घाटल संसदीय क्षेत्र पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में आता है. इस संसदीय क्षेत्र का गठन 1951 में ही हो गया था. यह इलाका कृषि के लिए ही जाना जाता है. कृषि के साथ यहां मछली पालन और हाथ से कपड़ों पर काम करने का हुनर देखा जाता है. यह इलाका बहुत अधिक मात्रा में देश और प्रदेश को भोजन उपलब्ध कराता है. गेहूं, धान और आलू यहां की मुख्य कृषि फसलें हैं. मछली पालन को उद्योग का दर्जा दिया गया है. 2019 का चुनाव देखें तो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच ही जंग लड़े जाने की उम्मीद है, पिछले चुनाव में कांग्रेस यहां तीसरे स्थान पर रही थी, बीजेपी को चौथा स्थान मिला था लेकिन बीजेपी यहां से ज्यादा जोर आजमाइश कर रही है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
घाटल संसदीय सीट का गठन 1951 में ही हो गया था. संसदीय सीट का मिजाज बदलता रहा है पश्चिम बंगाल का कोई ऐसा दल नहीं था जिसे यहां से विजय न मिली हो और हार का मुंह न देखना पड़ा हो. फिलहाल इस पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. पहले चुनाव में यहां से सीपीआई के चौधरी निकुंज बिहारी जीते. इसके बाद 1957 में कांग्रेस से निकुंज बिहारी मैती यहां से सांसद रहे. 1957 में कांग्रेस के सचिन्द्र नाथ चौधरी सांसद चुने गए वहीं 1967 में कांग्रेस के जी परिमल सांसद चुने गए. 1971 में सीपीएम ने यह सीट छीन ली और जगदीश भट्टाचार्य सांसद चुने गए. 2009 में सीपीआई के दुरुदास दास गुप्ता सांसद बने. 2014 में यहां से टीएमसी के दीपक अधिकारी सांसद चुने गए.
दीपक अधिकारी बंगाली फिल्मों का जाना-माना नाम हैं. वह एक्टर, प्रोड्यूसर, फिल्म राइटर भी हैं. उन्हें बंगाली सिनेमा में योगदान के लिए जाना जाता है. घाटल में सीपीआई-सीपीएम के गढ़ को तोड़ने के लिए उन्हें ममता बनर्जी ने मैदान में उतारा था और वह उस उम्मीद पर खरे उतरे.
सामाजिक ताना-बाना
घाटल लोकसभा क्षेत्र पूरबा मेदिनीपुर जिले में स्थित है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 2316982 है. इसमें से 94.03 फीसदी आबादी ग्रामीण है और 5.97 फीसदी आबादी शहरी है. यहां पर अनुसूचित जाति और जनजाति का रेश्यो 17.13 फीसदी और 7.96 फीसदी है. 2017 की वोटर लिस्ट के मुताबिक यहां मतदाताओं की कुल संख्या 1707176 है.
घाटल संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की 7 सीटें हैं, इसमें 6 तृणमूल के पास है और 1 पर कांग्रेस जीती है.
1-पंस्कुरा पश्चिम से तृणमूल की फिरोजा बीबी विधायक हैं
2-सबंग से कांग्रेस के मानस रंजन विधायक हैं
3-पिंगला से तृणमूल के सोमेन कुमार महापात्रा विधायक हैं
4-डेब्रा से तृणमूल कांग्रेस की सेलिमा खातून विधायक हैं
5-दासपुर से तृणमूल की ममता भुनिया जीती हैं
6-घाटल एससी से तृणमूल के शंकर डोलाई जीते हैं
7-केशपुर एससी तृणमूल की सेउली साहा जीती हैं
2014 का जनादेश
2014 तक तृणमूल कांग्रेस मजबूत हो चुकी थी, लोगों ने उसे सीपीएम का विकल्प मान लिया था. ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और दीपक अधिकारी और सीपीआई के संतोष राना के बीच जोरदारर टक्कर हुई और तृणमूल कांग्रेस के दीपक अधिकारी को 685696 वोट मिले. वहीं सीपीआई के संतोष राना को 424805 वोट मिले. यहां कांग्रेस के मान रंज तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कुल 123128 यानी 9.01 फीसदी वोट मिले. बीजेपी के मोहम्मद आलाम को 94842 यानी 6.94 फीसदी वोट मिले.
2014 में यहां पर 84.92 फीसदी वोटिंग हुई थी जबकि 2009 में 86.35 फीसदी वोटिंग हुई थी. 2014 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 50.16 फीसदी, सीपीएम को 9.01 फीसदी और बीजेपी को 6.94 फीसदी वोट मिले थे. वहीं 2009 के चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांगरेस को 40.92%, और बीजेपी को 2.99 फीसदी वोट मिले थे.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
दीपक अधिकारी यहां से सांसद हैं. सांसद चुने जाने के समय 2014 में उनकी आयु 36 साल थी. उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की हुई है. फोटोग्राफी का इन्हें शौक है. संसद में इनकी हाजिरी 9.97 फीसदी रही है. उन्होंने कुल 3 सवाल पूछे हैं. 2 डिबेट में हिस्सा लिया है. इनके नाम कोई प्राइवेट मेंबर बिल नहीं है. सांसद विकास निधि के तौर पर जो 25 करोड़ रुपये मिले थे उसमें से इन्होंने 18.07 यानी 72.28 फीसदी रकम खर्च कर दी है.