हरियाणा की सियासत की बात हो और जाट पॉलिटिक्स की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. सूबे की सत्ता पर सफलतापूर्वक पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनावी रणभूमि में उतरी मनोहर लाल खट्टर सरकार के प्रमुख जाट चेहरों में से एक हैं ओम प्रकाश धनखड़. धनखड़ झज्जर जिले की बादली विधानसभा सीट से विधायक हैं. पार्टी ने एक बार फिर धनखड़ को ही उम्मीदवार बनाया है.
पिछली बार 2014 के विधानसभा चुनाव में धनखड़ ने लगभग नौ हजार वोटों से जीत हासिल की थी. निर्दलीय उम्मीदवार कुलदीप वत्स दूसरे स्थान पर रहे थे. इस बार धनखड़ के सामने फिर से कुलदीप वत्स की चुनौती है. कुलदीप को इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है. इनके अलावा इंडियन नेशनल लोकदल से महाबीर गुलिया, जननायक जनता पार्टी से संजय कबलाना समेत कुल 15 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
भाजपा को मिल रही कड़ी चुनौती
जाटलैंड की राजनीति में इस दफे सत्ताधारी भाजपा को कड़ी चुनौती मिल रही है. हरियाणा की सियासत का प्रतीक माने जाने वाले जाट अधिकतर साइलेंट मोड में हैं, लेकिन विरोधी दल गैर जाट सरकार का कार्ड खेलकर भावनाएं उभारने में कसर नहीं छोड़ रहे.
क्या है अतीत
बादली विधानसभा सीट से 2014 के चुनाव में ओम प्रकाश धनखड़ को 41549 वोट मिले थे. धनखड़ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 19828 वोट से शिकस्त दी थी. धनखड़ से पहले यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी. 2009 के चुनाव में कांग्रेस के नरेश कुमार ने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय बृजेंद्र सिंह चाहर को मात दी थी. इससे पहले विधायक रहे धीरपाल सिंह ने इस क्षेत्र का पांच बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. हालांकि वह एक दल में स्थिर नहीं रहे और विभिन्न दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा.