चामराजनगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के आर. ध्रुवनारायण और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वी. श्रीनिवास प्रसाद के बीच कड़ा मुकाबला रहा. हालांकि बीजेपी ने बाजी मार ली. वी. श्रीनिवास प्रसाद ने 1817 वोटों के अंतर से कांग्रेस को पटखनी दी. बता दें कि इस सीट पर दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को वोट डाले गए. चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, चामराजनगर लोकसभा संसदीय सीट पर 73.45 फीसदी मतदान हुआ था.
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कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
इस संसदीय क्षेत्र से 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस के आर. ध्रुवनारायण, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वी. श्रीनिवास प्रसाद और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के डॉ. शिवकुमार अपनी किस्मत आजमा रहे थे. इनके अलावा उत्तम प्रजाकिया पार्टी, कर्नाटक प्रजा पार्टी (रैथा पर्व) और चार निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.
2014 का चुनाव
पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से तत्कालीन सांसद और कांग्रेस के प्रत्याशी आर. ध्रुवनारायण ने दूसरी बार जीत दर्ज की थी. उन्होंने बीजेपी के ए.आर. कृष्णमूर्ति को करीब 1.41 लाख वोटों से हराया था. कांग्रेस को तब 5.67,782 वोट मिले थे जबकि बीजेपी प्रत्याशी के खाते में 4.26,600 वोट आए थे. इस चुनाव में 11,33,029 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां जनता दल सेक्युलर तीसरे नंबर की पार्टी थी जिसे 5.2 फीसदी वोट हासिल हुए थे इसके अलावा बसपा 3.1 फीसदी वोटों के साथ चौथे पायदान पर रही थी.
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सामाजिक ताना-बाना
कर्नाटक की इस लोकसभा सीट के अंतर्गत करीब 20.41 लाख आबादी है जिनमें से करीब 15.55 लाख मतदाता भी शामिल हैं. साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर पुरुष वोटरों की संख्या 7.89 लाख जबकि महिला वोटरों की संख्या 7.66 लाख थी. लोकसभा सीट की 85 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाके में रहती है और इसके मुकाबले करीब 15 फीसदी जनता शहरी क्षेत्र में रहती है. जातिगत आबादी की बात करें तो इस सीट के अंतर्गत अनुसूचित जाति की आबादी 25 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति की आबादी करीब 14 फीसदी है. इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें भी आती हैं.
सीट का इतिहास
चामराजनगर लोकसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई. इसके पहले यह सीट मैसूर स्टेट में आती थी लेकिन साल 1977 के बाद से इसे कर्नाटक में शामिल किया गया. इस सीट पर अब तक कुल 16 बार चुनाव हुए हैं जिनमें 12 बार कांग्रेस ने यहां से जीत दर्ज की है. इसके अलावा 2 बार जनता दल, एक-एक बार जेडीएस और जेडीयू के उम्मीदवार को इस सीट पर जीत मिली है. खास बात यह है कि अब तक बीजेपी इस सीट पर अपना खाता भी नहीं खोल पाई है.
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