पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए खास सीटों में से एक अलीपुरद्वार लोकसभा सीट तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में है और इस बार इस सीट पर रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है. 1977 में 6वें आम चुनाव से पहले यह सीट अस्तित्व में आई थी और तब से लेकर 2009 तक इस सीट पर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) का कब्जा रहा. 2014 के आम चुनाव में यह सीट तृणमूल कांग्रेस के खाते में चली गई और रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी से तीन बार के विधायक रहे दशरथ तिर्की सांसद चुने गए.
जलपाइगुड़ी जिले में स्थित अलीपुरद्वार लोकसभा सीट पर पहले चरण में लोकसभा चुनाव (11 अप्रैल) होना है और इस सीट पर 11 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है. मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहेगा. जबकि सीपीआई और कांग्रेस भी बड़ी टक्कर दे सकते हैं. रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी से मिली ओरान, तृणमूल कांग्रेस से दसरथ टिर्की, कांग्रेस से मोहनलाल बासुमाता के अलावा भारतीय जनता पार्टी जॉन बारला मैदान में हैं. 2 उम्मीदवार निर्दलीय हैं. बाकी अन्य दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं.
2014 में देश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद अलीपुरद्वार में लेफ्ट फ्रंट के तीन बार विधायक रहे दशरथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. तब आरएसपी के दशरथ तिर्की, अनंत देब अधिकारी और फारवर्ड ब्लॉक के सुनील मंडल ने तृणमूल कांग्रेस ज्वॉइन कर लिया. इनमें से दशरथ तिर्की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे. दशरथ तिर्की सांसद चुने जाने से पहले कुमारग्राम विधानसभा सीट से लगातार 2001, 2006 और 2011 में विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे.
7 विधानसभा क्षेत्रों में बंटा
परिसीमन आयोग की 2009 की परिसीमन रिपोर्ट में आदिवासी बहुल अलिपुरद्वार लोकसभा सीट को सात विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित किया गया. इन सात विधानसभा सीटों में तूफानगंज, कुमारग्राम, कालचीनी, अलीपुरद्वार, फलकाटा, मदरीहाट और नगरकाटा आती हैं. इनमें अलीपुरद्वार को छोड़कर बाकी की विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं. इन्हीं विधानसभा सीटों में से एक कुमारग्राम सीट से दशरथ तिर्की तीन बार विधायक रहे.
अलीपुरद्वार सीट के 1977 में अस्तित्व में आने के बाद से यहां से लगातार रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का कब्जा रहा है. 1977 में 6वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में यहां से रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के पीयूष तिर्की ने जीत हासिल की. वह 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 के संसदीय चुनावों में लगातार जीतते रहे.
1996 में हुए आम चुनाव में रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के जोएचीन बक्सला ने जीत हासिल की. 1996,1998, 1999 और 2004 तक इस सीट से चुनाव जीतते रहे. 2009 के चुनाव में रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने अपने नए उम्मीदवार मनोहर तिर्की को यहां से मैदान में उतारा जिन्होंने जीत हासिल की. लेकिन 2014 के चुनाव में रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को बेदखल करते हुए दशरथ तिर्की ने यह सीट तृणमूल कांग्रेस की झोली में डाल दी.
2014 में जीते दशरथ तिर्की
अलीपुद्वार लोकसभा सीट पर 1977 से काबिज रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) को बेदखल करने का इतिहास दशरथ तिर्की ने रचा और 2014 के आम चुनानों में 3,62,453 मतों यानी 29.6% फीसदी वोट के साथ जीत दर्ज की और आरएसपी के मनोहर तिर्की को मात दी. मनोहर तिर्की को 3 41,056 (27.9%) मतों के साथ संतोष करना पड़ा. जबकि बीजेपी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रही.
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