बिहार का मधेपुरा जिला हाइप्रोफाइल रहा है. इस जिले में आरजेडी का काफी दबदबा रहा है. लालू प्रसाद यादव दो बार यहीं से लोकसभा पहुंचे थे. मधेपुरा के दो अनुमंडल तथा 11 प्रखंड हैं. यह जिला उत्तर में अररिया और सुपौल, दक्षिण में खगड़िया और भागलपुर जिला, पूर्व में पूर्णिया तथा पश्चिम में सहरसा जिले से घिरा हुआ है.
सियासी पृष्ठभूमि
पप्पू यादव और शरद यादव जैसे बड़े नेता भी इसी इलाके से आते हैं. जिले की चार विधानसभा सीटों में से पिछले चुनाव में नीतीश के प्रत्याशियों ने तीन और आरजेडी के एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी. हालांकि इस बार मुख्य मुकाबला आरजेडी और उसके सहयोगी दलों की एनडीए प्रत्याशी के बीच होना है. आरजेडी के सामने इस बार जिले में अपनी साख बचाने का सवाल होगा.
ये जिला मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बी. पी. मंडल का पैतृक जिला है, जो द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी रहे जिसे मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है. इनकी पोर्ट के आधार पर ही ओबीसी वर्ग को देश में आरक्षण मिला.
1787 स्क्वेयर किलोमीटर में फैले मधेपुरा जिला की जनसंख्या 1993618 है. जिले की साक्षरता दर 52.25 है. मधेपुरा के दो अनुमंडल तथा 11 प्रखंड हैं. मधेपुरा जिले में चंडी स्थान, सिंघेश्वर स्थान, श्रीनगर, रामनगर, बसन्तपुर, बिराटपुर और बाबा करु खिरहर यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं.
2015 का जनादेश
मधेपुरा जिला में कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं- आलमनगर, बिहारीगंज, सिंघेश्वर (SC) और मधेपुरा. आलमनगर की बात करें तो साल 2015 के चुनाव में इस सीट पर जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव 87962 मतों के साथ सबसे आगे रहे. दूसरे नंबर पर एलजेपी के चंदन महज 44086 वोट ही हासिल कर सके.
वहीं बिहारीगंज से जेडीयू के निरंजन कुमार मेहता ने 78361 वोट और बीजेपी के रवींद्र 49108 वोट हासिल करने में कामयाब हुए थे. आरक्षित सिंघेश्वर सीट से जेडीयू के ही रमेश ऋषिदेव 83073 वोट हासिल कर सके. दूसरे नंबर पर HAMS की मंजू देवी को कुल 32873 वोट मिले. वहीं मधेपुरा विधानसभा सीट से आरजेडी के चंद्रशेखर 90974 वोट के साथ बाजी मारी थी. दूसरे नंबर पर बीजेपी के विजय 53332 वोट हालिस किए.