कर्नाटक चुनाव में जैसे-जैसे मतदान के दिन नजदीक आते जा रहे हैं, राजनीतिक दलों की सक्रियता चरम की ओर पहुंचती दिख रही है. अभी चुनाव लड़ने के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है और इसी के साथ मतदाताओं का मन टटोलने और उन्हें अपने पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित करने की भी जद्दोजहद दिख रही है. लिंगायतों को लेकर भी भाजपा और कांग्रेस का प्रेम ऐसा ही है.
कर्नाटक में सतर्क हैं लिंगायत मतदाता
सीएम बसवराज बोम्मई ने मंगलवार को कहा कि लोग कांग्रेस पार्टी की फूट डालो और राज करो की नीति को नहीं भूले हैं, लेकिन कर्नाटक में लिंगायत मतदाता सतर्क हैं और जरूरत पड़ने पर उन्होंने हमेशा सही फैसला लिया है. विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनके प्रति विशेष प्रेम दिखाया है. यह वही पार्टी थी जिसने लिंगायतों और वीरशैवों को बांटने की कोशिश की थी.
कांग्रेस ने लिंगायतों के आरक्षण का किया था विरोध: गोविंद करजोल
मंगलवार को ही मुधोल में भाजपा उम्मीदवार गोविंद करजोल ने अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस ने लिंगायतों के लिए आरक्षण का विरोध किया था. इसने 2009 में लिंगायतों को 2ए श्रेणी में शामिल किए जाने का विरोध किया था और 2016 में इसे खारिज कर दिया था. मौजूदा बीजेपी सरकार ने एक अलग श्रेणी 2डी बनाई और लिंगायतों के लिए कोटा बढ़ा दिया. अब उन्होंने किसी को भड़काया है और सुप्रीम कोर्ट में उनके लिए आरक्षण पर सवाल उठाते हुए मामला दायर किया है. कांग्रेस नेताओं ने लिंगायतों के हर विकास का विरोध किया. सिद्धारमैया सरकार में हुई 'जाइलेबी' फाइल क्लीयरेंस को कोई नहीं भूला है.
1967 के बाद कोई लिंगायत नहीं बना सीएम
सीएम ने यह जानने की कोशिश की कि कांग्रेस सरकार ने यूकेपी के मुद्दों के बारे में क्या किया. उन्होंने कहा कि किसान सबकुछ ऑब्जर्व करते हैं, वे राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों पर भी नजर रखते हैं. साथ ही राज्य मंत्रिमंडल में कितने लिंगायत हैं, यह भी जानते हैं. सबसे बढ़कर, 1967 के बाद, वीरेंद्र पाटिल को छोड़कर कोई भी लिंगायत कर्नाटक का मुख्यमंत्री नहीं बना है. यहां तक कि पाटिल के साथ भी कांग्रेस नेताओं ने बुरा बर्ताव किया. लोग जानते हैं कि एम. राजशेखर मूर्ति और विरुपक्षप्पा जैसे लिंगायत नेताओं के साथ क्या हुआ. अब वे सत्तारूढ़ पार्टी के पूर्व नेता एसआर. पाटिल के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहे हैं और उन्हें विधान परिषद में विपक्ष के नेता के पद और परिषद के सभापति के पद से वंचित कर रहे हैं.
बीजेपी जीतेगी ज्यादा सीटें
बोम्मई ने कहा कि इस क्षेत्र का विकास भाजपा सरकार के कारण हुआ है. पार्टी ने कल्याण कर्नाटक और कित्तूर कर्नाटक दोनों का विकास किया और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया. चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल होने वाले सभी नेताओं का बीजेपी की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस बार बीजेपी 2018 के विधानसभा चुनाव से ज्यादा सीटें जीतेगी.
किसी के चंगुल में नहीं
सीएम ने कहा कि राज्य भाजपा इकाई किसी के चंगुल में नहीं है, क्योंकि यह राष्ट्रीय पार्टी है और इसकी एक अलग प्रणाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्वोच्च नेतृत्व में पार्टी में लोकतंत्र कायम रहा. जो आरोप लगा रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि वे भी एक शक्ति केंद्र थे. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभिनेता सुदीप का अभियान तैयार नहीं है और इसे कल अंतिम रूप दिया जाएगा. बाद में किच्चा सुदीप हर जगह भाजपा के लिए प्रचार करेंगे.
19 अप्रैल, कई बड़े नेता करेंगे नामांकन
कर्नाटक चुनाव में 20 अप्रैल को नामांकन की आखिरी तारीख है, इस लिहाज से 19 अप्रैल की तारीख बेहद खास है. क्योंकि इस दिन कई बड़े नेता नामांकन करने वाले हैं. कर्नाटक के सीएम और बीजेपी नेता बसवराज बोम्मई 19 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. कहा जा रहा है कि इस दौरान एक्टर किच्चा सुदीपा मुख्यमंत्री के लिए प्रचार करेंगे. इसके अलावा पूर्व सीएम सिद्धारमैया, जगदीश शेट्टार, कुमारस्वानी भी 19 अप्रैल को ही अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. निर्वाचन आयोग (ईसी) के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल है. नामांकन पत्रों की जांच 21 अप्रैल को होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल है.
किसे कहां से मिला है टिकट
1- सिद्धारमैया: कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को वरुणा से टिकट दिया है. बीजेपी ने सिद्धारमैया के मुकाबले में वी सोमन्ना को टिकट दिया है. सिद्धारमैया ऐलान कर चुके हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव होगा. वह 19 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगे.
2- डी के शिवकुमार: डी के शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं. वे कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं, शिवकुमार भी वोक्कालिगा समुदाय से ही आते हैं. वे कर्नाटक सरकार में मंत्री भी हैं. उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर लिया है.
3- कुमारस्वामी: पूर्व सीएम और जनता दल सेकुलर के नेता एच डी कुमारस्वामी को चन्नापटना से टिकट दिया है.
4- प्रियांक खड़गे: कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक इस बार चितापुर सीट से चुनाव मैदान में हैं.
5- जी परमेश्वर: कांग्रेस ने पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर को कोरातागेरे (एससी) सीट से टिकट दिया है.
6- एच मुनियप्पा: कांग्रेस ने पूर्व मंत्री एच मुनियप्पा को देवनहल्ली से उतारा है.
7- यू टी खादर: यू टी खादर चार बार के कांग्रेस विधायक हैं. उनकी दक्षिण कन्नड़ में अच्छी पकड़ मानी जाती है. उन्हें मंगलुरु से टिकट दिया गया है.
इनपुटः अनघ