बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके साथ ही सियासी गहमागहमी भी बढ़ने लगी है. सियासी दल एक-एक सीट का हिसाब लगाने में जुट गए हैं. दरभंगा जिले की जाले विधानसभा सीट भी इस बार कड़े मुकाबले में फंसती दिख रही है. जाले विधानसभा सीट पर इस समय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) काबिज है.
दरभंगा जिले की जाले सीट के लिए अंतिम चरण में 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी. जाले में 54.02 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. बीजेपी के पास जाले विधानसभा सीट पर जीत का हैट्रिक लगाने का मौका है. जाले सीट साल 2010 से ही बीजेपी के कब्जे में है. साल 2010 में भाजपा के उम्मीदवार विजय कुमार मिश्रा ने विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राम निवास को करीब 17 हजार वोट के अंतर से हराया था. विजय कुमार मिश्रा को 42 हजार 590 वोट मिले थे. उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राम निवास को 25 हजार 648 वोट मिले थे.
पिछले विधानसभा चुनाव यानी साल 2015 में बीजेपी ने जिवेश कुमार को चुनावी रणभूमि में उतारा. जिवेश ने भी चुनावी बाजी जीत ली. जिवेश ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के ऋषि मिश्रा को करीब पांच हजार वोट से हराया था. जिवेश को 62 हजार 59 वोट मिले, जबकि जेडीयू उम्मीदवार को 57 हजार 439 वोट के साथ दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था.
समाजवादी पार्टी के मुजीब रहमान तीसरे स्थान पर रहे थे. 2015 के चुनाव में इस सीट से 13 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी. इस बार भी बीजेपी ने जिवेश पर ही भरोसा जताया है. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के मसकूर अहमद उस्मानी ताल ठोक रहे हैं. जन अधिकार पार्टी ने इस सीट से अमन कुमार झा को टिकट दिया है.
जाले विधानसभा सीट पर एक बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने भी जीत का स्वाद चखा है. साल 1995 के चुनाव में भाकपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे अब्दुल सलाम ने जीत हासिल की थी.
जुदा हैं जेडीयू-आरजेडी की राह
पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू और आरजेडी, दोनों ही दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे. तब दोनों सत्ता बचाने के लिए चुनाव मैदान में थे. इस चुनाव में पिछले चुनाव के दोनों सहयोगियों की राह इस बार जुदा है. जेडीयू सत्ता बचाने के लिए चुनाव मैदान में है, वहीं आरजेडी खोई सत्ता वापस पाने के लिए जोर लगा रही है.