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तारापुर विधानसभा सीट: JDU के मेवालाल चौधरी की नजर लगातार दूसरी जीत पर

तारापुर विधानसभा सीट बिहार के मुंगेर जिले में आती है. जुमई संसदीय क्षेत्र में आनी वाला तारापुर की जनसंख्या 456549 है. यहां की 87.63 फीसदी आबादी ग्रामीण और 12.37 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है.

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एमएल चौधरी (फाइल फोटो)
एमएल चौधरी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंगेर जिले में आती है तारापुर विधानसभा सीट
  • जेडीयू के एमएल चौधरी हैं विधायक
  • 2015 के चुनाव में हासिल की थी जीत

बिहार की तारापुर विधानसभा सीट मुंगेर जिले में आती है. यहां पर 1951 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. तारापुर में हुए हाल के चुनावो में आरजेडी और जेडीयू के बीच मुकाबला होते आया है. फिलहाल इस सीट पर जेडीयू का कब्जा है और मेवालाल चौधरी यहां के विधायक हैं.

सामाजिक ताना-बाना

तारापुर विधानसभा सीट बिहार के मुंगेर जिले में आती है. जुमई संसदीय क्षेत्र में आने वाले तारापुर की जनसंख्या 456549 है. यहां की 87.63 फीसदी आबादी ग्रामीण और 12.37 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात कुल जनसंख्या से क्रमशः 15.1 और 1.97 है.

2015 का जनादेश

2015 के विधानसभा चुनाव में तारापुर में 289179 वोटर्स थे. इसमें से 53.94 फीसदी पुरुष और 46.06 फीसदी महिला वोटर्स थीं. तारापुर में 152292 लोगों ने वोटिंग की थी. यहां पर 52 फीसदी मतदान हुआ था. इस चुनाव में जेडीयू के एमएल चौधरी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के शकुनी चौधरी को मात दी थी.

एमएल चौधरी को 66411 (43.62 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं शकुनी चौधरी के खाते में 54464(35.77 फीसदी ) वोट पड़े थे. एमएल चौधरी ने 11 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. 

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विधायक के बारे में

4 जनवरी 1953 को जन्मे मेवालाल (एमएल) चौधरी की शैक्षणिक योग्यता एमएससी है. उन्होंने पीएचडी भी की है. एमएल चौधरी ने 2010 में ही राजनीति में कदम रखा. 2015 में जीतकर वह पहली बार विधानसभा पहुंचे. एमएल चौधरी भारत सरकार में हॉर्टिकल्चर कमिश्नर रह चुके हैं. वह बिहार के कृषि रोड मैप तैयार करने वाले दल के सदस्य भी रहे हैं. 

राजनीतिक पृष्ठभूमि

तारापुर विधानसभा सीट 1951 में अस्तित्व में आई. इस साल हुए यहां पर पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की. तारापुर में हुए शुरुआती तीन चुनावों में कांग्रेस ही विजयी रही. इसके बाद उसे 1967, 1969 के चुनाव में हार मिली. 1972 में कांग्रेस ने फिर वापसी की, लेकिन अगले ही चुनाव उसे हार का सामना करना पड़ा.

कांग्रेस को इसके बाद जीत 1990 में मिली. ये कांग्रेस की यहां पर आखिरी जीत थी. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को यहां पर पहली जीत 2000 के चुनाव में मिली. शकुनी चौधरी जो पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके थे, उन्होंने इस बार आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल किए. शकुनी चौधरी की जीत का सिलसिला आगे भी जारी रहा.

उन्होंने  2005 के चुनाव और उपचुनाव दोनों में जीत हासिल की. लेकिन 2010 के चुनाव में शकुनी चौधरी को जेडीयू की नीता चौधरी के हाथों शिकस्त मिली. और ये जेडीयू की तारापुर में पहली जीत रही. जीत के इस सिलसिले को नीतीश कुमार की पार्टी 2015 के चुनाव में भी जारी रखती है और पार्टी के नेता एमएल चौधरी किंग बनते हैं.

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तारापुर में अब तक हुए चुनाव के नतीजों को देखें तो यहां पर शुरू में तो कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन बाद में उसकी पकड़ कमजोर हो गई.तारापुर में आरजेडी ने तीन चुनावों में जीत हासिल की. पिछले दो चुनावों से जेडीयू को जीत मिलती आ रही है. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि तारापुर जेडीयू की एक मजबूत सीट बनती जा रही है. 

ये प्रत्याशी हैं मैदान में

तारापुर विधानसभा सीट पर 25 उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां से एलजेपी की मीना देवी, जेडीयू के मेवालाल चौधरी और आरजेडी की दिव्य प्रकाश प्रत्याशी हैं. तारापुर में मुकाबला जेडीयू और आरजेडी के बीच ही माना जा रहा है. लेकिन एलजेपी यहां पर जेडीयू का वोट काटने का काम कर सकती है. मेवालाल चौधरी यहां के मौजूदा विधायक हैं. 

कितनी हुई वोटिंग

तारापुर में पहले चरण के तहत मतदान हुआ. यहां पर 28 अक्टूबर को वोटिंग हुई. तारापुर में 55.12 फीसदी मतदान हुआ. मतगणना 10 नवंबर को की जाएगी.
 

 

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