
सोनबरसा विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) की ओर से जनता दल(यूनाइटेड) प्रत्याशी रत्नेश सदा ने जीत हासिल की है. उन्होंने महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी तरनी ऋषिदेव को मात दी है. रत्नेश सदा ने कुल 13,466 मतों से जीत हासिल की है.
इस विधानसभा चुनाव में रत्नेश सदा को कुल 67,678 वोट पड़े, वहीं तरनी ऋषिदेव 54,212 वोट पर सिमट गए. एनडीए को इस सीट पर 40.2 फीसदी लोगों का साथ मिला, वहीं महागठबंधन को 32.2 फीसदी लोगों का. इस सीट पर तीसरे नंबर की पार्टी बनकर लोक जनशक्ति पार्टी(एलजेपी) उभरी, जिसकी प्रत्याशी सरिता देवी को 13,566 वोट हासिल हुए. इस सीट पर कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे.

53.90 फीसदी लोगों ने किया था वोट
सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 83 हजार 53 वोटर हैं. इनमें पुरुषों की भागीदारी 51.82 फीसदी है. जबकि 48.18 फीसदी महिला मतदाता हैं. पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2015 में सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र के 1 लाख 48 हजार 844 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. इस सीट के लिए 7 नवंबर को 53.90 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया.
जेडीयू की रही है परंपरागत सीट
सोनबरसा विधानसभा सीट सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की परंपरागत सीट रही है. साल 2010 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर जेडीयू का कब्जा है. साल 2010 से ही जेडीयू के रत्नेश सदा विधायक हैं. रत्नेश सदा ने साल 2010 के विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की सरिता देवी को करीब 35 हजार वोट के अंतर से मात दी थी. एक बार फिर रत्नेश सदा जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं.
किस-किसके बीच रही लड़ाई?
साल 2015 में भी यही कहानी दोहराई गई. रत्नेश सदा के सामने एलजेपी ने सरिता देवी को ही मैदान में उतारा. सदा इस बार भी सरिता देवी को ही उतारा. इस बार भी परिणाम सदा के पक्ष में रहा. हालांकि, इस जीत का अंतर कम हो गया और सदा पिछले चुनाव के 35 हजार की तुलना में इस बार 25 हजार वोट के अंतर से ही जीत हासिल कर पाए. इस बार भी जेडीयू ने रत्नेश सदा को टिकट दिया. रत्नेश सदा के सामने जन अधिकार पार्टी ने मनोज पासवान, लोक जनशक्ति पार्टी ने सरिता देवी और कांग्रेस ने तरनी ऋषिदेव को टिकट दिया. इस सीट से 17 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई लेकिन जीत हासिल जेडीयू को हुई.
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कभी कांग्रेस का था दबदबा
सोनबरसा विधानसभा सीट का चुनावी अतीत देखें तो इस सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा था. साल 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के अशोक कुमार सिंह ने स्वतंत्र नारायण यादव को हराया था. इसके बाद 1980 के चुनाव में कांग्रेस के सूर्य नारायण यादव विजयी रहे. 1985 में सूर्य नारायण यादव फिर से विधायक चुने गए.
साल 1995 में जनता दल यूनाइटेड के अशोक कुमार सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार तेज नारायण यादव को शिकस्त दी. इसके बाद साल 2000 के विधानसभा चुनाव में भी अशोक कुमार सिंह इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रहे और प्रतिद्वंदी उम्मीदवार किशोर कुमार सिंह को हराया. साल 2005 में दो दफे विधानसभा चुनाव हुए और दोनों ही दफे बतौर निर्दलीय उम्मीदवार किशोर कुमार विधानसभा पहुंचने में सफल रहे.
किशोर ने फरवरी 2005 के चुनाव में आरजेडी के अशोक कुमार सिंह को मात दी थी. वहीं, इसी साल अक्टूबर के चुनाव में किशोर आरजेडी के ही रंजीत यादव को हराकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. साल 2010 के चुनाव में जेडीयू के रत्नेश सदा विजयी रहे और तब से यह सीट जेडीयू के कब्जे में है.