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गनौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा, कुलदीप का किला भेदने की कोशिश में BJP

पहला ही चुनाव जीतने के बाद विधानसभा अध्यक्ष बने कुलदीप ने जीत का क्रम तब भी जारी रखा, जब प्रदेश की 47 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.

गनौर गनौर

  • कांग्रेस के टिकट पर कुलदीप शर्मा मैदान में
  • पहली बार ही विधानसभा अध्यक्ष बने थे कुलदीप

हरियाणा की गनौर सीट सन 2009 के विधानसभा चुनाव से अस्तित्व में आई थी. इससे पहले कैलाना के नाम से जानी जाने वाली सोनीपत जिले की गनौर विधानसभा सीट 21वीं सदी में कांग्रेस का अभेद्य किला बनकर उभरी. 2005 में जहां कांग्रेस के जितेंद्र मलिक ने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार निर्मल को मात दी, वहीं 2009 में पार्टी के कुलदीप शर्मा पहली बार विधानसभा पहुंचे थे.

पहला ही चुनाव जीतने के बाद विधानसभा अध्यक्ष बने कुलदीप ने जीत का क्रम तब भी जारी रखा, जब प्रदेश की 47 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. 2014 के चुनाव में भी मात खाने के बाद 2019 में बीजेपी कांग्रेस का अभेद्य किला भेदने के लिए पूरा जोर लगा रही है.

कुलदीप के खिलाफ बीजेपी के निर्मल

दो चुनाव से चला आ रहा कुलदीप शर्मा का विजयी क्रम तोड़ने के लिए बीजेपी ने इस बार निर्मल चौधरी को उतारा है. पिछली दफे पार्टी के उम्मीदवार जितेंद्र सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे. ऐसे में यह देखना भी रोचक होगा कि कांग्रेस के टिकट पर लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचने के लिए मैदान में उतरे कुलदीप के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बीजेपी के निर्मल उन्हें रोक पाते हैं या नहीं.

क्या है गनौर का समीकरण

गनौर विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी ने जितेंद्र रंगा और जननायक जनता पार्टी ने रणधीर मलिक को उम्मीदवार बनाया है. इस क्षेत्र की गिनती जाट बाहुल्य सीटों में होती है. विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. जाट और ब्राह्मण वोटों का समीकरण साधकर कुलदीप लगातार चुनाव जीतते आए हैं.

आसान नहीं बीजेपी की राह

सोनीपत जिले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अच्छा प्रभाव माना जाता है. हुड्डा के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सन 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता भले ही गंवा दी थी, लेकिन सोनीपत की छह में पांच सीटों पर जीत का परचम लहराया था. गनौर से उम्मीदवार कुलदीप शर्मा हुड्डा के करीबी माने जाते हैं. कांग्रेस ने फिर से कुलदीप पर ही दांव लगाया है, ऐसे में बीजेपी की राह आसान नजर नहीं आती.

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