scorecardresearch
 

नई नहीं है रिजॉर्ट राजनीतिः जानें कब-कब छुपाए गए विधायक

देश की राजनीति में विधायकों के लिए होटल और रिजॉर्ट में ठहराने की यह कहानी कोई पहली नहीं है. इससे पहले भी कई दफा ऐसे हालात बने जब राजनीतिक दलों के अपने विधायकों को फूट से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी और उन्हें अपनी निगरानी में होटल या रिजॉर्ट में ठहराया गया.

Advertisement
X
बसों के जरिए रिजॉर्ट ले जाए गए विधायक
बसों के जरिए रिजॉर्ट ले जाए गए विधायक

कर्नाटक में राजनीतिक नाटक अपने चरम पर है. अल्पमत में होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने आनन-फानन में सरकार बना ली. राज्यपाल की ओर से बहुमत साबित करने के 15 दिन की मोहलत दिए जाने के बाद विपक्षी कांग्रेस और जेडीएस अपने-अपने विधायकों को बचाने की कोशिश में जुट गए. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को शनिवार शाम 4 तक बहुमत साबित करने का वक्त दिया.

ताजा मामले में कांग्रेस और जेडीएस ने अपने-अपने विधायकों को बचाने के लिए पहले बेंगलुरु के रिजॉर्ट में रखा. फिर उन्हें हैदराबाद के होटल ले जाया गया. दोनों दल अपने विधायकों की हरकतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं कि कोई भी विधायक बीजेपी से खेमे में न चला जाए.

देश की राजनीति में विधायकों के लिए होटल और रिजॉर्ट में ठहराने की यह कहानी कोई पहली नहीं है. इससे पहले भी कई दफा ऐसे हालात बने जब राजनीतिक दलों के अपने विधायकों को फूट से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी और उन्हें अपनी निगरानी में होटल या रिजॉर्ट में ठहराया गया.

Advertisement

आइए, जानते हैं कि पहले भी घटे ऐसे ढेरों घटनाओं में से कुछ रोचक अवसरों के बारे में...

1984 में आंध्र प्रदेश की राजनीति

1984 में आंध्र प्रदेश की राजनीति में ऐसा दिलचस्प वाकया सामने आया था. तब राज्य में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया एनटी रामाराव को बहुमत साबित करने के लिए महीने भर का समय दिया गया था. तब कर्नाटक के मुख्यमंत्री आरके हेगड़े ने उन्हें विधायकों के साथ कर्नाटक के देवानाहैली रिजॉर्ट में शरण दी थी.

2002 महाराष्ट्र की राजनीति

विधायकों को बचाने के लिए यह खर्चीली कवायद राजनीतिक दलों को सन 2000 के बाद ज्यादा ही करनी पड़ी. 2002 में महाराष्ट्र में कांग्रेस के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को अपनी सरकार बचाने के लिए 40 विधायकों के साथ बेंगलुरु में शरण लेनी पड़ी थी और यहीं से सीधे महाराष्ट्र विधानसभा में जाकर उन्होंने अपना बहुमत साबित किया था.

2004 में कर्नाटक की राजनीति

2004 में भी कर्नाटक विधानसभा की स्थिति आज की तरह हो गई थी और उस समय किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला. 14 साल पहले हुए चुनाव में बीजेपी 90 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि कांग्रेस को 65 और जेडीएस को 58 सीटें हासिल हुई. जेडीएस ने अपने विधायकों को बचाने के लिए बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में छिपाकर रखा था. तब भी जेडीएस ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया और उसके विधायक रिजॉर्ट से सीधे विधानसभा में वोट डालने पहुंचे थे.

Advertisement

2006 में भी विधायकों को बचाने की जुगाड़

कर्नाटक में 2 साल बाद एक बार ऐसे हालात बने कि जेडीएस को अपने विधायकों को लेकर रिजॉर्ट जाना पड़ा. 2006 में पार्टी के नेता कुमारस्वामी ने पिता एचडी देवेगौड़ा को नाराज कर बीजेपी के साथ सरकार बना ली और वह अपने समर्थक विधायकों के साथ बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए थे. बाद में सिद्धारमैया सरकार के गिरने के बाद वह विधायकों के साथ गोवा में ठहरे रहे.

2008 में फिर रिजॉर्ट गए जेडीएस के विधायक

2008 में कर्नाटक की राजनीति में विधायकों को बचाने का खेल शुरू हुआ. उस समय राज्य में 110 सीटों के साथ बहुमत के बेहद करीब पहुंची बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को बचाए रखने के लिए बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में कई दिनों तक रोके रखा था.

2017 में गुजरात के विधायक बेंगलुरु में

पिछले साल भी बेंगलुरु फिर विधायकों के रिजॉर्ट में ठहराए जाने को लेकर चर्चा में रहा. गुजरात में राज्यसभा चुनाव का पेच जबरदस्त तरीके से फंस गया था. कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों को बचाने को एकजुट बनाए रखने के लिए बेंगलुरु के ईगलटन रिजॉर्ट में कई दिनों तक रखा था. दिग्गज नेता और सोनिया गांधी के बेहद खास अहमद पटेल को राज्यसभा पहुंचाने के लिए कांग्रेस को ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा था. इसके लिए कांग्रेस ने अपने विधायक बेंगलुरु भी भेजा, जहां उन्होंने विधायकों की बकायदा परेड भी कराई.

Advertisement

Advertisement
Advertisement