिली बीजेपी से, यहां से अन्ना जोशी बीजेपी से सांसद बने थे. 1996 में इस सीट से पहली बार सुरेश कलमाड़ी सांसद बने, जो कॉमनवेल्थ खेल घोटाले में चर्चित रहे हैं. कलमाड़ी उसके बाद 2004 और 2009 में भी कांग्रेस के टिकट पर यहीं से सांसद बने. 2014 की मोदी लहर में न सिर्फ लोक सभा बल्कि विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस साफ हो गई. 2014 में कांग्रेस की यह परंपरागत सीट पूरी तरह भाजपा के रंग में रंग गई.
2014 के लोक सभा चुनाव में जीत का गणित
वर्तमान में इस सीट से बीजेपी के अनिल शिरोले सांसद हैं . 2009 में कांग्रेस के सुरेश कलमाड़ी और बीजेपी के अनिल शिरोले में नजदीकी मुकाबला रहा था लेकिन जीत सुरेश कलमाड़ी को मिली. 2014 में घोटालों की वजह से सुरेश कलमाड़ी का टिकट काटकर डॉ. विश्वजीत पतंगराव कदम को कांग्रेस ने टिकट दिया लेकिन उन्हें ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस यहां से 3,15,769 वोटों से हारी. 2014 के लोक सभा चुनावों में बीजेपी के अनिल शिरोले को 5,69,825 वोट मिले तो वहीं कांग्रेस के डॉ. विश्वजीत पतंगराव कदम को 2,54,056 वोट मिले. तीसरे स्थान पर मनसे के दीपक नाथाराम पाइगुडे रहे जिन्हें 93,502 वोट मिले.
विधानसभा सीटों का मिजाज
पुणे लोक सभा सीट में 6 विधानसभा आती हैं. इन सभी विधानसभाओं में बीजेपी का वर्चस्व है. वडगांव शेरी, शिवाजीनगर, कोथरुड, पार्वती, पुणे कैंट और कस्बा पेठ सहित सभी विधानसभाओं में बीजेपी के विधायक हैं.
सांसद अनिल शिरोले के बारे में
शिरोले ने अपनी राजनीति की शुरुआत 1970 में पतित पावन संगठन के पुणे शहर के प्रेसिडेंट बनकर की. 1972 में वे आरएसएस की स्टूडेंट विंग के सचिव बने. इमरजेंसी के दौरान 1975 में वे 1 साल तक जेल में भी रहे. 1992 में पहली बार वे सक्रिय राजनीति में आए और पुणे नगर निगम में बीजेपी के टिकट पर पार्षद बने. फिर बाद में वे पुणे के बीजेपी प्रेसिडेंट बने और 2014 में 16वीं लोक सभा के लिए सांसद चुने गए.
संसद में प्रदर्शन और संपत्ति
68 साल के अनिल शिरोले पु्णे विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. संसद में इनकी उपस्थिति 93 फीसदी रही. वहीं, संसद में 17 डीबेट में भाग लिया और 196 प्रश्न पूछे. प्राइवेट मेंबर्स बिल लाने में इनका खाता शून्य रहा. इस सीट पर संसदीय इलाके में खर्च करने के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इन्हें 17.50 करोड़ रुपये खर्च के लिए मिले जो ब्याज के साथ 17.92 करोड़ की रकम हो गई. इसमें से 12.88 करोड़ ही खर्च हो पाए जो 73.63 फीसदी रकम थी. अभी भी खर्च के लिए इनके खाते में 5.04 करोड़ रुपये बचे हैं. स्नातक तक पढ़ाई करने वाले और होटल व्यवसाय से जुड़े शिरोले ने 2014 के लोक सभा चुनाव के हलफनामे में में 22 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी.